नेपाल में बाढ़ भूकंप से नहीं बल्कि ग्लेशियर ढहने से आयी : यूएसजीएस
नेपाल में बाढ़ भूकंप से नहीं बल्कि ग्लेशियर ढहने से आयी : यूएसजीएस
वाशिंगटन, 27 अगस्त (भाषा) अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) ने कहा कि नेपाल में अचानक आई बाढ़ का कारण 4.4 तीव्रता वाला भूकंप नहीं, बल्कि ग्लेशियर ढहना था।
दरअसल प्रारंभिक तौर पर कहा गया था कि भूकंप के बाद बाढ़ आई है।
यूएसजीएस ने कहा कि लंबी अवधि वाली भूकंपीय तरंगों के अतिरिक्त विश्लेषण से पता चला कि ग्लेशियर के ढहने और मलबे के बहाव के कारण कंपन उत्पन्न हुए थे।
बुधवार को तिब्बत में अचानक आई बाढ़ ने नेपाल के रसुवा और धादिंग जिलों में भारी तबाही मचाई। इसमें 162 लोगों की मौत हो गई, जबकि 750 लोग लापता हैं। लापता लोगों में 133 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।
यूएसजीएस ने घटना से संबंधित अपने नवीनतम बयान में कहा, ‘‘शुरुआत में इस घटना को 4.4 तीव्रता का भूकंप बताया गया था। आसपास के भूकंपीय स्टेशनों से प्राप्त आंकड़ों, लंबी अवधि वाली भूकंपीय तरंगों और उपग्रह से प्राप्त तस्वीरों के अतिरिक्त विश्लेषण के बाद यह निष्कर्ष निकला कि यह कंपन ग्लेशियर के ढहने और मलबे के बहाव के कारण हुआ था तथा कोई भूकंप नहीं आया था।’’
उसने कहा, ‘‘यूएसजीएस ने निष्कर्ष निकाला कि कंपन की यह घटना ग्लेशियर के ढहने और मलबे के बहाव के कारण हुई, जिसके बाद निचले इलाकों की ओर विनाशकारी प्रभाव देखने को मिले।’’
कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलगरी में भू-आकृति विज्ञान के सहायक प्रोफेसर डेनियल शुगर ने कहा कि बाढ़ 5,200 मीटर की ऊंचाई पर एक चट्टान से ग्लेशियर के खिसककर नीचे गिरने के कारण आई।
शुगर ने प्राकृतिक आपदा से एक दिन पहले यानी मंगलवार और बुधवार को क्षेत्र की ली गई उपग्रह तस्वीरों की तुलना की।
‘न्यू साइंटिस्ट’ पत्रिका ने शुगर के हवाले से कहा, ‘‘उपग्रह तस्वीरों की तुलना करने पर ऐसा लगता है कि आसपास के ग्लेशियरों में पिछले 24 घंटों के दौरान काफी बर्फ पिघली है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मेरा अनुमान है कि बर्फ और ग्लेशियर की बर्फ के पिघलने से ग्लेशियर में काफी मात्रा में पानी हो गया। यह पानी नीचे रिसकर ग्लेशियर की सतह तक पहुंचा और उसे चिकना कर दिया। यही ग्लेशियर के ढहने के लिए पर्याप्त वजह थी।’’
भाषा गोला शोभना
शोभना

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