उत्तर कोरिया मजबूत हो रहा, दक्षिण कोरिया घटते अमेरिकी समर्थन के बीच स्थिति का आकलन कर रहा
उत्तर कोरिया मजबूत हो रहा, दक्षिण कोरिया घटते अमेरिकी समर्थन के बीच स्थिति का आकलन कर रहा
( वर्जीन ग्रजेल्कजिक, एस्टन यूनिवर्सिटी )
बर्मिंघम, 18 अगस्त (द कन्वरसेशन) यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के अनुसार, उत्तर कोरिया यूक्रेन में रूस के सैन्य अभियान में मदद के लिए 50,000 तक नए सैनिक भेजने की तैयारी कर रहा है। हालांकि दक्षिण कोरिया का विदेश मंत्रालय जेलेंस्की के दावे की पुष्टि नहीं कर पाया है, लेकिन सियोल में इसे गंभीरता से लिया गया है।
दस अगस्त को इस बारे में पूछे जाने पर दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्रालय के एक अज्ञात प्रवक्ता ने कहा कि उत्तर कोरिया-रूस सैन्य सहयोग सीधे तौर पर दक्षिण कोरिया की सुरक्षा से जुड़ा है और यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन करने वाली गतिविधि है। उन्होंने कहा कि सरकार का रुख है कि इस तरह का सहयोग तत्काल रोका जाना चाहिए और हम इससे जुड़े घटनाक्रम पर करीबी नजर रख रहे हैं।
उत्तर कोरिया की कोई नई तैनाती एक स्पष्ट दिशा को और मजबूत करेगी। प्योंगयांग और मॉस्को ने जून 2024 में पारस्परिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे और कुछ ही महीनों के भीतर 15,000 तक उत्तर कोरियाई कर्मियों को रूस भेजा गया था। इनमें निर्माण कर्मियों से लेकर रसद कर्मचारी, मिसाइल संचालक, इंजीनियर और पैदल सैनिक शामिल थे। इनमें 1,500 विशेष बलों के जवान भी थे।
रूस के साथ साझेदारी से उत्तर कोरिया को काफी लाभ हुआ है। अब तक उसके सैनिकों ने यूक्रेन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमा के भीतर लड़ाई नहीं लड़ी है। लेकिन उत्तर कोरियाई सैनिकों ने रूस के कुर्स्क क्षेत्र में जमीनी अभियानों का युद्ध अनुभव हासिल किया है, जहां यूक्रेन ने 2024 में घुसपैठ की थी। उत्तर कोरियाई मिसाइलों का इस्तेमाल यूक्रेन पर हमलों में भी किया गया है और प्योंगयांग को रूस से नई सैन्य तकनीक मिली है।
इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि इस साझेदारी से उत्तर कोरिया को आर्थिक लाभ मिला है। कई वर्षों तक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में गिरावट के बाद 2025 में उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था 3.5 प्रतिशत बढ़ी। रूस को दी जा रही सैन्य मदद के सीधे भुगतान के अलावा, दोनों देशों की साझेदारी के तहत उत्तर कोरिया को ईंधन, खाद्य सामग्री और तकनीकी सहायता मिल रही है तथा कर्ज की अदायगी भी टाली जा रही है।
इस साझेदारी ने एक स्पष्ट चक्र बनाया है, जिसमें उत्तर कोरिया रूस को युद्ध में इस्तेमाल के लिए गोला-बारूद और सैनिक उपलब्ध कराता है, मॉस्को इसके बदले प्योंगयांग को संसाधन और तकनीक मुहैया कराता है और उत्तर कोरिया इनका इस्तेमाल दक्षिण कोरिया के खिलाफ अपनी स्थिति मजबूत करने में करता है।
—– दक्षिण कोरिया की चिंता —–
दक्षिण कोरिया के लिए एक प्रमुख चिंता यह है कि उत्तर कोरियाई सैनिक रूस में क्या सीख रहे हैं। उत्तर कोरियाई सेना यानी कोरियाई पीपुल्स आर्मी ने 1950 के दशक की शुरुआत में कोरियाई युद्ध के बाद से किसी बड़े पारंपरिक संघर्ष में हिस्सा नहीं लिया है। लेकिन अब वह सीधे एक आधुनिक युद्ध में शामिल है।
उत्तर कोरियाई कर्मियों ने न केवल प्रत्यक्ष लड़ाई में हिस्सा लिया है, बल्कि ड्रोन निगरानी, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और सटीक तोपखाने हमलों में भी भाग लिया है। प्योंगयांग अब परीक्षण के बजाय वास्तविक युद्ध में अपनी हथियार तकनीक का विश्लेषण और उसकी प्रभावशीलता का आकलन भी कर सकता है।
कीव और अन्य सहयोगी देशों की राजधानियों से सियोल से यूक्रेन संघर्ष में अपनी भागीदारी बढ़ाने की मांग की गई है, लेकिन दक्षिण कोरियाई नागरिकों और राजनीतिक वर्ग दोनों में सीधे सैन्य समर्थन देने का विरोध है।
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युन्ग ने 2025 से ही इस रुख को स्पष्ट किया है। यूरोप में दूर के युद्ध में शामिल होने के बजाय ली ने अपनी विदेश नीति का ध्यान कोरियाई प्रायद्वीप पर केंद्रित किया है। उन्होंने हाल में 15 अगस्त को उत्तर कोरिया के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए बातचीत का आह्वान किया।
हालांकि, दक्षिण कोरिया उभरते उत्तर कोरियाई खतरों के खिलाफ अपनी तैयारी मजबूत करने की भी कोशिश कर रहा है। दक्षिण कोरिया और अमेरिकी सेना के बीच होने वाले वार्षिक ‘उल्ची फ्रीडम शील्ड’ सैन्य अभ्यास का स्वरूप बदला है। अब पारंपरिक परिदृश्य आधारित मैदानी अभ्यास और हवाई अभियानों के अलावा इसमें ड्रोन, साइबर हमलों और जीपीएस जामिंग को भी शामिल किया गया है।
लेकिन यहां एक बड़ी चिंता दक्षिण कोरिया के अपने ऐतिहासिक सुरक्षा साझेदार अमेरिका के साथ संबंधों को लेकर है। जिस तरह सियोल यूक्रेन में रूस के युद्ध में शामिल नहीं होगा, उसी तरह वह ईरान के खिलाफ अमेरिका के युद्ध में शामिल होने से भी हिचक रहा है। अन्य यूरोपीय अमेरिकी सहयोगियों की तरह उसे भी इसके परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने 16 अगस्त को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि अमेरिका दक्षिण कोरिया के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यासों में ‘‘काफी कमी’’ करेगा। उन्होंने इसके लिए दक्षिण कोरिया के ईरान युद्ध में शामिल होने से इनकार करने और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ अपने ‘‘बहुत अच्छे’’ व्यक्तिगत संबंध को कारण बताया।
इस बीच, दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति होने के बावजूद अमेरिका ने ईरान के साथ युद्ध में बड़ी मात्रा में गोला-बारूद का इस्तेमाल किया है। अगस्त की शुरुआत में आई रिपोर्टों में कहा गया था कि अमेरिका ने अपने सटीक हमले करने वाली मिसाइलों के ‘‘लगभग सभी’’ भंडार का इस्तेमाल कर लिया है।
2026 की शुरुआत में, जब अमेरिका ईरान में अपने मिसाइल भंडार का तेजी से इस्तेमाल कर रहा था, तब वाशिंगटन और सियोल ने दक्षिण कोरिया में तैनात कुछ अमेरिकी पैट्रियट रक्षा मिसाइल प्रणालियों को मध्य पूर्व भेजने की संभावना पर चर्चा की थी। उत्तर कोरिया के मजबूत होने के साथ सियोल यह समझ रहा है कि उसकी सुरक्षा नीति अब इस धारणा पर आधारित नहीं रह सकती कि उत्तर के साथ संघर्ष की स्थिति में अमेरिकी हथियार उपलब्ध होंगे।
यह देखना बाकी है कि उत्तर कोरिया के अतिरिक्त 50,000 सैनिक वास्तव में भेजे जाते हैं या नहीं। लेकिन सियोल के लिए व्यापक चेतावनी स्पष्ट है—उसे मजबूत उत्तर कोरिया के लिए तैयार रहना होगा, ऐसी दुनिया में जहां सबसे बड़े सैन्य हथियार भंडार भी हमेशा नीतिगत लक्ष्यों को हासिल करने के लिए पर्याप्त नहीं होते।
( द कन्वरसेशन ) मनीषा पवनेश
पवनेश

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