(सागर कुलकर्णी)
वाशिंगटन, 15 मई (भाषा) अगले सप्ताह भारत की यात्रा पर आ रहे अमेरिकी परमाणु उद्योग के वरिष्ठ अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट से मुलाकात की।
कड़े नियंत्रण वाले इस क्षेत्र को भारत द्वारा निजी कंपनियों के लिए खोले जाने के बाद अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की यह यात्रा हो रही है जो अपने इस दौरे के दौरान सहयोग के क्षेत्रों की तलाश करेगा।
अमेरिका का 20 सदस्यीय कार्यकारी परमाणु उद्योग प्रतिनिधिमंडल सरकारी अधिकारियों और निजी क्षेत्र के नेताओं के साथ बातचीत करेगा, जो पिछले साल दिसंबर में सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (शांति) कानून के लागू होने के बाद से असैन्य परमाणु क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों का पता लगाने का इच्छुक है।
शांति अधिनियम ने 1964 के परमाणु ऊर्जा अधिनियम और 2010 के परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व (सीएनएलडी) अधिनियम का स्थान लिया है। सीएनएलडी अधिनियम में परमाणु आपूर्तिकर्ताओं पर सख्त दायित्व के प्रावधान थे, जिन्हें वैश्विक कंपनियों ने भारतीय बाजार में प्रवेश करने में एक बाधा के रूप में पाया।
‘यूएस-इंडिया स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप फोरम’ (यूएसआईएसपीएफ)और ‘न्यूक्लियर एनर्जी इंस्टीट्यूट’ की एक पहल के तहत अमेरिकी परमाणु उद्योग प्रतिनिधिमंडल भारत की यात्रा कर रहा है।
यूएसआईएसपीएफ ने शुक्रवार को ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘यूएसआईएसएफ और परमाणु ऊर्जा संस्थान (एनईआई) को भारत यात्रा से पहले अमेरिकी ऊर्जा मंत्री राइट का स्वागत करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होंने अमेरिकी कार्यकारी परमाणु उद्योग प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के साथ इस विषय में जानकारी साझा की।’’
अमेरिकी उद्योग प्रतिनिधिमंडल से नागरिक परमाणु ऊर्जा में भारतीय निजी क्षेत्र के साथ संयुक्त परियोजना के अवसरों का पता लगाने की उम्मीद है।
भाषा सुरभि धीरज
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