नेपाल में विपक्ष ने बालेन्द्र शाह सरकार पर नागरिकों के कल्याण की अनदेखी करने का आरोप लगाया
नेपाल में विपक्ष ने बालेन्द्र शाह सरकार पर नागरिकों के कल्याण की अनदेखी करने का आरोप लगाया
(शिरीष बी प्रधान)
काठमांडू, पांच जुलाई (भाषा) नेपाल की मुख्य विपक्षी पार्टी ने रविवार को बालेन्द्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार पर आरोप लगाया कि वह आम नागरिकों के कल्याण के बजाय सोशल मीडिया पर लोकप्रियता को प्राथमिकता दे रही है।
नेपाली कांग्रेस ने सरकार के सत्ता में आने के शुरुआती 100 दिनों के कामकाज की समीक्षा करने के लिए काठमांडू से सटे ललितपुर जिले में पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में एक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया।
नेपाली कांग्रेस के प्रमुख गगन कुमार थापा ने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि वह भूमिहीन बस्तियों में रहने वाले लोगों के बीच डर और असुरक्षा का माहौल पैदा कर रही है।
इस साल की शुरुआत में काठमांडू घाटी में सरकार द्वारा बेदखली अभियान शुरू किए जाने के कारण 2,600 से ज़्यादा घरों में रहने वाले 15,000 से अधिक लोग विस्थापित हो गए।
नेपाल सरकार ने मई में काठमांडू में नदी के किनारे बसी बस्तियों से विस्थापित हुए हर भूमिहीन और अनधिकृत रूप से रहने वाले परिवार को पुनर्वास सहायता के तौर पर 15,000 रुपये देने का फ़ैसला किया।
नेपाली कांग्रेस के प्रमुख ने कहा, “यह सरकार लोगों की जान की तुलना में सोशल मीडिया पर मिलने वाले ‘लाइक्स’ को लेकर ज़्यादा चिंतित है।”
इस कार्यक्रम में कई स्वतंत्र विशेषज्ञों ने भी अपनी चिंताएं ज़ाहिर कीं।
राष्ट्रीय योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष गोविंद राज पोखरेल ने कहा, “सरकार गलत जानकारी और भ्रामक बातें फैलाकर देश चला रही है और सोशल मीडिया को अपना युद्ध का मैदान बना रही है।”
पोखरेल ने दावा किया कि सरकार शेयर बाज़ार में निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में नाकाम रही है, जिसके कारण पिछले तीन महीनों में छोटे निवेशकों को 4.5 अरब नेपाली रुपये का नुकसान हुआ है।
विदेश मामलों के जानकार सौरभ राज पंत ने कहा, “बालेन्द्र शाह सरकार ने सत्ता में आने के बाद शुरुआती 100 दिनों में जो वादे किए थे, उनमें से सिर्फ़ 16 फ़ीसदी ही पूरे किए गए। सरकार की प्रगति असल में नहीं, बल्कि सिर्फ़ फ़ेसबुक और दूसरे सोशल मीडिया मंचों पर ही दिखी।”
सुशासन के जानकार रमेश अधिकारी ने आरएसपी सरकार पर आरोप लगाया कि वह “संस्थागत विकास और कानून के शासन को छोड़कर व्यक्ति-केंद्रित राजनीति को बढ़ावा दे रही है”।
भाषा प्रशांत दिलीप
दिलीप

Facebook


