(सज्जाद हुसैन)
इस्लामाबाद, 15 सितंबर (भाषा) पाकिस्तान की संघीय संवैधानिक अदालत (एफसीसी) ने मंगलवार को जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को इलाज के लिए एक निजी अस्पताल में स्थानांतरित किए जाने से जुड़े मामलों का रिकॉर्ड उच्चतम न्यायालय से मांगा।
अदालत ने देश भर के उच्च न्यायालयों में इसी तरह के किसी भी मामले से जुड़े रिकॉर्ड भी मांगे।
यह घटनाक्रम तब हुआ जब एफसीसी के मुख्य न्यायाधीश अमीनउद्दीन खान की अध्यक्षता वाली तीन-सदस्यीय पीठ ने अदियाला जेल के तीन कैदियों की अपील पर सुनवाई की; इन कैदियों ने खान को उपलब्ध इलाज और सुविधाओं की जानकारी मांगी थी।
पीठ में न्यायमूर्ति अली बाकर नजफी और न्यायमूर्ति आमिर फारूक भी शामिल हैं।
उन्होंने उच्च न्यायालय के उस आदेश का हवाला दिया, जिसमें पिछले महीने अधिकारियों को खान को निजी शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल ले जाने का निर्देश दिया गया था।
उच्चतम न्यायालय के आदेश पर, अधिकारियों ने सुरक्षा का हवाला देते हुए खान को निजी शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल के बजाय पाकिस्तान आयुर्विज्ञान संस्थान (पीआईएमएस) पहुंचाया।
एफसीसी ने उच्च न्यायालय में उठाए गए किसी भी ऐसे मामले का रिकॉर्ड मांगने के लिए संविधान के अनुच्छेद 175-ई का हवाला दिया। यह अनुच्छेद 27वें संविधान संशोधन के जरिए संविधान में जोड़ा गया था और यह एफसीसी को किसी भी मामले का रिकॉर्ड मंगाने और संवैधानिक कानून से जुड़े अहम सवालों वाले मामलों पर फैसला लेने का अधिकार देता है।
तीन कैदियों – मुहम्मद इलियास खान, मोहम्मद इस्माइल हुसैन और ओवैस अल्ताफ – ने शुरू में उच्चतम न्यायालय के 18 अगस्त के आदेश के बाद राहत पाने के लिए इस्लामाबाद उच्च न्यायालय (आईएचसी) का रुख किया था।
याचिकाएं 31 अगस्त को खारिज कर दी गईं, जब आईएचसी ने फैसला सुनाया कि किसी कैदी को अपनी पसंद के निजी अस्पताल में भर्ती होने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है और कैदियों के इलाज की मुख्य जिम्मेदारी राज्य के प्रशासनिक ढांचे और सरकारी अस्पतालों की है।
इसके बाद, कैदियों ने पिछले हफ्ते आईएचसी के आदेश को चुनौती देने के लिए एफसीसी से संपर्क किया।
खान पांच अगस्त, 2023 से जेल में बंद हैं और उनके समर्थकों का आरोप है कि उचित स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिलने के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई है। हालांकि, जेल अधिकारियों ने इस आरोप को खारिज कर दिया है।
भाषा प्रशांत पवनेश
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