बेरूत, 22 जून (एपी) बेरूत में रविवार को बड़ी संख्या में लोग एक लोकप्रिय लेबनानी पर्यावरण संरक्षण कार्यकर्ता को श्रद्धांजलि देने के लिए जुटे। वह देश के दक्षिणी तटीय इलाके में अपने घर पर हुए इजराइली हमले में घायल हो गई थीं और बाद में उनकी मौत हो गई।
लेबनान के तट पर समुद्री कछुओं को बचाने में दो दशक से ज़्यादा समय बिताने वाली मोना खलील, इस महीने की शुरुआत में मंसूरी गांव में अपने घर पर हुए हमले में गंभीर रूप से घायल हो गई थीं और शुक्रवार को उनकी मौत हो गई। वह 76 साल की थीं।
खलील ने मंसूरी में ‘ऑरेंज हाउस’ को एक छोटे पर्यावरण संरक्षण केंद्र और इको-टूरिज्म स्थल के रूप में विकसित करने में मदद की थी। यह जगह संकटग्रस्त ‘लॉगरहेड’ और ग्रीन समुद्री कछुओं के लिए सुरक्षित आश्रयस्थल बन गई थी। साथ ही, यहां स्वयंसेवकों को तट पर कछुओं के अंडे देने की गतिविधियों का रिकॉर्ड रखने का प्रशिक्षण भी दिया जाता था।
उनकी मौत की खबर से पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों और वर्षों तक उनके साथ काम करने व स्वयंसेवा करने वालों में गहरा शोक फैल गया।
पत्रकार और पर्यावरण कार्यकर्ता फादिया जोमा की मुलाकात खलील से पहली बार 2016 में हुई थी, जब वह लेबनान में समुद्री कछुओं पर शोध कर रही थीं। इसके बाद उन्होंने खलील की परियोजना में स्वयंसेवी के रूप में काम करने का फैसला किया।
जोमा ने कहा, ‘हम स्वयंसेवकों के लिए यह रिश्ता सिर्फ स्वयंसेवा तक सीमित नहीं रहा, मोना हमारे लिए मां जैसी बन गई थीं।’
जोमा, खलील की सबसे करीबी सहयोगियों में से एक बन गईं और बाद में उनके साथ मिलकर समुद्री कछुओं के संरक्षण परियोजना के प्रबंधन में भी मदद करने लगीं। उन्होंने अपने बच्चों को भी स्वयंसेवा के लिए साथ लाना शुरू किया, ताकि वे लेबनान के दक्षिणी तट पर अंडे देने वाले कछुओं और उनके बच्चों की सुरक्षा के काम को समझ सकें और उसमें योगदान दे सकें।
एपी तान्या वैभव
वैभव