मोदी ने ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री को श्रद्धांजलि दी, उज्बेक राष्ट्रपति के साथ पौधा लगाया

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मोदी ने ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री को श्रद्धांजलि दी, उज्बेक राष्ट्रपति के साथ पौधा लगाया

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  • Publish Date - August 30, 2026 / 07:32 PM IST,
    Updated On - August 30, 2026 / 07:32 PM IST

ताशकंद, 30 अगस्त (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को ताशकंद में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के सम्मान में शास्त्री स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के साथ मिलकर एक पौधा लगाया।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि शास्त्री का ‘जय जवान, जय किसान’ का कालजयी नारा पीढ़ियों को प्रेरित करता रहा है और जीवन सादगी, साहस और देश के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक था।”

भारत के दूसरे प्रधानमंत्री शास्त्री का 11 जनवरी, 1966 को उज्बेक राजधानी में अचानक निधन हो गया था; यह घटना 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध को समाप्त करने वाले ऐतिहासिक ताशकंद समझौते पर हस्ताक्षर करने के कुछ ही घंटों बाद हुई।

एमईए ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि मोदी और मिर्जियोयेव ने भारत की “एक पेड़ मां के नाम” पहल और उज्बेकिस्तान की “यशिल माकोन” हरित मुहिम के तहत राष्ट्रपति भवन के बगीचे में संयुक्त रूप से एक पेड़ भी लगाया।

इसमें कहा गया है, “यह कदम एक हरित और अधिक टिकाऊ भविष्य को बढ़ावा देने के प्रति भारत और उज्बेकिस्तान की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”

उज्बेकिस्तान की अपनी दो-दिवसीय राजकीय यात्रा के दौरान, कुक्सारोय प्रेसिडेंशियल पैलेस में मिर्जियोयेव के साथ प्रतिनिधिमंडल-स्तर की बातचीत के बाद मोदी ने पौधरोपण समारोह में हिस्सा लिया।

दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर व्यापक चर्चा की। इसमें व्यापार और निवेश, नवोन्मेष और स्टार्ट-अप, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और यूपीआई, रक्षा और सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा और औषधि, महत्वपूर्ण खनिज, कृषि, शिक्षा, पर्यटन, अंतरिक्ष और लोगों के बीच आपसी आदान-प्रदान जैसे विषय शामिल थे।

बातचीत के दौरान, दोनों पक्षों ने अपनी द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक ले जाने का फैसला किया। वे 2030 तक पांच अरब अमेरिकी डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य तय करने पर भी सहमत हुए और आर्थिक व निवेश संबंधों को और मजबूत करने के लिए एक व्यापार शिखर सम्मेलन आयोजित करने का आह्वान किया।

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी को विदेशी नेताओं के लिए उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च सम्मान ‘ओली दराजाली दोस्तलिक’ से सम्मानित किया गया।

भाषा प्रशांत नरेश

नरेश