मोदी का किर्गिस्तान दौरा संपर्क, स्वास्थ्य सेवा व डिजिटल संबंधों को बढ़ावा देने का मौका : विशेषज्ञ
मोदी का किर्गिस्तान दौरा संपर्क, स्वास्थ्य सेवा व डिजिटल संबंधों को बढ़ावा देने का मौका : विशेषज्ञ
बिश्केक, 30 अगस्त (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की किर्गिस्तान यात्रा से भारत को मध्य एशिया के साथ अपने संबंधों को और गहरा करने का मौका मिलेगा। विशेषज्ञों ने रविवार को यह उम्मीद जताई। उन्होंने क्षेत्र के साथ संपर्क बेहतर करने और स्वास्थ्य देखभाल तथा पर्यटन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान देने का आह्वान किया।
मोदी 26वें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए सोमवार और मंगलवार को बिश्केक में होंगे।
चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने 2001 में एससीओ की स्थापना की थी। 2017 में भारत और पाकिस्तान इसके पूर्ण सदस्य बने। इसके बाद 2023 में ईरान और 2024 में बेलारूस इसमें शामिल हुए।
बिश्केक स्थित स्वतंत्र अनुसंधान संस्थान ‘क्रॉसरोड्स सेंट्रल एशिया’ के सह-संस्थापक और कार्यकारी निदेशक शायरबेक जुराएव ने कहा कि यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है, जब मध्य एशिया पर लोगों का ज्यादा ध्यान है; क्षेत्र के देशों के आपसी संबंध बेहतर हो रहे हैं और बाहरी साझेदार परिवहन संपर्क और खनिज संसाधनों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
जुराएव ने भारत और किर्गिस्तान के बीच संबंधों को चीन या रूस का मुकाबला करने की कोशिश के तौर पर देखे जाने के खिलाफ आगाह किया।
मोदी उज्बेकिस्तान की दो दिन की यात्रा के बाद बिश्केक पहुंचेंगे, जहां वह एससीओ नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे, जिनमें किर्गिज राष्ट्रपति सादिर झापारोव भी शामिल हैं।
जुराएव ने ईमेल के जरिये ‘पीटीआई-भाषा’ से हुई बातचीत में कहा कि मोदी की यात्रा के ज्यादा ठोस नतीजे द्विपक्षीय बातचीत से निकलने की संभावना है, क्योंकि मध्य एशियाई देश अपनी बाहरी साझेदारियों में विविधता लाना चाहते हैं और अधिक निवेश आकर्षित करना चाहते हैं।
उन्होंने कहा, “बिश्केक भारत को चीन या रूस से मुकाबला करने वाली ताकत के रूप में नहीं देखता है और (मोदी की) यात्रा को इस नजरिये से पेश करना अच्छा नहीं माना जाएगा।”
जुराएव ने कहा कि इस साल एससीओ की अध्यक्षता कर रहा किर्गिस्तान मुख्य रूप से एक सफल शिखर सम्मेलन आयोजित करने में दिलचस्पी रखता है, ताकि उसकी कूटनीतिक पहचान मजबूत हो।
किर्गिस्तान ‘एससीओ के 25 साल : टिकाऊ शांति, विकास और समृद्धि के लिए एकजुट’ के आदर्श वाक्य के तहत संगठन की अध्यक्षता कर रहा है।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, एससीओ शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन के दौरान मोदी “सुरक्षा, संपर्क और अवसर” को लेकर भारत की प्राथमिकताओं को रेखांकित करेंगे।
नयी दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया में शोधार्थी अनुसुइया गांगुली ने कहा कि मध्य एशिया के साथ नयी दिल्ली के जुड़ाव में भारत से इस क्षेत्र की भौगोलिक दूरी और संपर्क की कमी को भी दूर करने की आवश्यकता है।
गांगुली ने कहा, “भारत और मध्य एशियाई देशों के बीच भौगोलिक दूरी सबसे बड़ी बाधाओं में से एक बनी हुई है।”
उन्होंने कहा कि चाबहार बंदरगाह और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (आईएनएसटीसी) संपर्क के वैकल्पिक रास्ते उपलब्ध कराते हैं।
गांगुली ने कहा, “अब प्राथमिकता इन मार्गों को व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक बनाने की होनी चाहिए।”
हाल के समय में 7,200 किलोमीटर लंबा आईएनएसटीसी और भी महत्वपूर्ण हो गया है। यह गलियारा स्वेज नहर से न गुजरते हुए ईरान के रास्ते मुंबई को सेंट पीटर्सबर्ग से जोड़ता है।
अमेरिका और इजराइल की ओर से इस साल ईरान पर किए गए हमलों में कैस्पियन सागर के तट पर स्थित आईएनएसटीसी के प्रमुख परिवहन केंद्र बंदर अंजली बंदरगाह को व्यापक नुकसान पहुंचा।
गांगुली ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के जारी रहने और इलाके में बदलते हालात की वजह से मध्य एशियाई देशों को अपनी बाहरी साझेदारियों में विविधता लाने की जरूरत महसूस हुई है।
उन्होंने कहा कि इससे भारत को फार्मास्यूटिकल्स, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, मानव-संसाधन विकास और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में अपनी मजबूत आर्थिक मौजूदगी बनाने का मौका मिला है।
भाषा पारुल अविनाश
अविनाश

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