नेपाल बाढ़: मलबे के बीच परिवार बिखरा सामान समेटकर फिर से जिंदगी बसाने की कोशिशों में जुटे
नेपाल बाढ़: मलबे के बीच परिवार बिखरा सामान समेटकर फिर से जिंदगी बसाने की कोशिशों में जुटे
गल्छी, 30 अगस्त (भाषा) “पहले यहां सब कुछ था, लेकिन अब कुछ नहीं बचा है। सब बर्बाद हो गया है।” अचानक आई भीषण बाढ़ से प्रभावित मध्य नेपाल के गल्छी गांव लौटे नयन तिवारी ने रुंधे गले से यह टिप्पणी की।
नयन उन लोगों में शामिल हैं, जो बाढ़ से मची तबाही के बीच अपना बचा-खुचा सामान वापस पाने और उन जगहों को फिर से बसाने की कोशिश में गल्छी वापस आए हैं, जहां कभी रोजमर्रा की जिंदगी की चहल-पहल हुआ करती थी।
बुधवार को अचानक आई बाढ़ का पानी भोटेकोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों से होते हुए नीचे की ओर बढ़ा, जिससे उत्तरी और मध्य नेपाल में भारी तबाही मची। आपदा में जान गंवाने वालों की संख्या रविवार को 700 का आंकड़ा पार कर गई, जबकि लगभग 2,500 लोग अब भी लापता हैं।
कक्षा 11 में पढ़ने वाले नयन और उनकी रिश्ते की बहन निवी तिवारी उन लोगों में शामिल हैं, जिन्होंने अपनी जिंदगी को फिर से पटरी पर लाने की कोशिशें शुरू कर दी हैं।
दोनों बाढ़ से बर्बाद हुए अपने मकान से मलबा हटा रहे हैं; कीचड़ और रेत की परतों के नीचे जो भी सामान मिल रहा है, उसे निकाल रहे हैं; और जो चीजें इस्तेमाल करने के लायक बची हैं, उन्हें अलग कर रहे हैं।
नयन ने ‘पीटीआई-वीडियो’ को बताया कि जब बाढ़ आई, तब वह काठमांडू में थे और हालात के बारे में पता चलते ही उन्होंने गल्छी में अपने परिवार से घर छोड़कर किसी सुरक्षित और ऊंचाई वाली जगह पर जाने को कहा।
उन्होंने बताया कि परिवार के सदस्यों के घर छोड़ने के ठीक बाद पानी का बहाव तेज हो गया और वह अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को बहा ले गया।
गल्छी नेपाल के बागमती प्रांत के धादिंग जिले की एक ग्रामीण नगरपालिका है, जो काठमांडू से लगभग 50 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में 2,000 से 3,500 फुट की ऊंचाई पर स्थित है।
नयन ने कहा कि उनके परिवार के लिए यह मकान एक इमारत से कहीं बढ़कर है, जिसमें उनके बचपन से लेकर परिवार के साथ बिताए गए खुशनुमा पलों की यादें बसी हुई हैं।
नयन के मुताबिक, “पहले यहां सब कुछ था, लेकिन अब कुछ नहीं बचा है। सब बर्बाद हो गया है। बहुत बुरा लग रहा है, लेकिन हम इसे फिर से बसाएंगे। हम कड़ी मेहनत करेंगे और घर को पहले जैसा बना देंगे।”
उन्होंने बताया कि बाढ़ के दौरान उनके मकान के भूमिगत तल में रेत भर गई, जबकि पहली मंजिल पर स्थित बेडरूम और रसोई में कीचड़ और मलबा घुस गया।
नयन के अनुसार, बाढ़ के पानी के तेज बहाव में उनके घर के आसपास स्थित 15 से अधिक मकान बह गए।
बाढ़ के बाद के विनाशकारी मंजर ने निवी को भी झंकझोरकर रख दिया है।
निवी ने कहा, “मैंने पहले कभी इतनी भयानक बाढ़ नहीं देखी थी। जब मैं काठमांडू से लौटी और अपने घर की हालत देखी, तो मुझे बहुत बेबस महसूस हुआ।”
उन्होंने कहा, “हम अपने परिवार के साथ मिलकर इस घर को पहले जैसा बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। हम जल्द ही इसकी मरम्मत करवाएंगे, क्योंकि हमारा बचपन यहीं बीता है। हमने इसी घर में चलना और पढ़ना सीखा। अब यह बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है, लेकिन हम इसे फिर से बसाएंगे।”
नुवाकोट जिले के त्रिशूली में भी तबाही का मंजर साफ दिख रहा था, जहां लोग कीचड़ की मोटी परतों के बीच से गुजरते हुए मलबे में अपना सामान और रिश्तेदारों को ढूंढ रहे थे।
देवीघाट में विस्थापित परिवार भोजन-पानी, रहने की जगह और अन्य सहायता के लिए एक आपातकालीन राहत शिविर में इकट्ठा हुए।
शिविर में रसोइये के रूप में काम करने वाले एक कर्मचारी ने बताया कि पीड़ितों के लिए खाना बनाने का काम शुरू हो गया है और जब तक लोगों को जरूरत होगी, तब तक यह जारी रहेगा।
कर्मचारी ने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा, “हम यह नहीं कहेंगे कि खाना खत्म हो गया है। जो भी यहां आएगा, उसे मुफ्त खाना दिया जाएगा।”
काठमांडू के एक अस्पताल में बाढ़ पीड़ितों के पोस्टर और तस्वीरें लगाए जाने के बाद उनके रिश्तेदार मुर्दाघर के पास जमा हुए। उन्हें उम्मीद थी कि वे अपने उन अपनों की पहचान कर सकेंगे, जो अब भी लापता हैं।
बाढ़ के बाद लापता लोगों में बिहार के समस्तीपुर जिले के आठ लोग शामिल हैं, जो नुवाकोट के बत्तार इलाके में टायर और हार्डवेयर की एक दुकान में काम करते थे।
संदेश पोद्दार के मुताबिक, बाढ़ के बाद उनके आठ सहकर्मी लापता हैं और उनके मोबाइल फोन पर भी संपर्क नहीं हो पा रहा है।
संदेश के दोस्त अजय ने बताया कि गल्छी से रसुवा की ओर जाने वाली सड़क अवरुद्ध हो गई है, जिससे उनके लिए आगे बढ़ना और अपने लापता साथियों को खोजना मुश्किल हो गया है।
भाषा पारुल सुरेश
सुरेश

Facebook


