पोप लियो 16वें ने दासता को वैध ठहराने में ‘पवित्र आसन’ की भूमिका के लिए ऐतिहासिक माफी मांगी

पोप लियो 16वें ने दासता को वैध ठहराने में ‘पवित्र आसन’ की भूमिका के लिए ऐतिहासिक माफी मांगी

पोप लियो 16वें ने दासता को वैध ठहराने में ‘पवित्र आसन’ की भूमिका के लिए ऐतिहासिक माफी मांगी
Modified Date: May 25, 2026 / 05:37 pm IST
Published Date: May 25, 2026 5:37 pm IST

वेटिकन सिटी, 25 मई (एपी) पोप लियो 14वें ने सोमवार को दासता को वैधता प्रदान करने में स्वयं पवित्र आसन (होली सी) की भूमिका और सदियों तक इस चलन की निंदा न करने के लिए ऐतिहासिक रूप से माफी मांगी। उन्होंने वेटिकन के इतिहास को ‘ईसाई स्मृति में एक घाव’ बताया।

‘होली सी’ कैथोलिक चर्च की सर्वोच्च धार्मिक और प्रशासनिक संस्था है।

पूर्व के पोप भी अटलांटिक पार दास व्यापार में ईसाइयों की भागीदारी के लिए क्षमा याचना कर चुके हैं। लेकिन किसी भी पोप ने सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार नहीं किया कि पूर्व पोप ने स्वयं यूरोपीय शासकों को ‘गैर धर्म’ के लोगों को अधीन करने और गुलाम बनाने का स्पष्ट अधिकार देने में क्या भूमिका निभाई थी।

इतिहास में अमेरिकी मूल के पहले पोप, जिनके पारिवारिक इतिहास में गुलाम लोग और गुलामों के मालिक दोनों शामिल हैं, ने सोमवार को जारी अपने पहले एनसाइक्लोपीडिया, ‘मैग्निफिका ह्यूमैनिटास’ (शानदार मानवता) में यह क्षमा याचना की।

इस व्यापक घोषणापत्र का उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर बढ़ती निर्भरता के युग में मानवता की रक्षा करना है। लियो ने डिजिटल क्रांति द्वारा पोषित गुलामी और उपनिवेशवाद के नए रूपों, जैसे कि एआई चिप्स के लिए आवश्यक दुर्लभ खनिजों की प्राप्ति के लिए आवश्यक अनियमित श्रम, के संदर्भ में अटलांटिक पार दास व्यापार का मुद्दा उठाया।

ऐसा करके, लियो ने अश्वेत अमेरिकी कैथोलिकों, कार्यकर्ताओं और विद्वानों द्वारा दशकों से की जा रही उन मांगों का जवाब दिया, जिनमें ‘होली सी’ से औपनिवेशिक काल में मानव व्यापार में उसकी खुद की भूमिका के लिए प्रायश्चित करने का आग्रह किया गया था।

पोप लियो 14वें ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के कड़े नियमन और इसके विकासकर्ताओं से लाभ के बजाय जनहित के लिए काम करने का आह्वान किया। उन्होंने एक व्यापक घोषणापत्र जारी किया जिसमें उन्होंने मानवता की सुरक्षा पर बल दिया। उन्होंने कहा कि काम से लेकर युद्ध तक हर क्षेत्र को तकनीकी प्रभावित कर रही है।

इतिहास में पहले अमेरिकी मूल के पोप द्वारा अपने चुनाव के कुछ दिनों बाद ही यह घोषणा कर दी थी कि वह कृत्रिम बुद्धिमत्ता को आज मानवता के सामने सबसे बड़ी चुनौती मानते हैं।

इसके बाद से ही ‘मैग्निफिका ह्यूमैनिटास’ की बेसब्री से प्रतीक्षा थी।

इसमें लियो ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता की होड़ को बढ़ावा देने वाली ‘सत्ता की संस्कृति’ की निंदा की, विशेष रूप से दूरस्थ युद्ध के अधिक परिष्कृत तरीकों के विकास के लिए। उन्होंने घोषणा की कि अपरिवर्तनीय और घातक निर्णय को कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियों के हवाले करने की ‘अनुमति’ नहीं दी जा सकती। इससे अमेरिकी पोप और ट्रंप प्रशासन के बीच एक और तनाव का बिंदु बन गया है, हालांकि अमेरिका ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास को विनियमित करने के लिए आक्रामक रूप से काम किया है।

एपी

संतोष माधव

माधव


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