क्वांटम, परमाणु, कृत्रिम मेधा भारत-अमेरिका सहयोग के अगले प्रमुख क्षेत्र : क्वात्रा
क्वांटम, परमाणु, कृत्रिम मेधा भारत-अमेरिका सहयोग के अगले प्रमुख क्षेत्र : क्वात्रा
(सागर कुलकर्णी)
वाशिंगटन, नौ मई (भाषा) अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कहा है कि क्वांटम प्रौद्योगिकियां, कृत्रिम मेधा (एआई) और परमाणु विज्ञान भारत तथा अमेरिका के बीच सहयोग के अगले प्रमुख क्षेत्र हैं।
क्वात्रा ने शुक्रवार को यहां ‘अमेरिका-भारत कृत्रिम मेधा (एआई) और उभरती प्रौद्योगिकी मंच’ के एक संवादात्मक सत्र में कहा कि दुनियाभर में असैन्य परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक विखंडन प्रौद्योगिकियों के अलावा परमाणु संलयन भी दोनों देशों के बीच सहयोग का एक क्षेत्र है।
भारत और अमेरिका, फ्रांस में कैडाराचे के निकट संलयन रिएक्टर बनाने के अंतरराष्ट्रीय परमाणु संलयन अनुसंधान प्रयोग का हिस्सा हैं। अंतरराष्ट्रीय ताप-नाभिकीय प्रायोगिक रिएक्टर (आईटीईआर) में यूरोपीय संघ और अमेरिका, रूस, भारत तथा चीन सहित आठ देश सदस्य हैं।
क्वात्रा ने ‘एआई प्लस एक्सपो’ के इतर अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी मंच (यूएसआईएसपीएफ), ‘ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन’ (ओआरएफ) अमेरिका और मोटवानी जडेजा फाउंडेशन द्वारा आयोजित मंच पर कहा, ‘‘मैं यहां परमाणु क्षेत्र को विशेष रूप से रेखांकित करूंगा क्योंकि परमाणु के कुछ क्षेत्र बेशक पुराने एवं स्थापित हैं, लेकिन कुछ क्षेत्र उभर रहे हैं, खासकर परमाणु संलयन।’’
भारतीय राजदूत ने छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों को भी साझा हित का ऐसा क्षेत्र बताया जिसमें दोनों देश सहयोग बढ़ा सकते हैं।
भारत द्वारा पिछले साल असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने के बाद अमेरिकी परमाणु कंपनियों का एक प्रतिनिधिमंडल इस महीने के अंत में भारत आने वाला है ताकि उन क्षेत्रों का पता लगाया जा सके जिनमें सहयोग बढ़ाया जा सकता है।
क्वात्रा ने कहा कि शांति अधिनियम परमाणु क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी की विशाल क्षमता को खोलता है।
उन्होंने कहा कि परमाणु संलयन एवं क्वांटम उन क्षेत्रों में शामिल हैं जिनमें सहयोग बढ़ाया जा सकता है।
भारतीय राजदूत ने जैव-औषधि को भी भारत-अमेरिका साझेदारी का एक बहुत महत्वपूर्ण एवं प्राथमिकता वाला क्षेत्र बताया।
भाषा
सिम्मी गोला
गोला

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