ग्रीनलैंड की रक्षा के लिए तैयार हैं: डेनमार्क की प्रधानमंत्री

ग्रीनलैंड की रक्षा के लिए तैयार हैं: डेनमार्क की प्रधानमंत्री

ग्रीनलैंड की रक्षा के लिए तैयार हैं: डेनमार्क की प्रधानमंत्री
Modified Date: July 8, 2026 / 01:09 pm IST
Published Date: July 8, 2026 1:09 pm IST

अंकारा, आठ जुलाई (एपी) डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस नयी मांग को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका को नाटो सहयोगी डेनमार्क के अधीन स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड का नियंत्रण अपने हाथ में ले लेना चाहिए।

फ्रेडरिकसन ने कहा कि ‘‘ग्रीनलैंड निश्चित रूप से बिक्री के लिए नहीं है।’’

तुर्किये में नाटो सदस्य देशों के नेताओं की बैठक से पहले फ्रेडरिक्सन ने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि सभी देश, हमारे सभी सहयोगी भी, ग्रीनलैंड की जनता के आत्मनिर्णय के अधिकार का सम्मान करेंगे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम संप्रभु राष्ट्र हैं और हम चाहते हैं कि सभी हमारी क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान करें।’’

ट्रंप ने बैठक की पूर्व संध्या पर एक बार फिर कहा कि ग्रीनलैंड पर अमेरिका का नियंत्रण होना चाहिए।

नाटो की स्थापना इस आधार पर हुई थी कि उसके 32 सदस्य देश एक-दूसरे की क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे, न कि एक-दूसरे के क्षेत्रों पर कब्जा करने की धमकी देंगे।

फ्रेडरिक्सन ने कहा कि यदि किसी प्रकार का हमला होता है तो डेनमार्क ‘‘नाटो के एक एक इंच क्षेत्र, जिसमें हमारा अपना क्षेत्र भी शामिल है, की रक्षा के लिए तैयार है।’’ उन्होंने भरोसा जताया कि नाटो सहयोगी आपसी रक्षा संबंधी अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करेंगे।

आइसलैंड की प्रधानमंत्री क्रिस्ट्रून फ्रॉस्टाडोटिर ने कहा कि ग्रीनलैंड ‘‘ग्रीनलैंड की जनता का है’’ और बाहरी खतरों के मद्देनजर नाटो सहयोगियों से एकजुट रहने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा, ‘‘हम गठबंधन के बाहर से आने वाले खतरों का सामना कर रहे हैं। नाटो सहयोगियों के लिए रूस सबसे बड़ा खतरा है। हमें अपने ऊपर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हम एकजुट रहें।’’

इस बीच नाटो महासचिव मार्क रूटे ने अंकारा में बुधवार को कहा कि उन्हें विश्वास है कि अमेरिका नाटो के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने ईरान पर अमेरिका द्वारा किए गए ताजा सैन्य हमलों का समर्थन भी किया।

रूटे ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि यह पूरी तरह आवश्यक था, क्योंकि जब युद्धविराम लागू हो और ईरान उसका उल्लंघन कर रहा हो, जैसा कि हमने कल देखा, तब अमेरिका की कड़ी प्रतिक्रिया जरूरी थी।’’

उन्होंने यह टिप्पणी ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन वाणिज्यिक जहाजों पर हमला किए जाने के बाद अमेरिका की ओर से किए गए हमलों के संदर्भ में की।

रूटे ने कहा, ‘‘अमेरिका की मजबूत प्रतिक्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण है।’’

एपी मनीषा नरेश

नरेश


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