रिपब्लिकन ईरान शांति समझौते की आलोचना कर रहे; हारने वालों की नहीं सुनें: ट्रंप

रिपब्लिकन ईरान शांति समझौते की आलोचना कर रहे; हारने वालों की नहीं सुनें: ट्रंप

रिपब्लिकन ईरान शांति समझौते की आलोचना कर रहे; हारने वालों की नहीं सुनें: ट्रंप
Modified Date: May 25, 2026 / 09:45 am IST
Published Date: May 25, 2026 9:45 am IST

(सागर कुलकर्णी)

वाशिंगटन, 25 मई (भाषा) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ किए गए शांति समझौते का उनके ही साथी रिपब्लिकनों ने कड़ा विरोध किया है और इस कदम पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह ईरान को एक ‘‘प्रमुख शक्ति’’ के रूप में मान्यता देने के बराबर होगा तथा इसके लिए ‘‘राजनयिक समाधान’’ की आवश्यकता है।

समझौते को लेकर संशय जताने वाले रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों में सीनेट सशस्त्र सेवा समिति के अध्यक्ष सीनेटर रोजर विकर, सीनेटर थॉम टिलिस, लिंडसे ग्राहम और टेड क्रूज़ शामिल हैं। इन सभी ने लगभग तीन महीने से जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए हुए शांति समझौते के प्रति ईरान की प्रतिबद्धताओं को लेकर भरोसा करने पर सवाल उठाए हैं।

आश्चर्यजनक रूप से ट्रंप के आलोचक रहे सीनेटर रैंड पॉल ने राष्ट्रपति के आलोचकों को धैर्य रखने की सलाह दी और उनसे राष्ट्रपति को अमेरिका प्रथम समाधान खोजने के लिए समय देने का आग्रह किया।

शांति समझौते के आलोचकों में डेमोक्रेट सीनेटर भी शामिल हो गए और दावा किया कि राष्ट्रपति को ‘‘मूर्ख बनाया जा रहा है’’ और समझौते का उभरता हुआ प्रारूप केवल ‘‘युद्ध-पूर्व यथास्थिति’’ में लौटने के बराबर होगा।

ट्रंप ने आलोचकों को करारा जवाब देते हुए उन्हें हारे हुए लोग बताया जो ऐसे मुद्दे पर टिप्पणी कर रहे हैं जिसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि विचाराधीन समझौता 2015 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा के नेतृत्व में हुए समझौते के बिल्कुल विपरीत है।

रविवार को ‘ट्रूथ सोशल’ पर एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा, ‘‘अगर मैं ईरान के साथ कोई समझौता करता हूं, तो वह बेहतर और उचित होगा। ओबामा के समझौते जैसा नहीं, जिससे ईरान को भारी मात्रा में नकद राशि प्राप्त होने का मार्ग प्रशस्त हुआ और परमाणु हथियार बनाने का रास्ता खोल दिया।’’

ट्रंप ने कहा, ‘‘हमारा समझौता बिल्कुल इसके विपरीत है, लेकिन इसे किसी ने देखा नहीं है और न ही कोई जानता है कि यह क्या है। इस पर अभी पूरी बातचीत भी नहीं हुई है। इसलिए उन हारे हुए लोगों की बात मत सुनो, जो ऐसी चीज की आलोचना कर रहे हैं जिसके बारे में उन्हें कुछ पता ही नहीं है।”

भाषा सुरभि रंजन

रंजन


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