Maternity Leave News: महिला कर्मचारियों को मिली बड़ी राहत, अब गर्भपात के बाद दोबारा प्रेग्नेंसी पर भी मिलेगा पूरा अवकाश, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
Maternity Leave News: महिला कर्मचारियों को मिली बड़ी राहत, अब गर्भपात के बाद दोबारा प्रेग्नेंसी पर भी मिलेगा पूरा अवकाश, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
Maternity Leave News | Photo Credit: AI
- गर्भपात के बाद भी मातृत्व अवकाश का अधिकार
- वेतन से की गई 80,254 रुपये की कटौती रद्द
- मेडिकल बिलों के भुगतान का आदेश
बिलासपुर: Maternity Leave News कामकाजी महिलाओं के मातृत्व अधिकारों को लेकर हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने कहा कि यदि किसी महिला कर्मचारी का गर्भपात हो जाता है, और वह उसके बाद दोबारा गर्भवती होती है, तो पिछला अवकाश उसके नए मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) के रास्ते में बाधा नहीं बनेगा। (High Court Maternity Leave Decision) महिला अपने दूसरे गर्भधारण के लिए कानूनन पूरी मातृत्व छुट्टी पाने की हकदार है। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने महिला के वेतन से काटे गए 80254 रुपए की रिकवरी को रद्द कर दिया है। मामले में जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने यह फैसला सुनाया।
Maternity Leave News बता दें, कि भारतीय खाद्य निगम रायपुर में असिस्टेंट ग्रेड-2 के पद पर पदस्थ महिला कर्मचारी वर्ष 2019 में गर्भवती हुई थीं। उनके जुड़वां बच्चे होने थे, लेकिन गंभीर चिकित्सीय जटिलताओं के चलते 25 अप्रैल 2019 को अस्पताल में उनका एक भ्रूण मिसकैरेज हो गया। डॉक्टरों की निगरानी और बेड रेस्ट के बाद उन्होंने 3 सितंबर 2019 को एक प्री-मैच्योर बेटी को जन्म दिया। इसके बाद उन्होंने मातृत्व अवकाश और नियमों के अनुसार मेडिकल बिलों के भुगतान के लिए आवेदन किया।
विभाग ने उन्हें केवल 68 दिनों का असाधारण अवकाश बिना वेतन के मंजूर किया, और लीव बैलेंस नहीं होने का हवाला देकर उनके वेतन से 80254 रुपए की कटौती भी कर ली गई। इस पर महिला ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता मातृत्व अवकाश और गर्भपात के नियमों के तहत कुल 90 दिनों की छुट्टी की हकदार है, जिसे विभाग कम नहीं कर सकता। कोर्ट ने लीव बैलेंस न होने के नाम पर महिला के वेतन से काटे गए 80254 की रिकवरी को निरस्त कर दिया और रकम वापस करने के आदेश दिए।
इसके अलावा महिला कर्मचारी के बाकी बचे 3 लाख 76 हजार 773 रुपए के मेडिकल बिलों के भुगतान पर निर्देश दिया है कि वे सभी दस्तावेजों की दोबारा से जांच कर तय उचित आदेश जारी करें। हाई कोर्ट ने मैटरनिटी बेनीफिट एक्ट, 1961 का हवाला देते हुए कहा कि मातृत्व अवकाश का अधिकार एक महिला का वैधानिक और संवैधानिक अधिकार है, यह उसके सम्मान, स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़ा है।
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