यूरोप में हथियारों की कमी यूक्रेन के सहयोगियों की बढ़ा सकती हैं मुश्किलें

यूरोप में हथियारों की कमी यूक्रेन के सहयोगियों की बढ़ा सकती हैं मुश्किलें

यूरोप में हथियारों की कमी यूक्रेन के सहयोगियों की बढ़ा सकती हैं मुश्किलें
Modified Date: November 29, 2022 / 08:18 pm IST
Published Date: October 22, 2022 8:46 pm IST

वाशिंगटन, 22 अक्टूबर (एपी) पूरे यूरोप में हथियारों की कमी यूक्रेन के सहयोगियों के लिए समस्या पैदा कर सकती है क्योंकि वे रूस द्वारा निशाना बनाए जाने के खतरे को ध्यान में रखते हुए यूक्रेन के प्रति अपने सहयोग को संतुलित कर रहे हैं।

पिछले कई महीनों से अमेरिका और उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के सदस्य देशों ने अरबों डॉलर मूल्य के हथियार और सैन्य उपकरण यूक्रेन में भेजे हैं, ताकि उसे रूस का मुकाबला करने में मदद मिल सके।

हालांकि, नाटो के कई छोटे देशों और यहां तक कि कुछ बड़े देशों के लिए युद्ध ने पहले से ही कम हथियारों के जखीरे को और घटा दिया है। कुछ सहयोगियों ने अपन सारे सोवियतकालीन रिजर्व हथियार यूक्रेन भेज दिये हैं और अब अमेरिका से उसकी पूर्ति होने की उम्मीद कर रहे हैं।

कुछ यूरोपीय देशों के लिए फिर से आपूर्ति बहाल करना मुश्किल हो सकता है क्योंकि उनके पास हथियार निर्माण के लिए मजबूत रक्षा क्षेत्र नहीं है। उनमें से कई देश अमेरिकी रक्षा उद्योग पर निर्भर हैं।

अब वे दुविधा का सामना कर रहे हैं: क्या वे यूक्रेन को हथियार भेजना जारी रखेंगे। यह एक कठिन सवाल है।

यूरोपीय अधिकारियों ने एपी को दिये साक्षात्कारों में कहा है कि यूक्रेन में रूस को जीत नहीं मिलनी चाहिए और इसलिए यूक्रेन को उनका सहयोग जारी रहेगा। लेकिन उन्होंने जोर देते हुए कहा कि उनकी घरेलू रक्षा पर इसका भार बढ़ रहा है।

वाशिंगटन स्थित स्टिमसन सेंटर शोध समूह ने अनुमान लगाया है कि यूक्रेन संकट ने जेवलिन टैंक रोधी हथियारों का भंडार अमेरिका में एक-तिहाई घटा दिया है। इसने आयुध आपूर्ति को भी दबाव में डाल दिया है क्योंकि अमेरिका निर्मित एम777 होवित्जर का अब उत्पादन नहीं हो रहा।

एपी

सुभाष पवनेश

पवनेश


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