नेहरू-गांधी परिवार में आने से लेकर जीवन की कई स्मृतियों को किताब में साझा करेंगी सोनिया गांधी

नेहरू-गांधी परिवार में आने से लेकर जीवन की कई स्मृतियों को किताब में साझा करेंगी सोनिया गांधी

नेहरू-गांधी परिवार में आने से लेकर जीवन की कई स्मृतियों को किताब में साझा करेंगी सोनिया गांधी
Modified Date: August 18, 2026 / 07:32 pm IST
Published Date: August 18, 2026 7:32 pm IST

न्यूयॉर्क, 18 अगस्त (एपी) इस साल कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की यादों पर आधारित एक किताब आ रही है जिसमें वह भारत के नेहरू-गांधी राजनीतिक परिवार का हिस्सा बनने से जुड़ी उम्मीदों और त्रासदियों के साथ-साथ सरकार में अपने कामकाज पर भी बात करेंगी।

अल्फ्रेड ए. नॉफ ने मंगलवार को घोषणा की कि सोनिया गांधी की किताब ‘बिलांगिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ 10 नवंबर को प्रकाशित होगी।

नॉफ के माध्यम से जारी एक बयान में सोनिया गांधी ने कहा, ‘‘मेरे परिवार के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है, लेकिन बहुत कम ही ऐसी बातें सामने आईं जो उनके इरादों, उनके कामों और उनकी मानवीय कमियों की सच्चाई तक पहुंच पाईं। कई मायनों में, यह किताब उनके मानवीय पक्ष को सम्मान देने वाली है। मेरी कहानी पाठकों को उन सामाजिक और राजनीतिक बदलावों का एक अनोखा नजरिया भी देती है, जिन्हें मैंने अपने इस प्यारे देश में छह दशकों तक देखा है।’’

सोनिया (79) मूल रूप से इटली की रहने वाली हैं। वह इंग्लैंड के कैम्ब्रिज में पढ़ाई कर रही थीं, तभी उनकी मुलाकात अपने राजीव गांधी से हुई थी। राजीव गांधी भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नाती और भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे थे।

इस किताब में वह लिखती हैं कि कैसे 1984 में उनकी सास की हत्या के बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया। उनकी जगह राजीव गांधी ने ली, जिनकी सात साल बाद हत्या कर दी गई। बाद में वह खुद भी राजनीति में आईं और कांग्रेस पार्टी की सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष रहीं। हालांकि उन्होंने प्रधानमंत्री बनने के पार्टी के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। 2014 में उनकी पार्टी सत्ता से बाहर हो गई और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की सरकार केंद्र में बनी।

सोनिया ने अपने बयान में कहा, ‘‘दिल टूटने और नुकसान के अहसास ने ही मुझे राजनीति की सार्वजनिक दुनिया में धकेल दिया। उससे पहले तक मैंने अपनी निजता को बहुत संभालकर रखा था।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अपने जीवन के बारे में लिखना मेरे लिए आसान नहीं था। इसका मतलब था खुद को खोलना, उन पलों और अनुभवों को साझा करना जिन्हें मैंने हमेशा अपने मन में गहराई से छिपाकर रखा था।’’

एपी वैभव पवनेश

पवनेश


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