श्रीलंका सरकार ने न्यायाधीशों की सेवानिवृति की उम्र बढ़ाने के लिए संविधान संशोधन विधेयक पेश किया

श्रीलंका सरकार ने न्यायाधीशों की सेवानिवृति की उम्र बढ़ाने के लिए संविधान संशोधन विधेयक पेश किया

श्रीलंका सरकार ने न्यायाधीशों की सेवानिवृति की उम्र बढ़ाने के लिए संविधान संशोधन विधेयक पेश किया
Modified Date: August 18, 2026 / 06:29 pm IST
Published Date: August 18, 2026 6:29 pm IST

कोलंबो, 18 अगस्त (भाषा) श्रीलंका सरकार ने विभिन्न राजनीतिक दलों एवं बार एसोसिएशन के विरोध के बावजूद न्यायाधीशों की सेवानिवृति की उम्र बढ़ाने के लिए मंगलवार को एक संविधान संशोधन विधेयक पेश किया।

न्याय और राष्ट्रीय एकता मंत्री हर्षना नानायक्कारा ने संविधान संशोधन विधेयक (22वां संशोधन) पेश किया, जिसका मकसद उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृति की उम्र 65 से बढ़ाकर 67 और अपीलीय अदालतों के न्यायाधीशों की अवकाशप्राप्ति की उम्र 63 से बढ़ाकर 65 करना है।

मंत्री ने न्यायिक व्यवस्था (संशोधन) विधेयक भी पेश किया, जिसमें अन्य अदालतों में न्यायाधीशों की सेवानिवृति की उम्र बढ़ाने से जुड़े संशोधन शामिल हैं।

सरकार ने तर्क दिया कि 11 लाख से ज़्यादा लंबित मामलों को निपटाने के लिए न्यायाधीशों का कार्यकाल बढ़ाना ज़रूरी है।

ये विधेयक श्रीलंका बार एसोसिएशन, ‘ज्यूडिशियल सर्विस एसोसिएशन’ के सदस्यों और ‘कॉमनवेल्थ लॉयर्स एसोसिएशन’ के विरोध के बावजूद पेश किए गए।

विपक्षी दलों और बौद्ध धर्मगुरुओं ने भी इन विधेयकों का विरोध किया है।

विपक्ष का कहना है कि ये विधेयक ‘देश की न्यायपालिका की आज़ादी पर सीधा हमला’ हैं।

उनका कहना है कि इस कदम से कार्यकारी राष्ट्रपति को न्यायपालिका के कामकाज में हेर-फेर करने की ताकत मिल जाएगी।

विपक्ष के पास मंगलवार से दो हफ़्ते का समय है कि वह इस संशोधन के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपनी आपत्तियां दर्ज कराए।

भाषा

राजकुमार अविनाश

अविनाश


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