द. कोरिया : पूर्व राष्ट्रपति येओल उम्रकैद की सुजा सुनाए जाने के बाद भी अपने रुख पर अडिग
द. कोरिया : पूर्व राष्ट्रपति येओल उम्रकैद की सुजा सुनाए जाने के बाद भी अपने रुख पर अडिग
सियोल, 20 फरवरी (एपी) दक्षिण कोरिया के अपदस्थ राष्ट्रपति यून सुक येओल ने सियोल की एक अदालत द्वारा विद्रोह के लिए सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा पर शुक्रवार को प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह अपने रुख पर अडिग हैं।
येओल के वकीलों द्वारा जारी बयान के मुताबिक उनके मुवक्किल ने कहा कि दिसंबर 2024 में सैन्य कानून (मार्शल लॉ) लागू करने की उनकी अचानक और अल्पकालिक घोषणा ‘‘पूरी तरह से राष्ट्र और हमारे लोगों के हित में’’ थी। येओल ने सियोल केंद्रीय जिला न्यायालय को पक्षपाती बताया।
येओल को सत्ता पर कब्जा करने के उनके असफल प्रयास के मद्देनजर पैदा हुए राजनीतिक संकट के बीच पद से हटा दिया गया था। अभियोजकों ने तख्तापलट के प्रयास और अन्य आरोपों सहित आठ आपराधिक मामलों को भी सिरे से खारिज कर दिया है।
उन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए हफ्तों तक खुद को राष्ट्रपति आवास में बंद रखा, गिरफ्तारी के बाद जांचकर्ताओं के साथ सहयोग नहीं किया और अदालती तारीखों पर पेश नहीं हुए, साथ ही जब वे पेश हुए तो गवाहों के साथ झड़प की।
दक्षिण कोरिया की अदालत ने बृहस्पतिवार को पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को दिसंबर 2024 में ‘मार्शल लॉ’ लागू करने का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
न्यायाधीश जी कुई-यून ने कहा कि उन्होंने येओल को ‘नेशनल असेंबली’ (संसद) पर अवैध रूप से कब्जा करने के प्रयास के तहत सेना और पुलिस बल को जुटाने, नेताओं को गिरफ्तार करने और ‘‘कुछ समय’’ तक निरंकुश शासन स्थापित करने का दोषी करार दिया। नेशनल असेंबली में विपक्षी उदारवादी सांसदों का बहुमत है।
येओल ने अपने बयान में फैसले को अवैध करार दिया।
पिछली जुलाई से जेल में बंद 65 वर्षीय पूर्व राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘ऐसी स्थिति में जहां न्यायपालिका की स्वतंत्रता की गारंटी नहीं दी जा सकती और कानून एवं विवेक पर आधारित फैसले की उम्मीद करना मुश्किल है, मुझे इस बात पर गहरा संदेह है कि अपील के माध्यम से कानूनी लड़ाई जारी रखना सार्थक होगा या नहीं।’’
एपी
धीरज पवनेश
पवनेश

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