श्रीलंकाई नौसेना ने दूसरे जहाज पर सवार 204 ईरानी कर्मियों को ‘सुरक्षित’ कोलंबो पहुंचाया
श्रीलंकाई नौसेना ने दूसरे जहाज पर सवार 204 ईरानी कर्मियों को ‘सुरक्षित’ कोलंबो पहुंचाया
कोलंबो, छह मार्च (भाषा) श्रीलंका नौसेना ने शुक्रवार को कहा कि ‘आईआरआईएनएस बुशहर’ जहाज पर सवार 208 ईरानी कर्मियों में से 204 को कोलंबो बंदरगाह पर ‘‘सुरक्षित रूप से’’ स्थानांतरित कर दिया गया है। यह घटना श्रीलंका के पास एक अन्य ईरानी नौसैनिक पोत (फ्रिगेट) के डूबने के दो दिन बाद हुई है।
नौसेना ने बताया कि चार नौसैनिक अब भी जहाज पर ही हैं। इस जहाज के एक इंजन में खराबी आ गयी थी।
नौसेना ने कहा कि जहाज को राजधानी कोलंबो के बाहर स्थित अपने वर्तमान स्थान से पूर्वी बंदरगाह त्रिंकोमाली तक पहुंचने में कम से कम दो दिन और लगेंगे।
नौसेना के प्रवक्ता कमांडर बुद्धिका संपथ ने बताया कि ईरानी नौसैनिकों को कोलंबो के उत्तरी उपनगर वेलिसारा स्थित नौसेना शिविर में ले जाया जाएगा।
संपथ ने कहा, ‘‘पंजीकरण की औपचारिकता के तौर पर उनकी चिकित्सा जांच की जाएगी।’’
बृहस्पतिवार को टेलीविजन पर प्रसारित अपने संबोधन में श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने कहा था कि जहाज, ‘आईआरआईएनएस बुशहर’ ने इंजन की खराबी का हवाला देते हुए श्रीलंकाई जलक्षेत्र में प्रवेश करने की अनुमति मांगी थी।
उन्होंने कहा, ‘‘मानवीय सहायता करते समय हम तटस्थ रहना चाहते थे।’’
राष्ट्रपति ने कहा कि श्रीलंका की भूमिका संघर्ष में शामिल एक पक्ष के अनुरोध पर प्रतिक्रिया देने तक ही सीमित थी।
राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘हर जीवन अनमोल है।’’
उन्होंने विपक्षी दलों द्वारा स्थिति का राजनीतिकरण करने के प्रयासों की भी आलोचना की।
दिसानायके ने कहा, ‘‘हम दबाव के आगे नहीं झुकेंगे। हम अपनी तटस्थता बनाए रखेंगे।’’
राष्ट्रपति के अनुसार, जहाज पर 208 कर्मी सवार थे, जिनमें 53 अधिकारी, 84 कैडेट, 48 वरिष्ठ नाविक और 23 नाविक शामिल थे।
दिसानायके ने कहा कि 26 फरवरी को ईरान ने नौ से 13 मार्च के बीच चार दिनों के लिए कोलंबो बंदरगाह में प्रवेश की अनुमति मांगी थी, जिसे उसने ‘‘सद्भावना यात्रा’’ बताया था।
उन्होंने कहा, ‘‘सद्भावना यात्रा के लिए यह सही तरीका नहीं था। हम स्थिति का अध्ययन कर रहे थे। 27 फरवरी को हमें बताया गया कि एक नाविक फिसलकर गिर गया है और उसे किनारे लाने के लिए मदद की जरूरत है।’’
उन्होंने बताया कि ‘आईआरआईएस देना’, जो अमेरिकी हमले में निशाना बना पहला ईरानी जहाज था, पर हमले के बाद दूसरे ईरानी जहाज ने चार और पांच मार्च को कोलंबो बंदरगाह पर रुकने की अनुमति मांगी।
इस बीच, गाले के अस्पताल अधिकारियों ने बताया कि करापीटिया अस्पताल के शवगृह की क्षमता अमेरिकी हमले में मारे गए 90 से अधिक ईरानी नाविकों के शव रखने के लिए पर्याप्त नहीं है।
सरकारी निर्णय आने तक शवों को अस्थायी रूप से बुरादे और बर्फ में लपेटकर रखा जा रहा है।
श्रीलंका ने बुधवार को कहा था कि उसने अमेरिकी पनडुब्बी के हमले में गाले के पास समुद्र में डूबे ईरानी युद्धपोत ‘आईआरआईएस देना’ से 84 ईरानी नाविकों के शव बरामद किए हैं।
यह जहाज भारत के विशाखापत्तनम से नौसैनिक बेड़े की समीक्षा अभ्यास में हिस्सा लेने के बाद अपने देश लौट रहा था।
अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी से ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर संयुक्त हमला शुरू किया है। ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद यह संघर्ष लगभग पूरे खाड़ी क्षेत्र तक फैल गया है।
भाषा गोला वैभव
वैभव

Facebook


