एच-1बी वीजा आवेदनों की कड़ी निगरानी का स्वागत है लेकिन अमेरिकी नवोन्मेष की कीमत पर नहीं: एफआईआईडीएस

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एच-1बी वीजा आवेदनों की कड़ी निगरानी का स्वागत है लेकिन अमेरिकी नवोन्मेष की कीमत पर नहीं: एफआईआईडीएस

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  • Publish Date - September 19, 2026 / 03:22 PM IST,
    Updated On - September 19, 2026 / 03:22 PM IST

(सागर कुलकर्णी)

वाशिंगटन, 19 सितंबर (भाषा) ‘फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज’ (एफआईआईडीएस) ने एच-1बी वीजा आवेदनों की कड़ी जांच किए जाने का स्वागत किया है लेकिन साथ ही आगाह किया है कि ऐसा अमेरिकी नवोन्मेष की कीमत पर नहीं होना चाहिए क्योंकि अत्यधिक विशिष्ट कौशल की जरूरत वाली नौकरियों के लिए घरेलू श्रम बाजार में योग्य कर्मचारी हमेशा तत्काल उपलब्ध नहीं होते।

एफआईआईडीएस का यह बयान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एच-1बी वीजा कार्यक्रम की निगरानी कड़ी किए जाने के कुछ घंटे बाद आया।

ट्रंप का कहना है कि सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) आउटसोर्सिंग कंपनियों समेत कुछ नियोक्ताओं ने इस कार्यक्रम का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया है।

एफआईआईडीएस में नीति एवं रणनीति प्रमुख खंडेराव कांड ने शुक्रवार को एक बयान में कहा, ‘‘एफआईआईडीएस अमेरिका के राष्ट्रीय एवं आर्थिक हितों की रक्षा करने, अमेरिकी कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा करने और एच-1बी कार्यक्रम के दुरुपयोग से निपटने के प्रशासन के इरादे की सराहना करता है और उसे समझता है। ये उचित उद्देश्य हैं।’’

उन्होंने कहा कि लेकिन असाधारण प्रतिभाओं को आकर्षित करने की अमेरिका की क्षमता ने उसे नवोन्मेष के क्षेत्र में दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनाया है।

कांड ने कहा, ‘‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), साइबर सुरक्षा, उन्नत सेमीकंडक्टर, क्लाउड अवसंरचना और विशिष्ट डेटा इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में नियोक्ताओं को वास्तविक एवं अत्यंत विशिष्ट कौशल की कमी का सामना करना पड़ सकता है और घरेलू श्रम बाजार में उपलब्ध कर्मचारियों से इस कमी को तत्काल पूरा नहीं किया जा सकता।’’

उन्होंने कहा कि अमेरिका तभी सबसे मजबूत होगा जब वह कर्मचारियों को शोषण और भेदभाव से बचाएगा, कानून का पालन करने वाले नियोक्ताओं को प्रोत्साहित करेगा, अमेरिकी प्रतिभाओं में गंभीरता से निवेश करेगा और साथ ही ऐसे लोगों को आकर्षित करने में सक्षम रहेगा जिनके विचार, जिनका उद्यम और विशेषज्ञता अमेरिका में अगली पीढ़ी के रोजगार पैदा करती हैं।

कांड ने कहा, ‘‘इसका समाधान अमेरिकी कर्मचारियों और अत्यधिक कुशल प्रवासियों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करना नहीं है। समाधान एक पारदर्शी, लागू करने योग्य और योग्यता आधारित व्यवस्था है जिसमें धोखाधड़ी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, नियम तोड़ने वालों के लिए ठोस दंड, वेतन और भर्ती संबंधी मजबूत सुरक्षा उपाय, घरेलू शिक्षा, प्रशिक्षण एवं नए कौशल के विकास में पर्याप्त निवेश तथा जरूरत साबित करने वाले नियोक्ताओं को वैश्विक प्रतिभाओं की भर्ती के लिए वैध एवं स्पष्ट व्यवस्था मुहैया कराना शामिल हो।’’

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एच-1बी वीजा के जरिये विदेशी कर्मचारियों को अमेरिका लाने वाले नियोक्ताओं पर लगाए गए एक लाख अमेरिकी डॉलर के शुल्क को एक साल के लिए बढ़ा दिया है। अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ ने यह जानकारी दी।

ट्रंप ने शुक्रवार को घोषणा की कि 2025 में एक लाख अमेरिकी डॉलर का शुल्क लगाने के फैसले के बाद बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों द्वारा एच-1बी वीजा के लिए पंजीकरण में 92 प्रतिशत की कमी आई है।

अमेरिका के एच-1बी वीजा कार्यक्रम का लाभ पाने वालों में भारतीय सबसे बड़ा समूह हैं।

भाषा सिम्मी रंजन

रंजन