अफगान सीमा बंद करने के बाद से पाक में आतंकी हमले कम हुए

अफगान सीमा बंद करने के बाद से पाक में आतंकी हमले कम हुए

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  • Publish Date - January 1, 2026 / 04:16 PM IST,
    Updated On - January 1, 2026 / 04:16 PM IST

इस्लामाबाद, एक जनवरी (भाषा) पाकिस्तान में अफगानिस्तान से लगती सरहद बंद करने के बाद सीमा पार आतंकवादी हमलों और हिंसा से संबंधित मौतों में काफी कमी आई है, लेकिन वर्ष 2025 एक दशक में ‘सबसे हिंसक’ साल था। एक थिंक टैंक ने यह जानकारी दी।

अफगानिस्तान के साथ झड़पों के बाद पाकिस्तान ने पिछले साल 11 अक्टूबर को अपनी सीमा बंद कर दी थी। इसका कारण यह आरोप था कि अफगानिस्तान आतंकवादियों द्वारा अपनी धरती के इस्तेमाल को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहा है।

‘डॉन’ अखबार ने थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्योरिटी स्टडीज’ (सीआरएसएस) द्वारा एकत्रित आंकड़ों के आधार पर बताया कि दिसंबर में आतंकवादी हमलों में लगभग 17 प्रतिशत की कमी आई, जबकि नवंबर में इसमें नौ फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी।

इसने कहा है कि 2025 की आखिरी तिमाही में असैन्य नागरिकों और सुरक्षा अधिकारियों में आतंकवाद से जुड़ी मौतों में भी गिरावट आई है। यह नवंबर में चार फीसदी और दिसंबर में 19 प्रतिशत कम हुई।

हालांकि, सीआरएसएस के आंकड़ों से पता चला है कि समग्र हिंसा में लगभग 34 फीसदी का इजाफा हुआ है और वर्ष 2025 पाकिस्तान के लिए एक दशक में सबसे हिंसक साल साबित हुआ।

साल 2024 और 2025 के तुलनात्मक आंकड़ों से पता चलता है कि देशभर में दहशतगर्द और आतंकवाद विरोधी गतिविधियों से जुड़ी हिंसा में तीव्र वृद्धि हुई है। जहां 2024 में 2,555 लोगों की मौत हुई थी, वहीं 2025 में यह तादाद बढ़कर 3417 हो गई। इसमें 862 मौतों की बढ़ोतरी हुई।

यह हिंसा मुख्य रूप से खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांतों में ही केंद्रित रही। 2025 में दर्ज की गई कुल मौतों में 96 प्रतिशत से ज्यादा और हिंसक घटनाओं में करीब 93 फीसदी इन्हीं दोनों सूबों में हुईं।

इसके विपरीत, पंजाब और सिंध में हिंसा का स्तर अपेक्षाकृत कम रहा। पंजाब में 25 घटनाओं में 40 लोगों की मौत हुई जबकि सिंध में 51 घटनाओं में 56 लोगों की जान गई।

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) और इस्लामाबाद राजधानी क्षेत्र में भले ही हिंसक घटनाओं की संख्या कम रही हो, लेकिन इन में जख्मी होने वाले लोगों की संख्या अपेक्षाकृत रूप से ज्यादा है। पीओके में 103 लोग घायल हुए हैं जबकि राजधानी क्षेत्र में 38 लोग जख्मी हुए। दोनों ही स्थानों पर सिर्फ पांच-पांच घटनाएं हुईं।

गिलगित-बाल्तिस्तान सबसे कम प्रभावित क्षेत्र रहा। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल की तुलना में इस क्षेत्र में मौतों की संख्या भले ही कुल मिलाकर कम हो, लेकिन यह एक से बढ़कर चार हो गई, यानी चार गुना इज़ाफा हुआ।

भाषा नोमान नरेश

नरेश