चीन की संसद का वार्षिक सत्र कई कानूनों को अनुमोदित करने के साथ संपन्न
चीन की संसद का वार्षिक सत्र कई कानूनों को अनुमोदित करने के साथ संपन्न
(के जे एम वर्मा)
बीजिंग, 12 मार्च (भाषा) चीन की संसद का बहुचर्चित वार्षिक सत्र कई कानूनों को मंजूरी देने के साथ बृहस्पतिवार को समाप्त हो गया। इन कानूनों में देश की अर्थव्यवस्था में मंदी पर काबू पाने के लिए नई पंचवर्षीय योजना, रक्षा बजट में वृद्धि और विवादास्पद जातीय कानून शामिल हैं।
विवादास्पद जातीय कानून सभी जातीय अल्पसंख्यकों के लिए मंदारिन भाषा को अनिवार्य बनाता है।
नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (एनपीसी) का वार्षिक सत्र दो सप्ताह से भी कम समय में संपन्न हुआ। एनपीसी को अक्सर रबर-स्टैंप संसद कहा जाता है क्योंकि वह सत्तारूढ़ चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) द्वारा अनुमोदित कानूनों पर नियमित रूप से बस मुहर लगाती है।
एनपीसी और शीर्ष सलाहकार निकाय – चीनी पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस (सीपीपीसीसी) का वार्षिक सत्र मार्च के पहले हफ्ते में शुरू हुआ था जिसमें 5,000 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
अमेरिका-ईरान युद्ध और चीनी राष्ट्रपति शी चिनपिंग द्वारा किए गए व्यापक सैन्य बदलावों के कारण व्याप्त उथल-पुथल के बीच आयोजित इन दोनों सत्रों ने वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित किया।
शी जिनपिंग (72) ने दोनों सदनों के सत्र में भाग लिया।
इससे पहले, दोनों सत्रों में भाग लेने वाले 240 से अधिक प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए, शी चिनपिंग ने सैन्य अधिकारियों से राजनीतिक निष्ठा बढ़ाने का खुला आह्वान किया, जिसका अर्थ है पार्टी के नेतृत्व का अनुसरण करना।
शी चिनपिंग पीएलए और सीपीसी की समग्र उच्च कमान, केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) के प्रमुख भी हैं।
जनवरी में पीएलए के सर्वोच्च रैंक वाले जनरल झांग यूक्सिया समेत दो वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को उनके पद से हटाए जाने के बाद शी की यह पहली बैठक है। दोनों सैन्य अधिकारियों को उनके पद से हटाये जाने को हाल के इतिहास में पीएलए में बड़ा बदलाव माना गया, जो निचले स्तर के सैनिकों के लिए झटके जैसा था।
महत्वपूर्ण बात यह है कि छह सदस्यीय सीएमसी के अंतिम बचे जनरल झांग शेंगमिन ने संसद के वर्तमान सत्र में अपने भाषण में सेना से शी चिनपिंग के आदेश का दृढ़तापूर्वक पालन करने का आह्वान किया।
एनपीसी का सत्र पांच मार्च को शुरू हुआ, जिसमें शी चिनपिंग के करीबी सहयोगी प्रधानमंत्री ली कियांग ने अपनी सरकार की कार्य रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस रिपोर्ट में हाल के वर्षों में पहली बार चीन के जीडीपी लक्ष्य को इस वर्ष के लिए 4.5 से 5 प्रतिशत तक कम कर दिया गया है। यह कदम ट्रंप के टैरिफ युद्ध, अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद बिगड़ते वैश्विक संकट और संपत्ति बाजार में मंदी और बेरोजगारी संकट के कारण घरेलू अर्थव्यवस्था में उत्पन्न चुनौतियों के मद्देनजर उठाया गया है।
घरेलू आर्थिक चुनौतियां बढ़ने के बीच चीन पिछले तीन वर्षों से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के लिए पांच प्रतिशत का लक्ष्य लेकर चल रहा है।
अमेरिकी टैरिफ के बावजूद मजबूत निर्यात के दम पर चीन की अर्थव्यवस्था पिछले वर्ष पांच प्रतिशत बढ़कर 20लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई, जबकि घरेलू खपत, जो इसकी सबसे बड़ी कमजोरी रही है, सुस्त बनी रही।
बृहस्पतिवार को एनपीसी ने लगभग 278 अरब अमेरिकी डॉलर के रक्षा बजट को मंजूरी दे दी, जो पिछले वर्ष की तुलना में सात प्रतिशत अधिक है। यह चीन द्वारा अमेरिकी सेना के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए सशस्त्र बलों के तीव्र आधुनिकीकरण के प्रयासों का हिस्सा है।
चीन का सबसे बड़ा वार्षिक संसदीय सत्र, अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बीच आयोजित किया गया, जो एक दशक से अधिक समय से बीजिंग का करीबी सहयोगी रहा है।
जहां चीन को ईरान से सस्ते दामों पर सामान खरीदने का लाभ मिला, वहीं तेहरान ने अपनी अधिकांश सैन्य खरीद चीनी सेना से ही की।
ईरान पर हमले तेज होने और चीन समेत दुनियाभर में तेल आपूर्ति बाधित होने के साथ ही, अंतरराष्ट्रीय ध्यान बीजिंग की प्रतिक्रिया पर केंद्रित हो गया कि क्या वह द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी के तहत ईरान को खुला सैन्य समर्थन प्रदान करेगा जिसकी उसे (ईरान को ) उम्मीद है।
हालांकि, 31 मार्च से चार अप्रैल तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बीजिंग यात्रा की मेजबानी में जुटे चीन ने हमलों एवं ईरानी सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई की हत्या की कड़ी निंदा की, लेकिन संघर्ष से खुद को दूर रखा।
इससे पहले, जब अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला पर आक्रमण किया और बीजिंग के करीबी सहयोगी राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार किया, तब भी चीन ने कोई सैन्य कार्रवाई करने से इनकार कर दिया था।
पर्यवेक्षकों का कहना है कि ट्रंप की यात्रा से पहले चीन अमेरिका के साथ टकराव से बच रहा है क्योंकि उसे वाशिंगटन के साथ टैरिफ समझौते की उम्मीद है। साथ ही वह उचित समय पर अमेरिका के साथ ज्यादा टकराव के बिना ताइवान पर कब्जा करने का विकल्प भी खुला रखना चाहता है।
भाषा
राजकुमार नरेश पवनेश
पवनेश

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