गुजरात के महाराजा के साहस ने करुणा को सीमाओं से परे साबित किया : सिंह

गुजरात के महाराजा के साहस ने करुणा को सीमाओं से परे साबित किया : सिंह

गुजरात के महाराजा के साहस ने करुणा को सीमाओं से परे साबित किया : सिंह
Modified Date: April 14, 2026 / 07:25 pm IST
Published Date: April 14, 2026 7:25 pm IST

(हरेन्द्र मिश्रा)

यरूशलम, 14 अप्रैल (भाषा) यहूदी नरसंहार स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित एक समारोह में इजराइल में भारत के राजदूत जेपी सिंह ने कहा कि द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान हजारों असहाय छोटे बच्चों की जान बचाने के दौरान प्रदर्शित गुजरात के महाराजा जाम साहेब के साहस ने यह साबित किया कि करुणा सीमाओं से परे होती है।

सोमवार को इजराइली विदेश मंत्रालय द्वारा आयोजित समारोह में सिंह ने नवानगर (जिसे अब जामनगर कहा जाता है) के जाम साहेब के साहस की कहानी साझा की।

द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान महाराजा ने पोलैंड के लगभग एक हजार बच्चों को बचाया था, जिनमें कुछ यहूदी भी थे।

उन्होंने बच्चों को युद्ध की भयावहता से बचाते हुए पनाह दी और 1942 में “बालाचड़ी” में उनके लिए एक घर बनवाया।

सिंह ने कहा, “इतिहास के सबसे अंधकारमय दौर में भी, मानवता ने एक रास्ता खोज लिया।”

भारतीय दूत ने कहा, “द्वितीय विश्व युद्ध की भयावहताओं से सैकड़ों पोलिश और यहूदी बच्चों को बचाने के लिए अपने द्वार खोलकर, महाराजा ने यह साबित किया कि करुणा सीमाओं से परे होती है।”

इजराइल ने नरसंहार में मारे गए 60 लाख यहूदियों को श्रद्धांजलि देने के लिए सोमवार पूर्वाह्न 10 बजे दो मिनट का मौन रखा। इस दौरान पूरे देश में सायरन बजने लगे और सब कुछ ठहर सा गया।

जाम साहेब को एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि देते हुए पिछले वर्ष नवंबर में नेवातिम में उनकी प्रतिमा का अनावरण किया गया था।

भाषा जोहेब नरेश

नरेश


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