महिला कर्मियों को हटाने के विरोध में प्रदर्शन के बाद एफिल टावर एक दिन बंद रहा
महिला कर्मियों को हटाने के विरोध में प्रदर्शन के बाद एफिल टावर एक दिन बंद रहा
लंदन/नयी दिल्ली, आठ सितंबर (भाषा) एक हिंदू धार्मिक समूह के दौरे के लिए महिला कर्मचारियों को ‘‘हटाये जाने’’ के विरोध में कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने के बाद सोमवार को एफिल टावर एक दिन के लिए बंद रहा। यह जानकारी एफिल टावर के प्रबंधन एवं कर्मचारियों ने दी।
‘यूरोन्यूज’ ने सोमवार को बताया कि यह घटना शनिवार को हुई जब बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (बीएपीएस) से जुड़े करीब 100 लोगों ने एफिल टावर का दौरा किया था।
विवाद के बारे में पूछे जाने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नयी दिल्ली में एक प्रेसवार्ता के दौरान कहा, ‘‘हमें पेरिस क्षेत्र में बीएपीएस संस्था द्वारा एक मंदिर की प्राणप्रतिष्ठा की जानकारी है। जहां तक टावर से जुड़े इस विशेष मुद्दे का सवाल है, यह पूरी तरह संबंधित संस्थाओं के बीच का मामला है।’’
श्रमिक संगठन की एक प्रतिनिधि डायने डावोइन ने फ्रांस टेलीविजन को बताया कि शनिवार को प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को ‘‘उनके कार्यस्थलों से हटा दिया गया था।’’
खबर के अनुसार एफिल टावर के कर्मचारियों ने एक बयान जारी करके उन ‘‘पेशेवर निर्देशों’’ की निंदा की, जिनके कारण ‘‘महिला कर्मचारियों को उनकी लैंगिक पहचान के आधार पर कार्यस्थल से अलग रखा गया तथा उनकी जगह दूसरे कर्मचारियों को लाया गया।’’
सीजीटी ट्रेड यूनियन की ओर से जारी एक बयान में कर्मचारियों ने ‘‘कार्यस्थल पर दिए गए उन निर्देशों’’ की निंदा की, जिनके चलते महिला कर्मचारियों को उनकी लैंगिक पहचान के आधार पर दरकिनार किया गया, उनकी जगह अन्य कर्मचारियों को लगाया गया।
फ्रांस24 द्वारा उद्धृत बयान के अनुसार, ‘‘कुछ महिला कर्मचारियों से अपनी जगह छोड़कर अन्य क्षेत्रों में चले जाने को कहा गया। कुछ स्थानों पर उनकी जगह पुरुष कर्मचारियों को तैनात किया गया।’’
बयान में कहा गया, ‘‘सभी महिला कर्मचारियों को निर्देश दिया गया कि जब तक प्रतिनिधिमंडल वहां मौजूद है, वे कुछ निर्धारित क्षेत्रों से होकर न गुजरें और न ही उन्हें पार करें।’’
फ्रांस24 की खबर के अनुसार, हर साल करीब 70 लाख पर्यटकों को आकर्षित करने वाला यह लोकप्रिय स्थल कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच बैठक के बाद मंगलवार को फिर से खोल दिया जाएगा।
एफिल टावर का संचालन करने वाली कंपनी सीईटीई ने स्वीकार किया है कि हिंदू प्रतिनिधिमंडल ने अनुरोध किया था कि उसके दौरे का आयोजन इस तरह किया जाए कि ‘‘महिलाओं के साथ बातचीत’’ को यथासंभव सीमित रखा जा सके। कंपनी ने कहा कि ‘‘इन शर्तों को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए था।’’
पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोआर ने कहा कि एफिल टावर के कर्मचारियों का गुस्सा जायज है। उन्होंने कथित परिस्थितियों को अस्वीकार्य बताया और कहा कि यह पता लगाने के लिए जांच शुरू की जाएगी कि वास्तव में क्या हुआ था।
ग्रेगोआर ने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘मैं एफिल टावर के कर्मचारियों द्वारा व्यक्त किए गए गुस्से का संज्ञान ले रहा हूं और मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि उनका असंतोष जायज है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह स्वीकार्य नहीं है कि ऐसी परिस्थितियों को बर्दाश्त किया जाए। ये न तो मेरे मूल्य हैं और न ही वे मूल्य हैं, जिनका एफिल टावर को पालन करना चाहिए। जरूरी है कि यहां हर व्यक्ति महिला और पुरुष के बीच किसी भेदभाव के बिना स्वतंत्र रूप से आ-जा और काम कर सके। इस विरोध-प्रदर्शन के पीछे की घटनाओं की पूरी सच्चाई सामने लाना बेहद जरूरी है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘महिलाओं और पुरुषों के बीच समानता हमारे ऐतिहासिक स्मारकों की चौखट पर या इस शहर में कहीं भी खत्म नहीं होगी। इसे हर जगह और सभी के लिए लागू किया जाना चाहिए।’’
ग्रेगोआर ने कहा, ‘‘मैं यह सुनिश्चित करूंगा, हर जगह और बिना किसी अपवाद के, जल्द से जल्द जांच शुरू की जाएगी।’’
पेरिस स्थित बीएपीएस हिंदू मंदिर ने इस घटना के लिए खेद जताया और कहा कि वह इसको लेकर उठाई गई चिंताओं को समझता है तथा उन्हें ‘‘बहुत गंभीरता से’’ लेता है।
मंदिर ने कहा कि यह दौरा एफिल टावर की टीम के साथ समन्वय करके आयोजित किया गया था, ताकि अन्य पर्यटकों को कम से कम असुविधा हो।
उसने ‘एक्स’ पर जारी एक बयान में कहा, ‘‘हमारी जानकारी के अनुसार, किसी भी समय किसी को एफिल टावर में प्रवेश करने से नहीं रोका गया।’’ उसने कहा कि ‘‘इस स्थिति से किसी को भी ठेस पहुंची हो या असुविधा हुई हो तो हम उनसे तहेदिल से माफी मांगते हैं।’’
बीएपीएस ने कहा कि वह ‘‘आपसी सम्मान और दूसरों की सेवा के सार्वभौमिक मूल्यों के प्रति गहराई से प्रतिबद्ध’’ है।
बीएपीएस की वेबसाइट के अनुसार, यह ‘‘वेदों में निहित सामाजिक-आध्यात्मिक हिंदू आस्था’’ है, जिसकी नींव ‘‘व्यावहारिक आध्यात्मिकता’’ पर रखी गई है।
बीएपीएस के अनुसार, दुनिया भर में उसके समुदाय में 10 लाख या उससे अधिक अनुयायी हैं और इसके 1,300 से अधिक मंदिर हैं, जो उत्तरी अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, पश्चिम एशिया, भारत और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में फैले हुए हैं।
खबर के अनुसार, बीएपीएस ने रविवार को फ्रांस में पेरिस के पास अपने पहले बड़े मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा की।
इस घटना को लेकर फ्रांस के कई वरिष्ठ नेताओं ने आलोचना की है।
फ्रांस की नेशनल असेंबली की अध्यक्ष याएल ब्रॉन-पिवे ने भी घटना की निंदा की और कहा कि वह इस बात को स्वीकार नहीं कर सकतीं कि विदेशी आगंतुकों की मांगों को पूरा करने के लिए महिलाओं को हटने को कहा जाए।
उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मैं महिलाओं को विदेशी आगंतुकों की मांगों को पूरा करने के लिए हटने के लिए मजबूर किए जाने को स्वीकार नहीं करूंगी। दूसरों का स्वागत करने का मतलब कभी भी अपने मूल्यों को त्यागना नहीं होता। फ्रांस में महिलाएं सार्वजनिक स्थानों पर पूरी तरह अपनी जगह रखती हैं। कोई भी उन्हें यह निर्देश नहीं दे सकता कि वहां से उन्हें हट जाना चाहिए।’’
फ्रांस की लैंगिक समानता मंत्री ऑरोर बर्जे ने घटना को ‘‘अस्वीकार्य’’ बताया और कहा कि महिलाओं और पुरुषों के बीच समानता फ्रांस में एक गैर-समझौतावादी सिद्धांत है।
उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘फ्रांस में हम महिलाओं से खुद को मिटा लेने के लिए नहीं कहते। कोई भी सिद्धांत या धर्म गणराज्य के कानूनों से ऊपर नहीं है।’’
पूर्व प्रधानमंत्री गैब्रियल अत्ताल ने भी घटना की आलोचना करते हुए कहा, ‘‘फ्रांस में कोई संस्कृति, कोई आस्था, कोई उपासना, कुछ भी और कोई भी महिलाओं के स्थान का निर्धारण नहीं कर सकता। हमारे एफिल टावर की रक्षा के लिए जुटे कर्मचारियों को मेरा पूरा समर्थन है, जो स्वतंत्रता और मुक्ति का प्रतीक है।’’
भाषा अमित पवनेश
पवनेश

Facebook


