तिब्बत-नेपाल बाढ़: विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन को ठहराया जिम्मेदार, चीनी पनबिजली परियोजनाओं पर उठे सवाल

तिब्बत-नेपाल बाढ़: विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन को ठहराया जिम्मेदार, चीनी पनबिजली परियोजनाओं पर उठे सवाल

तिब्बत-नेपाल बाढ़: विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन को ठहराया जिम्मेदार, चीनी पनबिजली परियोजनाओं पर उठे सवाल
Modified Date: September 8, 2026 / 07:57 pm IST
Published Date: September 8, 2026 7:57 pm IST

(केजेएम वर्मा)

ल्हासा, आठ सितंबर (भाषा) तिब्बत-नेपाल सीमा पर 26 अगस्त को अचानक आई भीषण बाढ़ ने ब्रह्मपुत्र नदी पर बन रहे विशाल बांध सहित क्षेत्र में चीन की कई पनबिजली परियोजनाओं को गहन जांच के दायरे में ला खड़ा किया है।

चीन के विशेषज्ञों का कहना है कि हाल में आई आपदा में वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी और ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने का योगदान हो सकता है।

चीन के जलवायु विशेषज्ञों के अनुसार, यह आपदा कई कारकों के संयुक्त प्रभाव का नतीजा हो सकती है, जिनमें बढ़ता तापमान, ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना, स्थानीय भूगर्भीय एवं भौगोलिक परिस्थितियां तथा व्यापक जलवायु परिवर्तन शामिल हैं।

तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के मौसम विज्ञान वेधशाला के प्रमुख सुन शियाओगुआंग ने बताया, “हमारी निगरानी के अनुसार, तिब्बत में कम समय में होने वाली बारिश, बारिश के पैटर्न में असंतुलन और तापमान में बढ़ोतरी देखी जा रही है।”

उन्होंने बताया कि तिब्बत क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के संकट से प्रभावित हो सकता है।

सुन शियाओगुआंग ने रविवार को तिब्बत-नेपाल सीमा के पास अचानक आई बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र की ओर जाते समय ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में बताया, “जहां तक मेरी जानकारी है और चीन के मौसम विज्ञान वेधशाला की ओर से प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, मेरा मानना है कि चीन में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के कारण आने वाले समय में और अधिक मौसम संबंधी घटनाएं देखने को मिल सकती हैं।”

नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को आई इस आपदा की शुरुआत हिमस्खलन से हुई थी और उसके बाद पानी व मलबे का भारी बहाव भोटेकोशी नदी के रास्ते नीचे की ओर आया, जिससे उत्तरी और मध्य नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही हुई।

इस घटना में 1,350 से अधिक लोगों की मौत हुई है, जबकि करीब 5,000 लोग अब भी लापता हैं।

चीन के अधिकारियों के अनुसार, चीन की ओर इस अचानक आई बाढ़ में 43 लोगों की मौत हुई है, जबकि 519 लोग अब भी लापता हैं।

लापता लोगों में 261 विदेशी नागरिक शामिल हैं, जिनमें 49 भारतीय हैं।

चेंगदू स्थित चीन विज्ञान अकादमी के तहत पर्वतीय आपदाओं और पर्यावरण संस्थान के निदेशक एवं शोधकर्ता कांग शिचांग ने कहा कि छिंगहाई-तिब्बत पठार के सभी ग्लेशियरों का क्षेत्रफल पिछले छह दशकों में करीब 24 प्रतिशत घट गया है। कांग ने सोमवार को ‘द पेपर’ को बताया कि पठार के दक्षिणी हिस्से में यह चलन और अधिक तेज हो रहा है, खासकर गंगदिसे पर्वत, न्येनचेन तांगल्हा पर्वत और हिमालय क्षेत्र में इसी अवधि के दौरान ग्लेशियरों का क्षेत्रफल करीब 40 प्रतिशत कम हुआ है।

उन्होंने इस तेज गिरावट का मुख्य कारण वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी को बताया। कांग ने कहा कि ग्लेशियरों की बर्फ लगातार कम होने से पूरे पठार में हिमनद झीलों की संख्या और आकार में भी काफी वृद्धि हुई है।

उन्होंने बताया कि इससे हिमनद झीलों के फटने से आने वाली बाढ़ और उससे जुड़े भूस्खलन की घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।

भाषा जितेंद्र दिलीप

दिलीप


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