एयर फ़ोर्स वन विमान से, छह जून (एपी) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि वह ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते से फोन पर बात कर सकते हैं, जबकि चीन ने सार्वजनिक रूप से उनसे आग्रह किया है कि वह स्वशासित द्वीप के नेता से सीधे बातचीत न करें, जिस पर वह अपना दावा करता है।
ट्रंप ने इस तरह का विचार पहली बार तब रखा जब वह बीजिंग में राष्ट्रपति शी चिनफिंग से मुलाकात के बाद लौट रहे थे। उन्होंने कहा था कि वह लाई से बातचीत करना चाहते हैं, क्योंकि वह इस बात पर विचार कर रहे हैं कि ताइपे के लिए 14 अरब अमेरिकी डॉलर के हथियारों की बिक्री को आगे बढ़ाया जाए या नहीं। इस बिक्री को कांग्रेस ने इस वर्ष की शुरुआत में मंजूरी दी थी।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने शुक्रवार को संकेत दिया कि ताइवान के नेता के साथ बातचीत की संभावना अब भी बनी हुई है। जब उनसे पूछा गया कि क्या उनका अब भी लाई से बात करने का इरादा है तो ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, ‘‘मैं हमेशा उनसे बात करूंगा।’’
यदि यह बातचीत होती है, तो यह कई दशकों में किसी वर्तमान अमेरिकी और ताइवानी राष्ट्रपति के बीच सीधी बातचीत होगी। वहीं चीन ने ट्रंप को ऐसे किसी संपर्क से बचने की सलाह दी है।
वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास ने इस सप्ताह ‘एसोसिएटेड प्रेस’ को दिए एक बयान में कहा कि इस तरह की कोई भी फोन बातचीत अमेरिका-चीन के नाजुक संबंधों में हुई प्रगति को नुकसान पहुंचा सकती है।
वहीं, ताइवान के राष्ट्रपति भी ट्रंप से बातचीत के लिए तैयार हैं।
लाई ने कहा है कि यदि यह बातचीत होती है तो वह ट्रंप से कहेंगे कि ताइवान जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता वैश्विक सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, और वह ट्रंप से यह भी कहेंगे कि चीन इस जलडमरूमध्य में शांति को ‘तबाह’ करने का कार्य कर रहा है।
लाई ने कहा कि वह ट्रंप को यह भी बताएंगे कि ताइवान का बढ़ता रक्षा बजट खतरों के जवाब में है, और अमेरिकी हथियारों की खरीद जलडमरूमध्य की स्थिरता की रक्षा के लिए जरूरी है।
एपी शोभना वैभव
वैभव