ट्रंप ने दावोस में ‘शांति बोर्ड’ का अनावरण किया, लेकिन कई शीर्ष सहयोगियों ने बनाई दूरी
ट्रंप ने दावोस में ‘शांति बोर्ड’ का अनावरण किया, लेकिन कई शीर्ष सहयोगियों ने बनाई दूरी
दावोस, 22 जनवरी (एपी)राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमास और इजराइल के बीच हुए युद्धविराम को बनाए रखने के प्रयासों का नेतृत्व करने के लिए बृहस्पतिवार को अपने ‘शांति बोर्ड’ का औपचारिक रूप से अनावरण किया।
ट्रंप ने इस मौके पर रेखांकित किया, ‘‘ हर कोई उस निकाय का हिस्सा बनना चाहता है’’ जो अंततः संयुक्त राष्ट्र का प्रतिद्वंद्वी साबित हो सकता है। हालांकि अमेरिका के कई शीर्ष सहयोगी इसमें हिस्सा नहीं लेने का विकल्प चुना।
ट्रंप ने विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ)के वार्षिक सम्मेलन में अपने संबोधन में युद्धग्रस्त गाजा पट्टी के भविष्य की रूपरेखा तैयार करने की परियोजना को गति देने की कोशिश की, जो इस सप्ताह पहले ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की उनकी धमकियों और फिर उस प्रयास से नाटकीय रूप से पीछे हटने के कारण धूमिल हो गई है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह केवल अमेरिका के लिए नहीं है, यह पूरी दुनिया के लिए है। मुझे लगता है कि गाजा में सफलता मिलने के बाद हम इसे अन्य क्षेत्रों में भी लागू कर सकते हैं।’’
इस कार्यक्रम में गाजा में भावी प्रौद्योगिकी पर बल देने वाली सरकार के प्रमुख अली शाथ ने घोषणा की कि राफा सीमा चौकी अगले सप्ताह दोनों दिशाओं की तरफ से खुल जाएगी। इससे पहले, इजराइल ने दिसंबर की शुरुआत में गाजा और मिस्र के बीच स्थित इस चौकी को खोलने की बात कही थी, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं किया है।
गाजा निवासी और पेशे से इंजीनियर और फलस्तीनी प्राधिकरण के पूर्व अधिकारी शाथ, अमेरिकी पर्यवेक्षण के तहत क्षेत्र का शासन करने के लिए गठित फलस्तीनी समिति की देखरेख कर रहे हैं।
‘शांति बोर्ड’ की परिकल्पना शुरू में विश्व के नेताओं के एक छोटे समूह के रूप में की गई थी जो युद्धविराम की देखरेख करेगा, लेकिन यह कहीं अधिक महत्वाकांक्षी रूप ले चुका है। इसकी सदस्यता और इसके कार्यक्षेत्र के बारे में संदेह के कारण अमेरिका के सबसे करीबी माने जाने वाले कुछ देशों ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया है।
ट्रंप ने ‘शांति बोर्ड’ के अनावरण समारोह में भाग न लेने के मुद्दे को नजर अंदाज करते हुए कहा कि 59 देशों ने बोर्ड पर हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि वास्तव में केवल 19 देशों और अमेरिका के राष्ट्राध्यक्ष, शीर्ष राजनयिक और अन्य अधिकारी ही उपस्थित थे। ट्रंप ने अजरबैजान से लेकर पैराग्वे और हंगरी तक के समूह से कहा, ‘‘आप दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोग हैं।’’
ट्रंप ने इस बोर्ड द्वारा संयुक्त राष्ट्र के कुछ कार्यों को प्रतिस्थापित करने और संभवतः एक दिन उस पूरे निकाय को ही अप्रचलित बना देने की बात कही है। लेकिन स्विट्जरलैंड की आल्प्स पहाड़ियों में आयोजित डब्ल्यूईएफ की बैठक के दौरान उन्होंने अधिक सुलहपूर्ण टिप्पणी की।
ट्रंप ने कहा, ‘‘हम इसे संयुक्त राष्ट्र के सहयोग से करेंगे। हालांकि, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की इस बात के लिए आलोचना भी की कि दुनिया भर में कुछ संघर्षों को सुलझाने के लिए उसके प्रयास पर्याप्त नहीं थे।
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि कुछ देशों के नेताओं ने संकेत दिया है कि वे इसमें शामिल होने की योजना बना रहे हैं, लेकिन उन्हें अब भी अपनी संसदों से अनुमोदन की आवश्यकता है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि उन देशों ने भी सदस्यता के संबंध में जानकारी मांगी है, जिन्हें अभी तक भाग लेने के लिए आमंत्रित नहीं किया गया था।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि उनका देश किसी भी प्रतिबद्धता पर निर्णय लेने से पहले मॉस्को के ‘‘रणनीतिक साझेदारों’’ से परामर्श कर रहा है। रूसी राष्ट्रपति बृहस्पतिवार को मॉस्को में फलस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास की मेजबानी करेंगे।
ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर ने कहा कि उनका देश इस पर हस्ताक्षर नहीं कर रहा है ‘‘क्योंकि यह एक कानूनी संधि से संबंधित है जो कहीं अधिक व्यापक मुद्दे उठाती है’’।
उन्होंने ब्रिटिश ब्राडकॉस्टिंग कॉरपोरेशन (बीबीसी) को बताया, ‘‘हमें इस बात की भी चिंता है कि राष्ट्रपति पुतिन शांति की बात करने वाली किसी चीज का हिस्सा क्यों बन रहे हैं, जबकि पुतिन की ओर से अभी तक यूक्रेन में शांति के प्रति प्रतिबद्धता के कोई संकेत नहीं मिले हैं।’’
फ्रांस के इनकार के बाद नॉर्वे और स्वीडन ने संकेत दिया है कि वे इसमें शामिल नहीं होंगे। फ्रांसीसी अधिकारियों ने रेखांकित किया कि उनका देश गाजा शांति योजना का समर्थन करता है, लेकिन उसे इस बात की चिंता है कि यह बोर्ड संघर्षों के समाधान के मुख्य मंच के रूप में संयुक्त राष्ट्र की जगह लेने की कोशिश कर सकता है।
कनाडा, यूक्रेन, चीन और यूरोपीय संघ की कार्यकारी शाखा ने भी बोर्ड में शामिल होने को लेकर कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई है। ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को लेकर लगाए जाने वाले भारी शुल्क को वापस लेने से कुछ सहयोगी देशों की अनिच्छा कम हो सकती है, लेकिन यह मुद्दा अब भी पूरी तरह से सुलझा नहीं है।
क्रेमलिन ने बृहस्पतिवार को कहा कि पुतिन अब्बास के साथ अपनी बातचीत के दौरान शांति बोर्ड को एक अरब डॉलर भेजने और उसका उपयोग मानवीय उद्देश्यों के लिए करने के अपने प्रस्ताव पर चर्चा करने की योजना बना रहे हैं। लेकिन उसने यह भी कहा कि इस धन के उपयोग के लिए अमेरिका द्वारा अवरोध हटाने की आवश्यकता होगी।
‘शांति बोर्ड’ का विचार सबसे पहले ट्रंप की गाजा युद्धविराम की 20 सूत्री योजना में सामने रखा गया था और इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भी समर्थन दिया था।
इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने घोषणा की है कि वह इसमें शामिल होने के लिए सहमत हो गए हैं। इससे पहले उनके कार्यालय ने गाजा की निगरानी के लिए गठित बोर्ड की समिति की संरचना की आलोचना की थी।
ट्रंप ने बृहस्पतिवार को एक बार फिर दोहराया कि हमास को हथियार डालना होगा अन्यथा उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
ट्रंप ने कहा कि गाजा में युद्ध ‘‘वास्तव में समाप्त होने वाला है।’’ उन्होंने साथ ही चेतावनी देते हुए कहा, ‘‘वहां पर कुछ छोटी-मोटी आग हैं जिन्हें हम बुझा देंगे। वे छोटी हैं, जबकि पहले वे बहुत बड़ी, भीषण आग थीं।’’
ट्रंप ने बृहस्पतिवार को दावोस पहुंचे यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोदिमीर ज़ेलेंस्की के साथ भी करीब एक घंटे तक बंद कमरे में बातचीत की।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि बैठक में चर्चा ‘‘बहुत अच्छी’’रही, लेकिन किसी बड़ी सफलता की घोषणा नहीं की। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने कई यूरोपीय देशों द्वारा शांति बोर्ड से दूरी बनाए रखने के मुद्दे पर चर्चा नहीं की।
ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जेरेड कुशनर के वार्ता के लिए मॉस्को पहुंचने की उम्मीद है। हालांकि, रिपब्लिकन राष्ट्रपति कई महीनों से जेलेंस्की और पुतिन को उनके लगभग चार साल पुराने युद्ध को समाप्त करने के लिए शर्तों पर सहमत कराने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
जेलेंस्की के साथ अपनी मुलाकात के बाद ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि यह सब (युद्ध)खत्म हो जाएगा।’’
एपी धीरज माधव
माधव


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