जापान के साथ तनाव के बीच दो जुड़वा पांडा चीन लौटेंगे
जापान के साथ तनाव के बीच दो जुड़वा पांडा चीन लौटेंगे
(केजेएम वर्मा)
बीजिंग, 21 जनवरी (भाषा)चीन और जापान के बीच कूटनीतिक तनाव के बीच, जापानी जनता के चहेते जुड़वां पांडा अगले सप्ताह अपने मूल निवास चीन लौट जाएंगे। चीन ने बुधवार को संकेत दिया कि वह इनकी जगह पर अन्य पांडा नहीं भेजेगा।
चीन विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने प्रेस वार्ता में बताया कि चीन और जापान के बीच हुए समझौते के आधार पर, तोक्यो के उएनो चिड़ियाघर में रहने वाले विशाल पांडा शियाओ शियाओ और लेई लेई फरवरी से पहले निर्धारित समय पर लौट आएंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे पता है कि जापान में बहुत से लोग विशाल पांडा को पसंद करते हैं, और हम जापानी मित्रों का चीन में आकर उनसे मिलने के लिए स्वागत करते हैं।’’ यह स्पष्ट संकेत था कि चीन जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची द्वारा ताइवान पर की गई टिप्पणियों से नाराज है और इन पांडा के स्थान पर दूसरे पांडा नहीं भेजेगा।
दोनों पांडा को चीन वापस भेजे जाने पर 1972 के बाद पहली बार ऐसा होगा जब जापान में पांडा नहीं होंगे।
तोक्यो सरकार ने सोमवार को घोषणा की कि शहर के चिड़ियाघर में मौजूद जुड़वां पांडा 27 जनवरी को चीन के लिए रवाना होंगे। इन पांडा को जापान-चीन मित्रता के प्रतीक के रूप में देखा जाता रहा है।
जापानी समाचार एजेंसी क्योदो के मुताबिक शियाओ शियाओ और उसकी बहन लेई लेई को उएनो चिड़ियाघर से ले जाया जाएगा और दोनों 28 जनवरी को चीन के उस केंद्र में पहुंचेंगे जहां उनकी बड़ी बहन शियांग शियांग को रखा गया है।
शियाओ शियाओ और लेई लेई को देखने के लिए ऑनलाइन टिकटों की बिक्री पहले ही बंद हो चुकी है और रविवार को अंतिम दिन के लिए उपलब्ध टिकटों की मांग उपलब्धता की तुलना में 24.6 गुना है।
ये जुड़वां पांडा 2021 में अपनी मां शिन शिन और उसके साथी री री से पैदा हुए थे, जिन्हें प्रजनन अनुसंधान के लिए जापान को उधार दिया गया था। जापान में जन्म लेने के बावजूद शावकों का स्वामित्व चीन के पास ही रहा।
चीन लंबे समय से विशाल पांडा का उपयोग विभिन्न देशों के साथ कूटनीतिक संबंध स्थापित करने और सद्भावना दिखाने के साधन के रूप में करता रहा है।
अपनी ‘पांडा कूटनीति’ के तहत,चीन ने दुनिया भर के लगभग 20 देशों को पांडा उपलब्ध कराए हैं, जिन्हें चीनी प्रजनकों की देखरेख में पशु उद्यानों में एक निश्चित अवधि के लिए जनता के देखने हेतु रखा जाता है।
खबरों के मुताबिक, पांडा रखने वाले चिड़ियाघरों को संरक्षण के लिए चीन को सालाना लगभग दस लाख अमेरिकी डॉलर का शुल्क देना पड़ता है।
समझौते के तहत, पांडा का स्वामित्व चीन के पास ही रहेगा, और विदेश में पैदा हुए शावकों को चीन को वापस करना होगा।
भाषा धीरज नरेश
नरेश


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