ब्रिटेन नीत समूह का श्रीलंका से आग्रह: संस्थागत सुधारों के वादों को ‘ठोस’ कार्रवाई में बदलें

ब्रिटेन नीत समूह का श्रीलंका से आग्रह: संस्थागत सुधारों के वादों को ‘ठोस’ कार्रवाई में बदलें

ब्रिटेन नीत समूह का श्रीलंका से आग्रह: संस्थागत सुधारों के वादों को ‘ठोस’ कार्रवाई में बदलें
Modified Date: September 9, 2026 / 03:00 pm IST
Published Date: September 9, 2026 3:00 pm IST

कोलंबो, नौ सितंबर (भाषा) ब्रिटेन के नेतृत्व वाले देशों के एक समूह ने श्रीलंका से मानवाधिकारों और संस्थागत सुधारों के प्रति अपनी घोषित प्रतिबद्धता को ‘ठोस कार्रवाई’ में बदलने और जबरन गायब किए गए लोगों के अनसुलझे मामलों का समाधान करने का आग्रह किया है।

यह अपील मंगलवार को जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के 63वें सत्र के दौरान श्रीलंका पर हुई चर्चा में की गई। यह चर्चा संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (ओएचसीएचआर) की श्रीलंका में मानवाधिकारों की स्थिति पर रिपोर्ट पर विचार के बाद हुई।

‘श्रीलंका कोर ग्रुप’ में कनाडा, मलावी, मोंटेनेग्रो, उत्तर मैसेडोनिया और ब्रिटेन शामिल हैं और उसने मानवाधिकार उच्चायुक्त के आकलन को संतुलित बताते हुए उसका स्वागत किया।

समूह ने मौजूदा सरकार द्वारा उठाए गए भ्रष्टाचार-विरोधी कदमों और अतीत में हुए चर्चित मानवाधिकार उल्लंघनों, राजनीतिक हत्याओं तथा जबरन गुमशुदगी के मामलों को फिर से खोलने के लिए उठाए गए कदमों को सराहनीय कदम बताया।

हालांकि, समूह ने कहा कि सरकार के जवाबदेही और सुलह-सफाई के प्रयासों में विश्वास पैदा करने के लिए काफी अधिक कार्रवाई की आवश्यकता है।

समूह ने कहा, ‘‘ यह बेहद महत्वपूर्ण है कि सरकार द्वारा सुधार के लिए व्यक्त की गई प्रतिबद्धता को ठोस प्रगति में बदला जाए।’’

संयुक्त बयान ब्रिटेन की मानवाधिकार राजदूत एलेनोर सैंडर्स ने प्रस्तुत किया।

समूह ने कहा, ‘‘सामूहिक कब्रों की खुदाई इस बात की गंभीर याद दिलाती है कि जबरन गायब किए गए हजारों लोगों के मामले अब भी अनसुलझे हैं। उत्तर और पूर्वी क्षेत्रों सहित नागरिक समाज, पत्रकारों और पीड़ित समूहों को डराने-धमकाने, परेशान करने और उन पर लगाए जा रहे प्रतिबंधों की रिपोर्टें भी चिंता का कारण बनी हुई हैं।’’

समूह ने श्रीलंका सरकार से पारदर्शी और समावेशी परामर्श के माध्यम से लोकतांत्रिक शासन को आगे बढ़ाने का आग्रह किया, जिसमें सभी प्रभावित समुदायों की चिंताओं का समाधान किया जाए।

भाषा शोभना मनीषा

मनीषा


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