अमेरिका व ईरान के बीच हुआ शांति समझौता, 19 जून को स्विट्जरलैंड में होगा हस्ताक्षर
अमेरिका व ईरान के बीच हुआ शांति समझौता, 19 जून को स्विट्जरलैंड में होगा हस्ताक्षर
(सज्जाद हुसैन और सागर कुलकर्णी)
इस्लामाबाद/वाशिंगटन, 15 जून (भाषा) राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका और ईरान ने अपने 107 दिन लंबे युद्ध को खत्म करने के लिए एक समझौते को अंतिम रूप दे दिया है। इस युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा हो गया था।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोमवार को कहा कि उनका देश स्विट्जरलैंड में 19 जून को अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर के लिए आयोजित किये जाने वाले समारोह की मेजबानी करेगा।
शांति समझौते का विवरण हालांकि तत्काल उपलब्ध नहीं कराया गया है।
ट्रंप ने रविवार शाम को ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा, “इस्लामिक गणराज्य ईरान के साथ समझौते को अंतिम रूप दिया जा चुका है। सभी को बधाई।” इस समझौते से वैश्विक ऊर्जा बाजारों ने राहत की सांस ली है।
उन्होंने यह भी कहा कि समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खोला जाएगा और ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी समाप्त कर दी जाएगी।
ट्रंप ने कहा, “मैं मुक्त आवाजाही के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को तत्काल पूरी तरह खोलने और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने की मंजूरी देता हूं। दुनिया के जहाजों, इंजन चालू करो। तेल का प्रवाह होने दो।”
हालांकि, एक अन्य पोस्ट में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य शुक्रवार को समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर होने के बाद ही खोला जाएगा।
यह समझौता ऐसे दिन हुआ जब ट्रंप अपना 80वां जन्मदिन मना रहे थे।
इस शांति समझौते को अंतिम रूप दिये जाने के साथ ही युद्ध और कूटनीति से भरे एक उथल-पुथल भरे हफ़्ते का समापन हुआ; इस दौरान अमेरिका ने ईरान पर हमले किए और अमेरिकी राष्ट्रपति ने आखिरी समय पर इस्लामी गणराज्य के तेल निर्यात केंद्र, खार्ग द्वीप पर कब्जा करने की अपनी धमकी वापस ले ली।
ट्रंप ने कहा, “यह समझौता पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा लाएगा। मुझसे पहले कई राष्ट्रपतियों ने ईरान के साथ शांति स्थापित करने की कोशिश की, लेकिन सभी विफल रहे।”
उन्होंने कहा, “क्षेत्र के नेताओं को पहली बार ऐसा राष्ट्रपति मिला है, जो उन्हें वास्तविक शांति दिलाने में मदद कर सकता है। शुक्रवार को हुए समझौते के बाद जलडमरूमध्य के खुलने और बारूदी सुरंगें हटाने का काम शुरू होने से, इस क्षेत्र और दुनिया के लिए फिर से तेल की आपूर्ति शुरू हो जाएगी।”
इस बीच, इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने कहा कि इजराइली सेना दक्षिणी लेबनान में बनी रहेगी। स्थानीय मीडिया की खबर के अनुसार, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर ईरान हमला करता है, तो इजराइल ईरान पर “जबर्दस्त ताकत” से हमला करेगा।
सरकारी समाचार एजेंसी ‘इरना’ की खबर के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि समझौते को लागू करने और लेबनान पर इजराइली हमलों को पूरी तरह रोकने के लिए अमेरिका जिम्मेदार है।
ईरान के उप-विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने पुष्टि की कि हस्ताक्षर समारोह शुक्रवार को होना है, जिसके बाद धीरे-धीरे इस समझौते को लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि समझौते के तहत ईरान की प्रतिबद्धताएं पूरी तरह से शर्तों और आपसी लेन-देन पर आधारित हैं। उन्होंने आगे कहा कि ईरान के कदम दूसरे पक्ष द्वारा दिखाए गए अनुपालन के स्तर के अनुरूप ही होंगे।
गरीबाबादी ने कहा कि समझौते पर हस्ताक्षर के बाद 60 दिनों तक बातचीत चलेगी, जिसमें मुख्य रूप से परमाणु मुद्दे और प्रतिबंध हटाने पर ध्यान दिया जाएगा; इन प्रतिबंधों में एकतरफा, द्वितीयक और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध शामिल होंगे।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने कहा, “गहन बातचीत के बाद, हमें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है।” अमेरिका और ईरान के बीच समझौते के लिये हो रही बातचीत में पाकिस्तान प्रमुख मध्यस्थ बनकर उभरा है।
उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तुरंत और स्थायी रूप से खत्म करने की घोषणा की है।
शरीफ ने संघर्ष का कूटनीतिक समाधान खोजने की प्रतिबद्धता के लिए अमेरिका और ईरान का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कतर, तुर्किये और सऊदी अरब की भी उनके समर्थन के लिये सराहना की।
उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “अब जबकि समझौता हो चुका है, मध्यस्थ इस सप्ताह कई बैठकों का आयोजन करेंगे। कार्यान्वयन-पूर्व ये चर्चाएं तकनीकी वार्ताओं और आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह का आधार तैयार करेंगी।”
बाद में पाकिस्तानी संसद के निचले सदन नेशनल असेंबली को जानकारी देते हुए शहबाज ने अमेरिका-ईरान समझौते को शांति की दिशा में एक “ऐतिहासिक मील का पत्थर” बताया।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने समझौते का स्वागत करते हुए इसे संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस, अमेरिकी सांसदों और कई पाकिस्तानी नेताओं ने इस समझौते की घोषणा का स्वागत किया।
रविवार को ‘फॉक्स न्यूज’ पर वेंस ने ईरान के साथ हुए समझौते को “अमेरिका के लिए एक बड़ा पल” बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि अभी और काम करने की जरूरत है।
भारतीय-अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने भी इस खबर का स्वागत किया और कहा कि इसमें अमेरिका और ईरान की संप्रभुता के आपसी सम्मान का प्रावधान शामिल है।
इस घोषणा का स्वागत करते हुए, पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने इसे “बहुपक्षवाद को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम” बताया।
भाषा प्रशांत रंजन
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