Islamabad Peace Talks Fail : समुद्र में ईरान की वसूली शुरू! ट्रंप की चेतावनी को किया दरकिनार, अब होर्मुज से गुजरने के लिए देने होंगे करोड़ों

अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता विफल होने के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर सख्ती बढ़ाते हुए जहाजों की आवाजाही सीमित कर दी है, जिससे वैश्विक बाजार में असर की आशंका है।

Islamabad Peace Talks Fail : समुद्र में ईरान की वसूली शुरू! ट्रंप की चेतावनी को किया दरकिनार, अब होर्मुज से गुजरने के लिए देने होंगे करोड़ों
Modified Date: April 13, 2026 / 12:18 am IST
Published Date: April 13, 2026 12:18 am IST
HIGHLIGHTS
  • अमेरिका-ईरान शांति वार्ता पूरी तरह फेल
  • होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का सख्त नियंत्रण
  • जहाजों की संख्या सीमित, भारी फीस लागू

नई दिल्ली : Islamabad Peace Talks Fail  पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता पूरी तरह से विफल हो गई है। रविवार को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने आधिकारिक तौर पर इस कूटनीतिक नाकामी की पुष्टि की। वार्ता की विफलता का मुख्य कारण ईरान के परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज स्ट्रेट के नियंत्रण पर दोनों देशों के बीच उपजा गंभीर विवाद है। इस समझौते के टूटने के तुरंत बाद ईरान ने एक बड़ा कदम उठाते हुए अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्ग पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं, जिससे वैश्विक बाजार में हड़कंप मच गया है।

10 जहाजों को गुजरने की अनुमति

वार्ता बेनतीजा रहने के बाद ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस मार्ग ‘होर्मुज स्ट्रेट’ पर अपना शिकंजा कस दिया है। ईरानी संसद के उप-अध्यक्ष हाजी बाबाई ने दावा किया कि यह समुद्री रास्ता अब पूरी तरह ईरान के नियंत्रण में है। इसके तहत अब इस रास्ते से हर दिन केवल 10 जहाजों को गुजरने की अनुमति दी जाएगी। इतना ही नहीं, ईरान ने प्रत्येक वाणिज्यिक जहाज से 2 मिलियन डॉलर (लगभग 19 करोड़ रुपये) की भारी-भरकम फीस वसूलने का भी एलान किया है। जहाजों की सीमित संख्या और इतनी बड़ी फीस से अंतरराष्ट्रीय माल ढुलाई की लागत बेतहाशा बढ़ने की आशंका है।

क्यों फेल हुई वार्ता ?

इस कूटनीतिक गतिरोध के पीछे दोनों देशों के बीच अविश्वास की एक गहरी खाई नजर आती है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने बयान जारी कर कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ईरान का भरोसा जीतने में नाकाम रहा। उनके मुताबिक, ईरान सकारात्मक नीयत के साथ बातचीत में शामिल हुआ था, लेकिन पिछले युद्धों के कड़वे अनुभवों के कारण अमेरिका पर विश्वास करना मुश्किल हो गया है। इसी भरोसे की कमी ने सीजफायर और शांति की उम्मीदों को खत्म कर दिया, जिससे अब स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई है।

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लेखक के बारे में

I’m Sneha Singh, a journalist and storyteller committed to ethical, ground-level, and impact-oriented reporting. A Gold Medalist in Journalism & Mass Communication, I believe in telling stories with accuracy, sensitivity, and purpose. Currently working with IBC24, I specialize in content writing, news production, and modern storytelling bridging facts with human experiences to inform, engage, and inspire audiences..