अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडल शांति समझौते के बिना पाकिस्तान से रवाना
अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडल शांति समझौते के बिना पाकिस्तान से रवाना
(सज्जाद हुसैन)
इस्लामाबाद, 12 अप्रैल (भाषा) वैश्विक ऊर्जा व्यवधान का कारण बने पश्चिम एशिया संघर्ष को समाप्त करने के लिए इस्लामाबाद में हुई ऐतिहासिक वार्ता में दोनों पक्षों के बीच समझौता नहीं हो पाने के बाद अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडल रविवार को पाकिस्तान से रवाना हो गए।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने वाले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे डी वेंस ने कहा कि वार्ता शांति समझौते तक पहुंचने में विफल रही। उन्होंने तेहरान द्वारा अपने परमाणु कार्यक्रम को नहीं छोड़ने को इसकी प्रमुख अड़चनों में से एक बताया।
वेंस ने वार्ता के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘हम यहां से एक बहुत ही सरल प्रस्ताव लेकर जा रहे हैं, एक ऐसा तरीका जिससे यह स्पष्ट हो जाए कि यह हमारा अंतिम और सर्वोत्तम प्रस्ताव है। हम देखेंगे कि ईरानी इसे स्वीकार करते हैं या नहीं।’
वेंस संवाददाता सम्मेलन संबोधित करने के लगभग एक घंटे बाद रवाना हुए।
पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार, पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर और गृह मंत्री मोहसिन नकवी उन्हें विदाई देने के लिए हवाई अड्डे पर मौजूद थे।
सूत्रों के अनुसार, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ के नेतृत्व में ईरानी प्रतिनिधिमंडल भी पाकिस्तान से रवाना हो चुका है।
सुरक्षा कारणों से ईरानी प्रतिनिधिमंडल के रवाना होने के बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया।
ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘मेहर’ ने भी ‘एक्स’ पर बताया कि कई दौर की बातचीत के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान से रवाना हो गया है।
ईरान ने कहा कि अमेरिकी पक्ष की ‘अत्यधिक मांगों’ के कारण इस्लामाबाद वार्ता विफल रही।
हालांकि, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने इस बात पर जोर दिया कि ‘कूटनीति कभी समाप्त नहीं होती।’
ईरानी प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार रात इस्लामाबाद पहुंचा था, जबकि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल शनिवार तड़के पहुंचा था।
आधिकारिक सूत्रों ने रविवार को बताया कि ईरान-अमेरिका शांति वार्ता पहले पाकिस्तान के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से और बाद में दोनों पक्षों के बीच प्रत्यक्ष वार्ता के माध्यम से संपन्न हुई।
पाकिस्तान की मध्यस्थता में वार्ता शनिवार को दोनों पक्षों द्वारा छह दिवसीय युद्धविराम की घोषणा के चार दिन बाद शुरू हुई।
वर्ष 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद ईरान और अमेरिका के बीच यह पहली सीधी, उच्च स्तरीय वार्ता थी।
मीडिया के साथ एक संक्षिप्त बयान में, पाकिस्तान के विदेश मंत्री डार ने कहा कि उनके देश ने पिछले 24 घंटे में कई दौर की ‘गहन और रचनात्मक’ चर्चाओं में मध्यस्थता की।
डार ने प्रगति की उम्मीद जताते हुए कहा कि दोनों पक्षों को स्थायी शांति और क्षेत्रीय स्थिरता प्राप्त करने के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखना चाहिए।
यह संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुआ था, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हुआ और व्यापार बाधित हुआ।
ईरान ने वार्ता के लिए 10 सूत्री योजना रखी थी, जिसमें पश्चिम एशिया से अमेरिकी सेनाओं की वापसी, ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाया जाना और उसे होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण की अनुमति देना शामिल था।
भाषा अमित प्रशांत
प्रशांत

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