(सागर कुलकर्णी)
वाशिंगटन, दो जून (भाषा) अमेरिका के एक प्रमुख सांसद ने प्रतिनिधि सभा के उस प्रस्ताव का समर्थन किया है जिसमें अमेरिकी अर्थव्यवस्था में हिंदू-अमेरिकी समुदाय के योगदान की सराहना की गई है और हिंदुओं के प्रति घृणा, हिंदू-विरोधी कट्टरता तथा समुदाय के पूजा स्थलों पर हमलों की निंदा की गई है।
भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने सोमवार को इस प्रस्ताव का समर्थन किया। यह प्रस्ताव मिशिगन से डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद श्री थानेदार ने पेश किया था।
पिछले साल 24 जनवरी को लाए गए इस प्रस्ताव को अब तक राजा कृष्णमूर्ति और सुहास सुब्रमण्यम सहित 32 सांसद सह-प्रायोजित कर चुके हैं।
कैलिफोर्निया का प्रतिनिधित्व करने वाले डेमोक्रेट सांसद खन्ना ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में इस प्रस्ताव के समर्थन की घोषणा की।
भारतीय मूल के खन्ना ने कहा, ‘‘मुझे श्री थानेदार के प्रतिनिधि सभा में पेश प्रस्ताव संख्या 69 को सह-प्रायोजित करने पर गर्व है। यह प्रस्ताव अमेरिका में हिंदू-अमेरिकी समुदाय के निरंतर योगदान और उसकी जीवंत विविधता की ऐसे समय में सराहना करता है जब हम अपने देश के बहुजातीय लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं।’’
प्रस्ताव में कहा गया है कि हिंदू धर्म दुनिया के सबसे बड़े और सबसे प्राचीन धर्मों में से एक है तथा 100 से अधिक देशों में 1.2 अरब से अधिक हिंदू हैं।
इसमें कहा गया है कि हिंदू धर्म में विविध परंपराएं और आस्था प्रणालियां समाहित हैं जिनमें स्वीकार्यता, परस्पर सम्मान और शांति जैसे सार्वभौमिक मूल्य निहित हैं।
प्रस्ताव के अनुसार, अमेरिका ने 1900 के दशक से दुनिया भर से आए 40 लाख से अधिक हिंदुओं का स्वागत किया है जो अलग-अलग नस्लीय, भाषायी और जातीय पृष्ठभूमि का प्रतिनिधित्व करते हैं।
इसमें कहा गया है कि हिंदू-अमेरिकियों के योगदान से अमेरिका की अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र और हर उद्योग को काफी लाभ हुआ है।
प्रस्ताव में रेखांकित किया गया है कि हिंदू-अमेरिकियों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था और विभिन्न उद्योगों में अहम योगदान दिया है तथा हिंदू परंपराओं एवं प्रथाओं ने दर्शन, आयुर्वेद, कला, संगीत, नृत्य, फैशन, ध्यान, योग और सामुदायिक सेवा के माध्यम से अमेरिकी समाज को समृद्ध किया है।
प्रस्ताव में अमेरिका में बढ़ती ‘‘हिंदुओं के प्रति घृणा, हिंदू-विरोधी कट्टरता, नफरत और असहिष्णुता‘‘ की निंदा करते हुए कहा गया है कि देश में सकारात्मक योगदान के बावजूद हिंदू-अमेरिकियों को अपनी विरासत और प्रतीकों को लेकर रूढ़ धारणाओं तथा दुष्प्रचार का सामना करना पड़ता है।
भाषा
सिम्मी मनीषा
मनीषा