अमेरिका ने ‘हिंद-प्रशांत कमान’ का नाम बदला; भारत का गलत मानचित्र दर्शाया
अमेरिका ने ‘हिंद-प्रशांत कमान’ का नाम बदला; भारत का गलत मानचित्र दर्शाया
(सागर कुलकर्णी)
वॉशिंगटन, 17 जून (भाषा) अमेरिका ने अपने आठ साल पुराने फैसले को पलटते हुए अमेरिकी हिंद-प्रशांत कमान का नाम बदलकर फिर से अमेरिकी प्रशांत कमान (यूएसपीएकॉम) कर दिया है।
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि अमेरिकी प्रशांत कमान नाम 1947 में तत्कालीन राष्ट्रपति हैरी एस. ट्रूमैन द्वारा स्थापित कमान की ऐतिहासिक जड़ों का सम्मान करता है।
इसके अलावा, प्रशांत कमान की वेबसाइट पर मौजूद ‘‘जिम्मेदारी वाले इलाके’’ के मानचित्र ने देश में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं पैदा कर दी हैं। इसमें भारत की सीमाओं को सही रूप में नहीं दिखाया गया है। मानचित्र में, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) और अक्साई चिन को भारत का हिस्सा नहीं दिखाया गया है।
वेबसाइट के जिस हिस्से में गलत मानचित्र है, वहां यह जानकारी दी गई है कि संबंधित वेब पेज को आखिरी बार मार्च में अद्यतन किया गया था।
नयी दिल्ली का कहना है कि 1947 में भारत में जम्मू कश्मीर के ‘‘पूर्ण, कानूनी और अपरिवर्तनीय विलय’’ होने के कारण जम्मू कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा हैं।
विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने मानचित्र के मुद्दे पर भाजपा नीत केंद्र सरकार की आलोचना की है।
कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मोदी जी के मित्रों की यह अजीब आदत रही है कि वे भारत, भारत के हितों और भारत के मित्रों के खिलाफ काम करते हैं। ताजा उदाहरण यह है कि अमेरिकी पैसिफिक कमान ने भारत के गलत मानचित्र का इस्तेमाल किया है, जिसमें जम्मू कश्मीर को भारत से अलग दिखाया गया है और पीओके को पाकिस्तान का हिस्सा बताया गया है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब एक प्रधानमंत्री ने देश को ऐसी शोषणकारी मित्रता के हवाले कर दिया हो तो फिर उस देश को दुश्मनों की क्या जरूरत है?’’
अमेरिकी प्रशांत कमान का कार्यक्षेत्र अमेरिका के पश्चिमी तट से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक फैला है।
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘(तत्कालीन) राष्ट्रपति हैरी एस. ट्रूमैन द्वारा मूल रूप से एक जनवरी 1947 को स्थापित इस कमान ने 70 वर्ष से अधिक समय तक यूएसपीएकॉम के नाम से काम किया और यह अमेरिका की एकीकृत लड़ाकू कमान में सबसे पुरानी एवं सबसे बड़ी कमान है।’’
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान 2018 में अमेरिकी प्रशांत कमान का नाम बदलकर अमेरिकी हिंद-प्रशांत कमान कर दिया गया था।
अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘अमेरिकी प्रशांत कमान…वापस आ गया है।’’
अमेरिका के रक्षा मंत्रालय ने कहा, ‘‘यूएसपीएकॉम के पुराने नाम को बहाल करना कमान की गहरी ऐतिहासिक जड़ों का सम्मान करना है और प्रशांत क्षेत्र में सेवा देने वाले सभी लोगों में गर्व एवं सामूहिक भावना को बढ़ावा देता है।’’
उसने कहा, ‘‘यूएसपीएकॉम नाम द्वितीय विश्व युद्ध के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे की स्थापना में अहम भूमिका निभाने से लेकर कोरियाई युद्ध, वियतनाम युद्ध और कई मानवीय अभियानों के दौरान संयुक्त बलों के साथ समन्वय करने तक- इसकी दशकों की सैन्य विरासत और क्षेत्रीय साझेदारियों को दर्शाता है।’’
बयान में कहा गया कि यूएसपीएकॉम अमेरिका के पश्चिमी तट के पास के जलक्षेत्र से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक सेवाएं देता है।
मंत्रालय ने कहा कि कमान का मूल मिशन और क्षेत्रीय सहयोगियों एवं साझेदारों के साथ मिलकर मुक्त एवं खुले क्षेत्र को बनाए रखने की उसकी प्रतिबद्धता में कोई बदलाव नहीं आया है।
अमेरिका के तत्कालीन रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने 2018 में कहा था कि हिंद और प्रशांत महासागरों के बीच बढ़ते संपर्क को मान्यता देने के लिए इसका नाम बदलकर हिंद-प्रशांत कमान किया गया।
मैटिस ने 2018 में कहा था कि यह कमान ‘‘बॉलीवुड से हॉलीवुड तक और पेंगुइन से ‘पोलर बियर’ (ध्रुवीय भालुओं) तक’’ फैली हुई है और अमेरिका की राष्ट्रीय रक्षा रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
भाषा सुभाष माधव
माधव

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