स्नातक के बाद अमेरिका में काम करने वाले विदेशी छात्रों पर एक लाख डॉलर शुल्क लगाने की तैयारी: रिपोर्ट

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स्नातक के बाद अमेरिका में काम करने वाले विदेशी छात्रों पर एक लाख डॉलर शुल्क लगाने की तैयारी: रिपोर्ट

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  • Publish Date - July 31, 2026 / 10:19 AM IST,
    Updated On - July 31, 2026 / 10:19 AM IST

वाशिंगटन, 31 जुलाई (भाषा) अमेरिका स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद वहां काम करने के इच्छुक अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए जारी किए जाने वाले वीजा पर 1,00,000 अमेरिकी डॉलर का शुल्क लगाने की योजना बना रहा है। ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ अखबार की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की यह पहल ऐसे समय सामने आई है, जब एक अमेरिकी अदालत ने एच-1बी वीजा पर 1,00,000 अमेरिकी डॉलर का शुल्क लगाने के प्रस्ताव को रद्द कर दिया था।

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) ‘ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग’ (ओपीटी) वीजा पर यह भारी शुल्क लगाने पर विचार कर रहा है। ओपीटी वीजा, छात्रों को जारी किए जाने वाले एफ-1 वीजा का विस्तार होता है।

ओपीटी कार्यक्रम के तहत विदेशी छात्र अपनी पढ़ाई से सीधे जुड़े क्षेत्रों में एक से तीन वर्ष तक अमेरिका में काम कर सकते हैं।

नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 2024 में लगभग 4,19,000 विदेशी नागरिक ओपीटी के तहत अमेरिका में काम कर रहे थे।

अमेरिकी विश्वविद्यालयों से सबसे अधिक भर्ती करने वाली प्रौद्योगिकी कंपनियों ने एच-1बी वीजा पर 1,00,000 अमेरिकी डॉलर शुल्क लगाने के प्रस्ताव का विरोध किया था।

डीएचएस की एक प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा, ‘‘जब तक किसी नीति की औपचारिक घोषणा नहीं हो जाती, तब तक उसे अंतिम नहीं माना जाना चाहिए। डीएचएस में हम लगातार इस बात पर विचार करते रहते हैं कि कानूनी आव्रजन प्रणाली की विश्वसनीयता और निष्पक्षता की रक्षा के लिए उपलब्ध सभी विकल्पों का किस तरह उपयोग किया जाए।’’

रिपोर्ट में कहा गया है कि एच-1बी और छात्र वीजा के अलावा विदेश मंत्रालय के अधिकारी अमेरिका के बाहर से ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने वालों पर भी 1,00,000 अमेरिकी डॉलर का बांड (सुरक्षा राशि) लगाने पर विचार कर रहे हैं। यह राशि तभी वापस की जाएगी, जब आवेदक अमेरिका आकर वहां का नागरिक बन जाएगा।

ओपीटी कार्यक्रम अमेरिका में पढ़ाई करने का विकल्प चुनने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण माना जाता है क्योंकि इसके तहत उन्हें डिग्री पूरी करने के बाद अमेरिका में काम करने का अवसर मिलता है।

यदि ओपीटी की सुविधा नहीं होगी, तो अधिकतर अंतरराष्ट्रीय छात्रों को स्नातक की पढ़ाई पूरी होते ही अमेरिका छोड़ना पड़ेगा। ऐसे में अमेरिकी विश्वविद्यालयों में प्राप्त उनके कौशल और विशेषज्ञता का लाभ अमेरिका के बजाय दूसरे देशों के रोजगार बाजारों को मिलेगा।

भाषा गोला रंजन

रंजन