उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन का श्रीलंका दौरा संपन्न, कई समझौतों पर हस्ताक्षर किये गए

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन का श्रीलंका दौरा संपन्न, कई समझौतों पर हस्ताक्षर किये गए

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन का श्रीलंका दौरा संपन्न, कई समझौतों पर हस्ताक्षर किये गए
Modified Date: April 20, 2026 / 07:09 pm IST
Published Date: April 20, 2026 7:09 pm IST

(तस्वीरों सहित)

कोलंबो, 20 अप्रैल (भाषा) उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने श्रीलंका की अपनी दो दिवसीय यात्रा का सोमवार को समापन किया। इस दौरान उन्होंने द्वीपीय राष्ट्र के शीर्ष नेतृत्व के साथ वार्ता की और दोनों देशों ने द्विपक्षीय सहयोग को प्रगाढ़ करने के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

राधाकृष्णन श्रीलंका का दौरा करने वाले पहले उपराष्ट्रपति हैं। वह रविवार को कोलंबो पहुंचे और राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के साथ बातचीत की।

अधिकारियों ने बताया कि राधाकृष्णन ने भारत की ‘पड़ोस पहले’ नीति और विकासात्मक द्विपक्षीय सहयोग पर जोर दिया।

उपराष्ट्रपति कार्यालय ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘दोनों नेताओं ने साझा इतिहास, मजबूत सभ्यतागत और लोगों के आपसी संबंधों पर आधारित बहुआयामी भारत-श्रीलंका संबंधों को और प्रगाढ़ करने पर सार्थक चर्चा की।’’

उन्होंने भारतीय आवास परियोजना और श्रीलंका में चक्रवात ‘दित्वा’ से प्रभावित क्षेत्रों के लिए 45 करोड़ अमेरिकी डॉलर के पैकेज के तहत कार्यान्वित की जा रही परियोजनाओं सहित विभिन्न पहल पर व्यापक चर्चा की। इनमें खास तौर पर भारतवंशी तमिल समुदाय के सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में किए जा रहे प्रयासों पर ध्यान दिया गया।

दोनों पक्षों ने मछुआरों के मुद्दे पर भी मानवीय दृष्टिकोण से चर्चा की, जिसमें दोनों देशों के मछुआरा समुदायों की आजीविका को ध्यान में रखा गया।

वार्ता के बाद, दोनों पक्षों ने छह समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए, जिनमें मुल्लातिवु में एक चिकित्सा वार्ड का निर्माण, समय से पहले जन्मे शिशुओं के लिए देहिअट्टाकंदिया में एक इकाई की स्थापना, मुथुर में नेत्र रोग, कान, नाक और गले के रोगों और मानसिक स्वास्थ्य इकाइयों का निर्माण शामिल हैं।

भारत ने प्रवासी भारतीयों की छठी पीढ़ी तक ओसीआई (प्रवासी भारतीय नागरिक) पात्रता का विस्तार करने और भारतीय मूल के तमिल समुदाय के लाभ के लिए प्रक्रिया को सरल बनाने की भी घोषणा की।

दोनों पक्षों ने ‘दित्वा’ चक्रवात के बाद पुनर्वास पैकेज के तहत बहाल की गई उत्तरी रेलवे लाइन पर ट्रेन सेवाओं को फिर से शुरू करने की भी घोषणा की।

उन्होंने ‘दित्वा’ आपदा के बाद पुनर्वास कार्य के तहत तीन पुलों – एक मध्य प्रांत (कैंडी) में और दो ऊवा प्रांत में – निर्माण की भी घोषणा की।

यह भी घोषणा की गई कि भारत के नेतृत्व वाले ‘इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस’ में श्रीलंका शामिल होगा।

राधाकृष्णन ने श्रीलंका की प्रधानमंत्री हरिणी अमरसूर्या से बातचीत के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा की। अमरसूर्या शिक्षा मंत्री भी हैं।

इस दौरान ‘सीलोन एस्टेट वर्कर्स एजुकेशन ट्रस्ट’ छात्रवृत्ति योजना को बढ़ाने की घोषणा भी की गई। इस योजना के तहत दी जाने वाली छात्रवृत्तियों की संख्या 350 से बढ़ाकर 700 की जा रही है और मासिक वजीफा ‘ए-लेवल’ के छात्रों के लिए 2,500 श्रीलंकाई रुपये तथा उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों के लिए 7,500 श्रीलंकाई रुपये किया जा रहा है।

उपराष्ट्रपति ने भारतीय आवास परियोजना के तीसरे चरण के तहत सभी आवासीय इकाइयों का निर्माण पूरा होने और उन्हें सौंपे जाने की भी घोषणा की।

तीसरे चरण के तहत श्रीलंका के मध्य प्रांत, ऊवा और दक्षिणी प्रांत के बागान क्षेत्रों के श्रमिकों के लिए 4,000 मकानों के निर्माण का प्रावधान है।

तीसरे चरण के तहत 3,855 इकाइयां पहले ही सौंपी जा चुकी थीं और इस यात्रा के दौरान शेष 145 इकाइयां पूरी कर सौंप दी गईं। यह भारतीय आवास परियोजना की प्रगति में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

करीब 15 वर्ष पहले घोषित इस परियोजना के लिए भारत की कुल प्रतिबद्धता लगभग 1,835 करोड़ रुपये की है।

यह श्रीलंका में अनुदान सहायता की प्रमुख परियोजना है और भारत के बाहर उसकी ऐसी सबसे बड़ी अनुदान सहायता परियोजना मानी जाती है।

इस परियोजना के तहत अब तक कम से कम 50,000 आवासीय इकाइयों का निर्माण पूरा हो चुका है और चौथे चरण में 10,000 का निर्माण कार्य जारी है।

राधाकृष्णन ने सीता एलिया में सीता अम्मन मंदिर की भी यात्रा की। उपराष्ट्रपति ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘रामायण से जुड़ा यह मंदिर भारत और श्रीलंका के बीच गहरे सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।’’

पिछले साल श्रीलंका यात्रा के दौरान मंदिर के जीर्णोद्धार के संबंध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की घोषणा को याद करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि इस पहल से दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंध और मजबूत होंगे। भारत सरकार के सहयोग से इस मंदिर का जीर्णोद्धार करने की घोषणा की गई थी।

उपराष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, श्रीलंका की यात्रा के बाद वह नयी दिल्ली के लिए रवाना हो गए।

भाषा आशीष सुभाष

सुभाष


लेखक के बारे में