नेपाल में क्या विनाशकारी बाढ़ का कारण बना हिमस्खलन? वैज्ञानिक जुटा रहे सबूत

नेपाल में क्या विनाशकारी बाढ़ का कारण बना हिमस्खलन? वैज्ञानिक जुटा रहे सबूत

नेपाल में क्या विनाशकारी बाढ़ का कारण बना हिमस्खलन? वैज्ञानिक जुटा रहे सबूत
Modified Date: August 28, 2026 / 12:46 pm IST
Published Date: August 28, 2026 12:46 pm IST

काठमांडू, 28 अगस्त (भाषा) वैज्ञानिक इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि किसी ग्लेशियर के टूटकर गिरने और बर्फ-चट्टानों के बड़े पैमाने पर खिसकने से नेपाल की भोटेकोशी नदी में विनाशकारी अचानक बाढ़ कैसे आई। प्रारंभिक आकलन से संकेत मिलता है कि मलबे ने अस्थायी रूप से ल्हेन्डे नदी को अवरुद्ध कर एक अस्थायी बांध बना दिया था, जो बाद में टूट गया।

बुधवार को रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ के कारण सैकड़ों लोगों की मौत हो गई और कई जिलों में तबाही मचाते हुए नदी के किनारे बने पुलों तथा अन्य बुनियादी ढांचे नष्ट हो गए।

रसुवागढ़ी में नेपाल-तिब्बत सीमा पार के पास पानी का स्तर अचानक बढ़ने के बाद शुरुआती दौर में ग्लेशियर झील फटने और हिमस्खलन की आशंका जताई गई थी।

‘द काठमांडू पोस्ट’ की खबर के अनुसार, उपग्रह तस्वीरों का विश्लेषण कर रहे वैज्ञानिकों का अब मानना है कि संभवत: बर्फ और चट्टान का एक विशाल टुकड़ा ल्हेन्डे नदी में गिर गया होगा जिससे उसका प्रवाह अस्थायी रूप से बाधित हुआ और एक अस्थायी बांध बन गया जो बाद में ढह गया।

खबर के अनुसार, राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने भी बर्फ और चट्टान गिरने को ही मुख्य कारण के रूप में चिह्नित किया है।

वैज्ञानिकों द्वारा उपग्रहों की जिन तस्वीरों को विश्लेषण किया गया उनमें रसुवागढ़ी सीमा पार से लगभग 20 किमी उत्तर-पूर्व में एक बड़ा हिमस्खलन होता दिखाई दिया। खबर में कहा गया है कि यह मलबा भोटेकोशी की एक सहायक नदी ल्हेन्डे नदी में चला गया, जिससे भरी बाढ़ आ गई।

‘द काठमांडू पोस्ट’ ने काठमांडू विश्वविद्यालय के जलवायु शोधकर्ता और प्रोफेसर रिजन भक्त कायस्थ के हवाले से खबर में बताया कि ऐसा लगता है कि बाढ़ आने से पहले हिमस्खलन ने ल्हेन्डे नदी का रास्ता रोक दिया था। उन्होंने कहा कि उसी समय भूकंप भी आया था, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि उसने हिमस्खलन को जन्म देने में कोई भूमिका निभाई या नहीं।

अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण ने पहले इसे तिब्बत में आया 4.4 तीव्रता का भूकंप बताया था, लेकिन बाद में भूकंपीय तरंगों के अध्ययन के आधार पर आकलन बदला। उसके अनुसार दर्ज ऊर्जा भूकंप के बजाय ग्लेशियर के ढहने और मलबे के बहाव से पैदा हुई थी। इस घटना को बाद में 5.2 तीव्रता की भूकंपीय घटना के रूप में दर्ज किया गया।

अंतरराष्ट्रीय एकीकृत पर्वतीय विकास केंद्र (आईसीआईएमओडी) के विशेषज्ञ सार्थक श्रेष्ठ ने कहा कि अब तक के प्रमाण नेपाल की ओर हुए हिमस्खलन को मुख्य कारण बताते हैं।

हालांकि, पूरी तस्वीर साफ होने में एक-दो सप्ताह लग सकते हैं।

आईसीआईएमओडी वास्तविक घटनाक्रम का पता लगाने के लिए चीनी संस्थानों के साथ काम कर रहा है।

आईसीआईएमओडी के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, बाढ़ असामान्य रूप से तेज और शक्तिशाली थी। गल्छी में त्रिशूली नदी का जलस्तर महज 30 मिनट में नौ मीटर और मलेखु में करीब सात मीटर बढ़ गया।

विशेषज्ञों ने भविष्य में बाढ़ के खतरे से इनकार नहीं किया है। बादलों के कारण उपग्रह निगरानी प्रभावित हो रही है और ऊपरी हिस्से में एक और अस्थायी जलाशय बनने की आशंका पर नजर रखी जा रही है।

कायस्थ ने कहा कि बढ़ते तापमान से हिमालय में ग्लेशियरों के पिघलने, बर्फ-चट्टानों के टूटने और हिमस्खलन का खतरा बढ़ रहा है, हालांकि अगली घटना कहां होगी, यह बताना संभव नहीं है।

भाषा खारी रंजन

रंजन


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