शह मात The Big Debate: महंगाई की अंगड़ाई.. छिड़ी सियासी लड़ाई, शक्कर के दाम पर सियासत गरमाई, महंगाई के मुद्दे ने क्यों लिया सियासी रंग?

Politics over inflation in MP: मध्य प्रदेश में शक्कर के बढ़ते दाम और महंगाई को लेकर सियासत गरमा गई है। विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का मौका दे दिया है।

शह मात The Big Debate: महंगाई की अंगड़ाई.. छिड़ी सियासी लड़ाई, शक्कर के दाम पर सियासत गरमाई, महंगाई के मुद्दे ने क्यों लिया सियासी रंग?

Politics over inflation in MP/Image Credit: IBC24

Modified Date: August 27, 2026 / 11:31 pm IST
Published Date: August 27, 2026 11:30 pm IST
HIGHLIGHTS
  • मध्य प्रदेश में शक्कर के बढ़ते दाम और महंगाई को लेकर सियासत गरमा गई है।
  • त्योहार के मौके पर बढ़ी कीमतों ने विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का मौका दे दिया है।
  • कांग्रेस का आरोप है कि रक्षाबंधन जैसे त्योहार पर शक्कर के दाम बढ़ाकर सरकार ने आम आदमी की परेशानी बढ़ा दी है।

Politics over inflation in MP: भोपाल: मध्य प्रदेश में शक्कर के बढ़ते दाम और महंगाई को लेकर सियासत गरमा गई है। त्योहार के मौके पर बढ़ी कीमतों ने विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का मौका दे दिया है। भोपाल में कांग्रेस के पूर्व मंत्री पीसी शर्मा और विधायक आरिफ मसूद ने क्षेत्र की बहनों से राखी बंधवाई और उन्हें उपहार में एक-एक किलो शक्कर के पैकेट दिए। वहीं इंदौर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने महंगाई के खिलाफ मानव श्रृंखला बनाई और ठेले पर बाइक रखकर प्रदर्शन किया। कांग्रेस का आरोप है कि रक्षाबंधन जैसे त्योहार पर शक्कर के दाम बढ़ाकर सरकार ने आम आदमी की परेशानी बढ़ा दी है। वहीं बीजेपी का पलटवार है कि कांग्रेस महंगाई जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी सिर्फ सुर्खियां बटोरने की राजनीति कर रही है। जबकि सरकार लगातार जनता को राहत देने के प्रयास कर रही है।

शक्कर की कीमतों पर सियासत उस वक्त और तेज हो गई, जब कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बढ़ती कीमतों को लेकर अलग ही तर्क दे दिया। (Politics over inflation in MP) उनका कहना है कि 90 फीसदी लोग मीठा खाना पसंद नहीं करते और वह खुद भी मीठा नहीं खाते। विजयवर्गीय ने यहां तक कहा कि शक्कर महंगी होनी चाहिए और 40 साल की उम्र के बाद लोगों को शक्कर मिलनी ही नहीं चाहिए। इस बयान पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

Politics over inflation in MP: त्योहारों में मिठास कम और सियासत का स्वाद ज्यादा तेज होता जा रहा है..लेकिन बड़ा सवाल ये है कि सियासत की इस गर्मी के बीच आम आदमी की रसोई में महंगाई की तपिश कब कम होगी?

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