Balaghat Raksha Bandhan: 8 साल तक भाई की राह देखती रहीं बहन, आखिरकार पूरी हुई बहन की मुराद, भाई के वापसी के बाद ऐसे मनाया रक्षाबंधन
Balaghat Raksha Bandhan: 8 साल तक भाई की राह देखती रहीं बहन, आखिरकार पूरी हुई बहन की मुराद, भाई के वापसी के बाद ऐसे मनाया रक्षाबंधन
Balaghat Raksha Bandhan | Photo credit: IbC24
- बहन ने भाई को राखी बांधी
- 8 साल का इंतजार हुआ खत्म
- पाकिस्तान से वापसी के बाद ऐसे मनाया रक्षाबंधन
बालाघाट: Balaghat Raksha Bandhan बालाघाट की संघमित्रा के लिए इस रक्षाबंधन की खुशी बेहद खास है। करीब आठ साल के इंतजार के बाद उन्होंने अपने भाई प्रसन्नजीत रंगारी की कलाई पर राखी बांधी है। प्रसन्नजीत करीब सात साल पाकिस्तान की कोट लखपत जेल में बंद रहा और फरवरी 2026 में भारत लौटा। भाई के लापता होने के बाद संघमित्रा ने प्रण लिया था कि वह राखी सिर्फ अपने भाई को ही बांधेंगी। पिछले साल पाकिस्तान भेजी गई राखी डाक सेवा बंद होने के कारण भाई तक नहीं पहुंची, लेकिन अब वही राखी भाई की कलाई पर है।
क्या है पूरा मामला
Balaghat Raksha Bandhan करीब आठ साल पहले प्रसन्नजीत घर से लापता हो गया था। 2011 में फार्मेसी की पढ़ाई के बाद पोस्ट ग्रेजुएशन की तैयारी के दौरान उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ने लगी और वह बार-बार घर से जाने लगा। 2018 में घर से निकला तो वापस नहीं आया। परिवार ने कई जगह तलाश की और धीरे-धीरे उम्मीद छोड़ दी, लेकिन बहन संघमित्रा को भरोसा था कि भाई जरूर लौटेगा। इसी बीच पाकिस्तान से रिहा होकर आए कुलजीत सिंह कछवाहा के फोन से पता चला कि प्रसन्नजीत लाहौर की कोट लखपत जेल में बंद है। दिसंबर 2021 में यह जानकारी मिलने के बाद संघमित्रा ने भाई को वापस लाने की लड़ाई शुरू की।
भाई को वापस लाने के साथ संघमित्रा के सामने परिवार संभालने की भी बड़ी जिम्मेदारी थी। बेटे के गम में मां की मानसिक स्थिति बिगड़ गई और पिता भी बेटे की याद में परेशान रहते थे। आर्थिक तंगी के चलते पिता को वृद्धाश्रम में रखना पड़ा। संघमित्रा ने करीब 14 महीने तक अधिकारियों और नेताओं के चक्कर लगाए, लेकिन मदद नहीं मिली। बाद में मानवाधिकार कार्यकर्ता और अधिवक्ता कपिल फूले से मुलाकात हुई। 21 फरवरी को मानव अधिकार आयोग में याचिका दायर की गई, जिसमें प्रसन्नजीत के लंबे समय से बिना ट्रायल और पर्याप्त कानूनी मदद के जेल में रहने और मानसिक बीमारी के आधार पर मानव अधिकारों के उल्लंघन का मुद्दा उठाया गया।
याचिका के बाद नागरिकता और दस्तावेजों का सत्यापन शुरू हुआ। मध्य प्रदेश सरकार से लेकर पुलिस अधिकारियों तक प्रक्रिया आगे बढ़ी और पाकिस्तान भेजने के लिए संघमित्रा का वीडियो भी रिकॉर्ड किया गया। लेकिन भाई की वापसी की उम्मीद के बीच पिता लोपचंद रंगारी का निधन हो गया। आखिरकार जनवरी के आखिरी सप्ताह के बाद प्रसन्नजीत पाकिस्तान की जेल से रिहा होकर अटारी-वाघा बॉर्डर पहुंचा और फरवरी 2026 में बालाघाट वापस आया। अब भी उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और दस्तावेज बनवाने में परिवार को परेशानी आ रही है। संघमित्रा भाई का बेहतर इलाज कराना चाहती हैं। पिछले साल भेजी गई राखी भाई तक नहीं पहुंची थी, लेकिन इस बार वही राखी उसकी कलाई पर बांधकर बहन के वर्षों का इंतजार पूरा हुआ है।
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