अल्बर्टा जनमत संग्रह में स्वतंत्रता समर्थकों की जीत हुई तो क्या ट्रंप करेंगे समर्थन?

अल्बर्टा जनमत संग्रह में स्वतंत्रता समर्थकों की जीत हुई तो क्या ट्रंप करेंगे समर्थन?

अल्बर्टा जनमत संग्रह में स्वतंत्रता समर्थकों की जीत हुई तो क्या ट्रंप करेंगे समर्थन?
Modified Date: September 4, 2026 / 03:42 pm IST
Published Date: September 4, 2026 3:42 pm IST

(डोनाल्ड बैरी, कैलगरी विश्वविद्यालय)

कैलगरी (कनाडा), चार सितंबर (द कन्वरसेशन) कुछ हफ्तों में अल्बर्टा के लोगों से जनमत संग्रह में पूछा जाएगा कि वे प्रांत को कनाडा का हिस्सा बनाए रखना चाहते हैं या स्वतंत्रता से संबंधित दूसरे जनमत संग्रह की ओर बढ़ना चाहते हैं।

अगर अल्बर्टा स्वतंत्र होना चाहता है तो उसे न सिर्फ देश बनने की जरूरी शर्तें जैसे कि लोग, अपना क्षेत्र, प्रभावी सरकार और दूसरे देशों से संबंध रखने की क्षमता हासिल करनी होगी, बल्कि दूसरे देशों, खासकर अमेरिका से मान्यता भी प्राप्त करनी होगी।

मान्यता के बिना किसी नए देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई दर्जा नहीं मिलता। वह कूटनीति नहीं कर सकेगा, अंतरराष्ट्रीय समझौते नहीं कर सकेगा और अंतरराष्ट्रीय संगठनों में शामिल नहीं हो सकेगा।

अल्बर्टा का जनमत संग्रह कनाडा में तीसरा जनमत संग्रह होगा। इससे पहले 1980 और 1995 में क्यूबेक में जनमत संग्रह हुए थे। कनाडा और अमेरिका के बीच गहरे संबंधों को देखते हुए यह आश्चर्य की बात नहीं थी कि दोनों मौकों पर राष्ट्रपति जिमी कार्टर और बिल क्लिंटन की अमेरिकी सरकारों ने एकजुट कनाडा का समर्थन किया था।

लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कनाडा को 51वां अमेरिकी राज्य बनाने की धमकी कई बार दे चुके हैं। उन्होंने अल्बर्टा के मतदान से पहले खुले तौर पर एकजुट कनाडा के समर्थन की घोषणा नहीं की है। उनसे जुड़े कुछ लोगों ने स्वतंत्र अल्बर्टा की संभावना का सकारात्मक रूप से समर्थन किया है।

1980 का क्यूबेक जनमत संग्रह

पार्टी क्यूबेक्वा के प्रीमियर रेने लेवेक नवंबर 1976 में सत्ता में आए थे और उन्होंने क्यूबेक की स्वतंत्रता पर जनमत संग्रह कराने का वादा किया था। कनाडा के विभाजन और अपनी उत्तरी सीमा पर एक स्वतंत्र क्यूबेक बनने की संभावना ने कार्टर को चिंतित किया।

उन्होंने कहा था कि कनाडा की स्थिरता “हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण है”, लेकिन साथ ही यह भी कहा था कि फैसला कनाडाई लोगों को करना है।

उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि उनकी सरकार स्वतंत्र क्यूबेक को मान्यता देगी या नहीं।

फरवरी 1977 में कनाडा की संसद में भाषण देते हुए प्रधानमंत्री पियरे ट्रूडो ने अमेरिकियों को भरोसा दिलाया था कि “कनाडा की एकता नहीं टूटेगी।”

कार्टर ने परिणाम को लेकर भरोसा जताया। अगले वर्ष अमेरिका के उपराष्ट्रपति वाल्टर मोंडेल ने कनाडा की राजधानी ओटावा की यात्रा के दौरान अमेरिकी प्रशासन के समर्थन को दोहराया।

क्यूबेक्वा पार्टी के प्रमुख रेने लेवेक ने अमेरिकियों से कहा कि स्वतंत्र क्यूबेक आर्थिक और सुरक्षा के मामले में भरोसेमंद साझेदार बना रहेगा। लेकिन कार्टर प्रशासन ने अपना रुख नहीं बदला।

मई 1980 में यह मुद्दा समाप्त हो गया, जब प्रांत के मतदाताओं ने सरकार के संप्रभुता-संबंधी जनमत संग्रह को 60-40 प्रतिशत के अंतर से खारिज कर दिया। यदि यह प्रस्ताव सफल होता तो क्यूबेक राजनीतिक रूप से स्वतंत्र हो जाता, जबकि कनाडा के साथ आर्थिक संबंध बनाए रखता।

1995 का क्यूबेक जनमत संग्रह

सितंबर 1995 तक क्यूबेक की स्वतंत्रता का मुद्दा ठंडे बस्ते में पड़ा रहा। उस समय क्यूबेक्वा पार्टी के एक अन्य प्रीमियर जैक्स पैरिजो ने घोषणा की कि अगले महीने जनमत संग्रह कराया जाएगा। इसमें कनाडा के साथ नए राजनीतिक और आर्थिक संबंधों का प्रस्ताव रखने के बाद एक संप्रभु क्यूबेक बनाने की योजना पर मतदान होना था।

अभियान की शुरुआत में प्रस्ताव का समर्थन न करने वालों को अच्छी बढ़त हासिल थी। लेकिन संघीय राजनीति के करिश्माई नेता लुसियन बुशार्द के स्वतंत्रता समर्थक आंदोलन का नेतृत्व संभालने के बाद मुकाबला तेजी से कड़ा हो गया।

ओटावा और वाशिंगटन में चिंता बढ़ने के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री वॉरेन क्रिस्टोफर ने कहा कि जनमत संग्रह कनाडा का आंतरिक मामला है। हालांकि, उन्होंने एक मजबूत और एकजुट कनाडा के साथ अमेरिका के अच्छे संबंधों को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि स्वतंत्र क्यूबेक को ऐसे संबंधों की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।

यह बात पैरिजो के उस दावे के जवाब में कही गई थी कि क्यूबेक के स्वतंत्र होने के बाद वह अपने आप उत्तर अमेरिकी मुक्त व्यापार समझौते (नाफ्टा) में शामिल हो जाएगा। फ्रांस के राष्ट्रपति जैक शिराक द्वारा स्वतंत्र क्यूबेक को मान्यता देने की बात कहे जाने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने कहा कि एक मजबूत और एकजुट कनाडा अमेरिका का अच्छा साझेदार रहा है और दुनिया में उसकी महत्वपूर्ण व सकारात्मक भूमिका रही है।

क्लिंटन प्रशासन पहले ही स्पष्ट कर चुका था कि अगर जनमत संग्रह में क्यूबेक की स्वतंत्रता के पक्ष में फैसला आता है, तो अमेरिका स्वतंत्र क्यूबेक को तुरंत मान्यता नहीं देगा। 1995 के जनमत संग्रह में कनाडा के साथ बने रहने के समर्थक पक्ष को 50.6 प्रतिशत वोट मिले, जबकि स्वतंत्रता के समर्थकों को 49.4 प्रतिशत वोट हासिल हुए। इस बेहद मामूली अंतर से कनाडा समर्थक पक्ष की जीत हुई और इसके बाद क्यूबेक की स्वतंत्रता का मुद्दा कुछ समय के लिए शांत हो गया। हालांकि, बाद में फिर मजबूत हुई क्यूबेक्वा पार्टी ने कहा कि अगर वह चुनाव में जीत हासिल करती है, तो क्यूबेक की स्वतंत्रता को लेकर एक और जनमत संग्रह कराएगी।

समर्थन करने वाले अमेरिकी

इस साल मई में अल्बर्टा की प्रीमियर डेनियल स्मिथ ने कहा कि अल्बर्टा के लोग 19 अक्टूबर को जनमत संग्रह के लिए मतदान करेंगे। इसमें तय होगा कि प्रांत कनाडा में रहना चाहता है या अलग होने की दिशा में कानूनी प्रक्रिया शुरू करना चाहता है, जिससे दूसरे बाध्यकारी जनमत संग्रह का रास्ता खुलेगा।

यह फैसला प्रांत में स्वतंत्रता के समर्थन और विरोध में जारी नागरिक याचिका अभियानों के बाद लिया गया। पहले अपने रुख को लेकर असमंजस में दिखीं स्मिथ ने कहा कि वह कनाडा में बने रहने के पक्ष में मतदान करेंगी।

उन्होंने कहा कि इसका कारण प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की सरकार की ओर से अल्बर्टा की चिंताओं पर ध्यान दिया जाना है।

ट्रंप ने अब तक सार्वजनिक रूप से अपना रुख नहीं बताया है, हालांकि वह कनाडा को 51वां अमेरिकी राज्य बनाने की बात कई बार कह चुके हैं।

अल्बर्टा के पास ऊर्जा के बड़े संसाधन हैं और स्मिथ की नीतियां अमेरिकी राष्ट्रपति के दृष्टिकोण ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ (एमएजीए) के अनुकूल हैं, इसलिए यह अमेरिका के लिए आकर्षक बात हो सकती है।

कनाडा पर ट्रंप के शुल्क संबंधी कदमों का अल्बर्टा पर अपेक्षाकृत कम असर पड़ा है क्योंकि कनाडा से तेल और गैस के निर्यात को इससे छूट मिली हुई है।

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट अल्बर्टा को “अमेरिका का स्वाभाविक साझेदार” बताते हैं। उन्होंने कहा, “लोग संप्रभुता चाहते हैं। वे वही चाहते हैं जो अमेरिका के पास है।”

अल्बर्टा और ट्रंप के संबंध

हाल ही में एंगस रीड के एक सर्वेक्षण में पता चला कि केवल 23 प्रतिशत अल्बर्टावासी ट्रंप को अनुकूल नजरिए से देखते हैं, लेकिन कई अलगाववादी उनके प्रशासन को एक महत्वपूर्ण सहयोगी मानते हैं।

अल्बर्टा प्रॉस्पेरिटी प्रोजेक्ट के नेताओं ने अमेरिकी सरकार के अधिकारियों के साथ तीन बार बैठक की है। उनका दावा है कि इन अधिकारियों की व्हाइट हाउस तक सीधी पहुंच है।

हॉकस्ट्रा ने पहले इन बैठकों के होने से इनकार किया था, लेकिन बाद में इन्हें सामान्य संपर्क बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई गई है।

कार्नी और स्मिथ दोनों ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिकी प्रशासन कनाडा की संप्रभुता का सम्मान करेगा।

सर्वेक्षणों में पता चला है कि बड़ी संख्या में लोग ‘कनाडा में बने रहने’ के पक्ष में हैं। यदि यह बढ़त कायम रहती है तो जनमत संग्रह में इस पक्ष की बड़ी जीत सुनिश्चित होगी।

जो भी हो, न तो पुराने उदाहरणों और न ही कनाडा की चेतावनियों से ट्रंप पर कोई असर पड़ने की संभावना है। ट्रंप का कहना है कि कनाडा को एक देश नहीं बल्कि राज्य होना चाहिए।

(द कन्वरसेशन) जोहेब नरेश

नरेश


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