यमन की ‘सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल’ को भंग किया जाएगा

यमन की ‘सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल’ को भंग किया जाएगा

यमन की ‘सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल’ को भंग किया जाएगा
Modified Date: January 9, 2026 / 08:15 pm IST
Published Date: January 9, 2026 8:15 pm IST

काहिरा, नौ जनवरी (एपी) यमन की ‘सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल’ (एसटीसी) और उसके संस्थानों को भंग कर दिया जाएगा। समूह के महासचिव अब्दुल रहमान जलाल अल-सेबैही ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

दक्षिणी क्षेत्रों में हफ्तों से जारी अशांति और इसके नेता के संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) भाग जाने के ठीक एक दिन बाद यह घटनाक्रम हुआ है।

अब्दुल रहमान जलाल अल-सेबैही ने शुक्रवार को ‘यमन टीवी’ पर प्रसारित एक संबोधन में यह घोषणा की।

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उन्होंने कहा कि हद्रमत और अल-महरा प्रांतों में हाल में हुई ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं’’ का आकलन करने के लिए एक बैठक आयोजित की गई थी। स्थिति को शांत करने के सभी प्रयासों को खारिज किए जाने के बाद यह बैठक हुई थी।

हालांकि, आंतरिक विभाजन के स्पष्ट संकेत के रूप में, एसटीसी के प्रवक्ता अनवर अल-तमीमी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि एसटीसी से संबंधित निर्णय केवल परिषद द्वारा समग्र रूप से और उसके अध्यक्ष के नेतृत्व में ही लिए जा सकते हैं।

एसटीसी की स्थापना अप्रैल 2017 में उन समूहों के लिए एक संगठन के रूप में की गई थी जो दक्षिणी यमन को 1967 और 1990 के बीच की स्थिति में एक स्वतंत्र राज्य के रूप में बहाल करने की मांग करते हैं।

पिछले महीने एसटीसी द्वारा हद्रमत और अल-महरा प्रांतों में घुसपैठ करने और तेल-समृद्ध क्षेत्र पर कब्ज़ा करने के बाद तनाव बढ़ गया। इसने नेशनल शील्ड फोर्सेज से संबद्ध बलों को खदेड़ दिया, जो ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों से लड़ने में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ हैं।

हालांकि, नेशनल शील्ड फोर्सेज ने अदन में राष्ट्रपति भवन हद्रमत पर पुनः नियंत्रण हासिल कर लिया है और अल-महरा में शिविरों पर फिर से कब्ज़ा कर लिया है।

अल-सेबैही ने कहा, ‘‘चूंकि हमने हद्रमत और अल-महरा प्रांतों के खिलाफ सैन्य अभियान से संबंधित निर्णय में भाग नहीं लिया, इसलिए परिषद का बने रहना अब उस उद्देश्य की पूर्ति नहीं करता जिसके लिए इसे गठित किया गया था।’’

उन्होंने कहा कि एसटीसी की सभी मुख्य एजेंसियों और सहायक इकाइयों को भंग कर दिया जाएगा और यमन के अंदर और बाहर स्थित इसके कार्यालय बंद कर दिए जाएंगे।

यह फैसला काउंसिल के नेता एदरस अल-जुबैदी के यमन से नाव द्वारा सोमालिया भागने और बाद में उन्हें संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबूधाबी ले जाये जाने के एक दिन बाद आया है। अल-जुबैदी पर राजद्रोह का आरोप है।

यूएई इस काउंसिल का प्रमुख समर्थक रहा है।

एपी सुभाष पवनेश

पवनेश


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