योग,‘एक्यूपंक्चर’ और मार्शल आर्ट्स भारत-चीन के बीच साझा सभ्यतागत संबंधों को दर्शाते हैं:चीनी अधिकारी

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योग,‘एक्यूपंक्चर’ और मार्शल आर्ट्स भारत-चीन के बीच साझा सभ्यतागत संबंधों को दर्शाते हैं:चीनी अधिकारी

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  • Publish Date - June 18, 2026 / 03:35 PM IST,
    Updated On - June 18, 2026 / 03:35 PM IST

(के.जे.एम. वर्मा)

बीजिंग, 18 जून (भाषा) चीन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारत की प्राचीन आध्यात्मिक व शारीरिक स्वास्थ्य पद्धति योग और चीन की ‘एक्यूपंक्चर’ और मार्शल आर्ट्स दोनों देशों के बीच साझा सभ्यतागत संबंधों को दर्शाते हैं।

चीन अंतरराष्ट्रीय विकास सहयोग एजेंसी (सीआईडीसीए) के अध्यक्ष लूओ जोहुई ने बुधवार को यहां एक कार्यक्रम में कहा, “हाल के वर्षों में योग चीन में बहुत लोकप्रिय हो गया है। इसी तरह, चीन की एक्यूपंक्चर और मार्शल आर्ट्स भारत में काफी मशहूर है।”

उन्होंने इस अवसर पर संयुक्त राष्ट्र के पूर्व राजनयिक सिद्धार्थ चटर्जी की पुस्तक ‘माय फाइव टू थ्राइव’ का विमोचन किया। यह पुस्तक श्वास तकनीकों और योग पर आधारित है।

लुओ ने यह टिप्पणी अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले की, जो हर वर्ष चीन में उत्साह के साथ मनाया जाता है। योग दिवस हर साल 21 जून को दुनिया भर में मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने 2014 में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को मान्यता दी थी।

बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास शुक्रवार को एक बड़ा योग दिवस कार्यक्रम आयोजित करेगा। इसके बाद चीन में भारत के अन्य मिशन भी कार्यक्रम आयोजित करेंगे।

चटर्जी ने अपने संबोधन में कहा कि सांस लेना मानव जीवन का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है और श्वास संबंधी तकनीकें बेहतर जीवन जीने में मदद करती हैं।

उन्होंने कहा, “हमारे जीवन का हर सेकंड एक सांस के साथ जुड़ा होता है। जन्म के समय हम अपनी पहली सांस लेते हैं और इस दुनिया को छोड़ते समय अपनी आखिरी सांस छोड़ते हैं। इन दो क्षणों के बीच ही हमारे पूरे जीवन की कहानी लिखी जाती है।”

भाषा जोहेब संतोष

संतोष