युवाओं में बढ़ रहा कम उम्र में जुए की लत का खतरा, सख्त नियमन और जागरूकता की जरूरत : अध्ययन
युवाओं में बढ़ रहा कम उम्र में जुए की लत का खतरा, सख्त नियमन और जागरूकता की जरूरत : अध्ययन
( चार्ल्स लिविंगस्टोन, मोनाश यूनिवर्सिटी )
मेलबर्न, 10 जुलाई (द कन्वरसेशन) विशेषज्ञों का कहना है कि युवाओं में कम उम्र में जुए की लत लगने का खतरा बढ़ रहा है और इस समस्या से निपटने के लिए सरकार को जुए के विज्ञापनों और उद्योग पर कड़े नियंत्रण लगाने के साथ-साथ परिवारों को भी बच्चों को इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना होगा।
अध्ययन के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया में आठ प्रतिशत से अधिक वयस्क किसी न किसी रूप में जुए के दुष्प्रभावों से प्रभावित हैं, जबकि लगभग एक प्रतिशत वयस्क अत्यधिक जोखिम वाले स्तर पर जुआ खेलते हैं।
शोधकर्ताओं ने कहा कि 18 से 34 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं पर विशेष रूप से जुए की लत का जोखिम है। नियमित रूप से ‘पोकी’ (पोकर मशीन) और ऑनलाइन सट्टेबाजी करने वाले इस आयु वर्ग के लगभग 90 प्रतिशत लोगों को आर्थिक नुकसान, रिश्ते टूटने और अन्य गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पोकर मशीन और ऑनलाइन सट्टेबाजी जैसे जुए के कुछ स्वरूप अन्य की तुलना में अधिक नुकसानदेह हैं और इनसे लत लगने की आशंका अधिक रहती है।
उन्होंने कहा कि जुए से होने वाला सबसे आम नुकसान आर्थिक होता है। इसमें खर्च के लिए कम धन बचने से लेकर जीवनभर की बचत या मकान तक गंवाने जैसी गंभीर स्थितियां शामिल हैं।
अध्ययन में कहा गया है कि जुआ मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डालता है। इससे पछतावा, अपराधबोध, शर्म और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसका संबंध अवसाद और चिंता जैसे मानसिक रोगों से भी पाया गया है। शोध के अनुसार, जुआ आत्महत्या के जोखिम को भी बढ़ा सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, जुए का असर केवल जुआ खेलने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके परिवार, जीवनसाथी, मित्रों और यहां तक कि कार्यस्थल पर भी पड़ता है। माता-पिता में जुए की लत का संबंध पारिवारिक हिंसा, वैवाहिक विवाद, बच्चों के साथ दुर्व्यवहार और उनकी उपेक्षा से भी जोड़ा गया है।
अध्ययन में कहा गया है कि जुए की लत ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति नुकसान होने के बावजूद जुआ खेलने की तीव्र इच्छा पर नियंत्रण नहीं रख पाता। इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और अमेरिकी मनोरोग संघ सहित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त चिकित्सकीय वर्गीकरण प्रणालियों में व्यवहार संबंधी विकार के रूप में परिभाषित किया गया है।
शोधकर्ताओं ने कहा कि बचपन में जुए के संपर्क में आने से वयस्क होने पर जुआ संबंधी गंभीर समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है। जितनी कम उम्र में कोई व्यक्ति जुआ खेलना शुरू करता है, उसके लती बनने की संभावना उतनी अधिक होती है।
अध्ययन के अनुसार, स्मार्टफोन और ऑनलाइन सट्टेबाजी के बढ़ते चलन ने जुए को घर-घर तक पहुंचा दिया है। इससे युवा बिना किसी कैसीनो या जुआ केंद्र में गए और कई बार परिवार की जानकारी के बिना भी जुआ खेलना शुरू कर सकते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, किशोरावस्था में मस्तिष्क के विकास की प्रक्रिया के कारण जोखिम उठाने की प्रवृत्ति अधिक होती है। इस दौरान छोटा सा पुरस्कार मिलने पर भी डोपामिन नामक रसायन का स्राव अधिक हो सकता है, जिससे जुए की लत लगने का खतरा बढ़ता है।
उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से पिछड़े इलाकों में जुए की मशीनों की अधिक उपलब्धता और जुआ उद्योग के आक्रामक विज्ञापन भी इस समस्या को बढ़ावा देते हैं। टेलीविजन और खेल प्रतियोगिताओं के दौरान प्रसारित होने वाले विज्ञापन लोगों की भावनाओं को प्रभावित करने के उद्देश्य से तैयार किए जाते हैं।
अध्ययन में यह भी कहा गया है कि ऑनलाइन सट्टेबाजी कंपनियां उपयोगकर्ताओं की गतिविधियों से जुड़ा बड़ा डेटा एकत्र कर उनका विस्तृत प्रोफाइल तैयार करती हैं, जिसका इस्तेमाल लक्षित विज्ञापनों के लिए किया जाता है।
विशेषज्ञों ने कहा कि जुए के विज्ञापनों पर नियंत्रण और उद्योग के लिए अधिक प्रभावी नियामक व्यवस्था की आवश्यकता है। उनके अनुसार, वर्तमान में प्रस्तावित प्रतिबंध बच्चों और युवाओं को जुए के प्रभाव से पर्याप्त सुरक्षा देने के लिए पर्याप्त नहीं माने जा रहे हैं।
हालांकि, उन्होंने कहा कि जुए की लत का उपचार संभव है। संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा (कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी) जैसी उपचार पद्धतियां लोगों को नकारात्मक सोच और व्यवहार में बदलाव लाने में मदद करती हैं। इसके बावजूद, जुए की लत से पीड़ित अधिकतर लोग सामाजिक कलंक और शर्म के कारण उपचार नहीं कराते।
शोधकर्ताओं ने कहा कि युवाओं को जुए के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए सरकार को जुए के विज्ञापनों पर कड़े प्रतिबंध लगाने और उद्योग के नियमन को मजबूत करने की आवश्यकता है। वहीं, परिवारों को बच्चों के साथ खेलों को मनोरंजन के रूप में देखने पर जोर देना चाहिए, जुए को खेल का स्वाभाविक हिस्सा नहीं मानना चाहिए और जरूरत पड़ने पर ऑनलाइन जुआ वेबसाइटों तक पहुंच रोकने वाले डिजिटल साधनों का उपयोग करना चाहिए।
परिवार के स्तर पर माता पिता क्या कर सकते हैं:
_बच्चों के साथ खेलों पर बात करते हुए उससे जुड़े मनोरंजन और मस्ती पर बात करें।
– रात साढ़े आठ बजे के बाद खेल प्रसारण देखने से बचें क्योंकि इस समय के बाद मौजूदा और प्रस्तावित प्रावधानों के तहत जुए के विज्ञापन प्रसारित किए जा सकते हैं।
– आपके बच्चे द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे उपकरणों पर जुए के खेल तक पहुंच या भुगतान को प्रतिबंधित करने वाले ऑनलाइन टूल्स का इस्तेमाल करें ।
द कन्वरसेशन मनीषा नरेश
नरेश

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