टीकाकरण नहीं कराने वाले व्यक्ति से संक्रमित होने का खतरा 20 गुना अधिक, अध्ययन में सामने आयी ये वजह

टीकाकरण नहीं कराने वाले मित्र से आपके कोविड संक्रमित होने का खतरा 20 गुणा अधिक है

टीकाकरण नहीं कराने वाले व्यक्ति से संक्रमित होने का खतरा 20 गुना अधिक, अध्ययन में सामने आयी ये वजह
Modified Date: November 29, 2022 / 07:57 pm IST
Published Date: October 28, 2021 1:41 pm IST

(क्रिस्टोफर बेकर और क्रिस्टोफर बेकर, मेलबर्न विश्वविद्यालय)

मेलबर्न, 28 अक्टूबर (द कन्वरसेशन) न्यू साउथ वेल्स, विक्टोरिया और ऑस्ट्रेलियन कैपिटल टेरिटरी (एक्ट) में लॉकडाउन में ढील दिए जाने के बाद लोगों ने कार्यालयों में जाना फिर से शुरू कर दिया है और वे सामाजिक मेल-जोल बढ़ा रहे हैं, जबकि कई लोगों का अभी टीकाकरण नहीं हुआ है।

टीकाकरण करा चुके कई लोग टीकाकरण नहीं कराने वाले लोगों के संपर्क में आने को लेकर चिंतित हैं। वे ट्रेन में यात्रा करते समय और सुपरमार्केट जैसे स्थानों पर ऐसे लोगों के संपर्क में आ सकते हैं, जिन्हें टीका नहीं लगा है। इसके अलावा वे एक दिसंबर से कोविड प्रतिबंधों में और ढील दिए जाने के बाद पब और रेस्तरां में भी टीकाकरण नहीं कराने वाले लोगों के संपर्क में आ सकते हैं।

कुछ लोगों के मन में सवाल उठ सकता है कि टीकाकरण करा चुका व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के टीकाकरण की स्थिति को लेकर चिंतित क्यों होगा? टीका लगवाने के बाद व्यक्ति के स्वयं संक्रमित होने और उसके कारण अन्य लोगों के संक्रमित होने की आशंका भी कम हो जाती है। हालांकि टीकाकरण गंभीर संक्रमण से मजबूत सुरक्षा प्रदान करता है लेकिन कुछ लोगों को फिर भी गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में भर्ती होने की आवश्यकता पड़ सकती है।

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टीकाकरण नहीं कराने वाले व्यक्ति के संपर्क में आने से टीका लगवा चुके व्यक्ति के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की कितनी आशंका है?

विक्टोरियन स्वास्थ्य विभाग की हालिया रिपोर्ट में पाया गया है कि टीका नहीं लगवाने वाले लोगों के टीके लगवा चुके लोगों की तुलना में संक्रमित होने की आशंका 10 गुना अधिक होती है।

यदि मैं टीकाकरण नहीं कराने वाले किसी व्यक्ति के साथ समय बिताता हूं, तो इस बात की आशंका है कि वे संक्रमित हों और मुझे संक्रमित कर दें, लेकिन अगर उन्हें टीका लग चुका है, तो उनके संक्रमित होने की संभावना 10 गुणा कम हैं और मेरे उनसे संक्रमित होने की आशंका भी आधी रह जाएगी। यानी यदि टीकाकरण नहीं कराने वाले व्यक्ति की तुलना में टीका लगवा चुके व्यक्ति से संक्रमित होने का जोखिम 20 गुणा कम है।

यह गणना टीके के प्रकार और इस बात पर निर्भर करती है कि टीकाकरण कराए कितना समय बीत चुका है।

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जिन लोगों का टीकाकरण नहीं हो सकता, उनकी सुरक्षा कैसे की जाए?

कुछ लोगों को टीका नहीं लग पाया है क्योंकि या तो उनकी आयु कम है या वे किसी ऐसी बीमारी से पीड़ित हैं जिससे कि उनका टीकाकरण नहीं कराया जा सकता। कुछ ऐसे लोग हैं, जिनकी रोग प्रतिरोधी क्षमता कमजोर है। ऐसे में उन्हें दोनों खुराक लेने के बावजूद समुदाय के अन्य लोगों की तरह संक्रमण से सुरक्षा नहीं मिल सकती।

अधिक से अधिक लोगों को टीकाकरण कराके इन लोगों को सुरक्षा प्रदान की जा सकती है। टीका नहीं लगवा पाने वाले लोग यदि टीकाकरण करा चुके लोगों के संपर्क में आते हैं, तो उनके संक्रमित होने की आशंका भी कम होती है। इसके अलावा टीकाकरण नहीं करा पाने वाले लोग मास्क पहनकर, हाथ धोकर और इसी प्रकार की अन्य सावधानियां बरतकर खतरे को कम कर सकते है।

क्या रैपिड एंटीजन जांच से मदद मिलती है?

कुछ लोगों का सुझाव है कि जो लोग टीकाकरण नहीं कराना चाहते, उनकी बार-बार जांच करके संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है। यदि आपने अपने घर पर रैपिड एंटीजन जांच की है, तो आपके संक्रमित होने की स्थिति में इस जांच का परिणाम सही आने की संभावना 64 प्रतिशत है।

रैपिड एंटीजन जांच से लगभग दो-तिहाई मामलों का पता लग सकता है। यदि आप किसी ऐसे स्थान पर जाते हैं, जहां सभी ने रैपिड एंटीजन जांच कराई है और जांच परिणाम में उनके संक्रमित नहीं होने की पुष्टि हुई है, तो संक्रमण के जोखिम में तीन गुणा कमी होगी। रैपिड जांच से खतरा भले ही कम होता है, लेकिन यह टीकों का स्थान नहीं ले सकती। यदि इन दोनों का साथ में इस्तेमाल किया जाए, तो यह अधिक फायदेमंद होगा।

 


लेखक के बारे में

डॉ.अनिल शुक्ला, 2019 से CG-MP के प्रतिष्ठित न्यूज चैनल IBC24 के डिजिटल ​डिपार्टमेंट में Senior Associate Producer हैं। 2024 में महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय से Journalism and Mass Communication विषय में Ph.D अवॉर्ड हो चुके हैं। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से M.Phil और कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर से M.sc (EM) में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। जहां प्रावीण्य सूची में प्रथम आने के लिए तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा के हाथों गोल्ड मेडल प्राप्त किया। इन्होंने गुरूघासीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर से हिंदी साहित्य में एम.ए किया। इनके अलावा PGDJMC और PGDRD एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स भी किया। डॉ.अनिल शुक्ला ने मीडिया एवं जनसंचार से संबंधित दर्जन भर से अधिक कार्यशाला, सेमीनार, मीडिया संगो​ष्ठी में सहभागिता की। इनके तमाम प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में लेख और शोध पत्र प्रकाशित हैं। डॉ.अनिल शुक्ला को रिपोर्टर, एंकर और कंटेट राइटर के बतौर मीडिया के क्षेत्र में काम करने का 15 वर्ष से अधिक का अनुभव है। इस पर मेल आईडी पर संपर्क करें anilshuklamedia@gmail.com