14 करोड़ रुपये से भी ज़्यादा क़ीमत में खरीदा गया कबूतर, जानिए क्या है इस कबूतर की खासियत

14 करोड़ रुपये से भी ज़्यादा क़ीमत में खरीदा गया कबूतर, जानिए क्या है इस कबूतर की खासियत

14 करोड़ रुपये से भी ज़्यादा क़ीमत में खरीदा गया कबूतर, जानिए क्या है इस कबूतर की खासियत
Modified Date: November 29, 2022 / 07:57 pm IST
Published Date: November 17, 2020 8:46 am IST

बेल्जियम। बेल्जियम के एक रेसर कबूतर को रिकॉर्ड 19 लाख डॉलर में बेचा गया है, यह मादा कबूतर दो साल की है जिसका नाम न्यू किम है। पहले इसे 237 डॉलर पर नीलामी के लिए रखा गया था लेकिन चीन के एक व्यक्ति ने इसे 19 लाख डॉलर में खरीद लिया। रुपए में ये राशि करीब 14 करोड़ 15 लाख रुपये से भी ज़्यादा है।

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इससे पहले का रिकॉर्ड एक चार साल के नर कबूतर के नाम था जो 14 लाख डॉलर में बिका था, अरमांडो नाम के रेसिंग चैंपियन कबूतर को कबूतरों का लुईस हैमिल्टन भी कहा जाता था, उसके रिटायर होने के बाद 2019 में उसे बेचा गया। वहीं, न्यू किम ने 2018 में कई मुक़ाबले जीते जिसमें नैशनल मिडल डिस्टेंस रेस भी शामिल है, उसके बाद से न्यू किम भी रिटायर हो गई है।

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पिछले कुछ सालों में चीन में कबूतरों की रेस काफ़ी लोकप्रिय हो रही है, अरमांडो की तरह न्यू किम को खरीदने के लिए दो चीनी खरीददार एक से बढ़कर एक बोलियां लगा रहे थे, रेसिंग कबूतर 10 साल की उम्र होने तक बच्चे पैदा कर सकते हैं, ऐसा लगता है कि न्यू किम को भी उसके नए मालिक प्रजनन के लिए इस्तेमाल करेंगे। लेकिन नीलामी करने वालों का कहना है कि इस बात की वजह से ये नीलामी और असाधारण हो जाती है।

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नीलामी संस्था पीपा के सीईओ निकोलास ने मीडिया को बताया, “ये रिकॉर्ड कीमत अविश्वसनीय है क्योंकि ये एक मादा कबूतर है, अक्सर, नर कबूतर की कीमत ज़्यादा होती है क्योंकि वो ज़्यादा बच्चे पैदा कर सकता है।” बेल्जियम में लगभग 20 हज़ार कबूतर पालक रहते हैं।


लेखक के बारे में

डॉ.अनिल शुक्ला, 2019 से CG-MP के प्रतिष्ठित न्यूज चैनल IBC24 के डिजिटल ​डिपार्टमेंट में Senior Associate Producer हैं। 2024 में महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय से Journalism and Mass Communication विषय में Ph.D अवॉर्ड हो चुके हैं। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से M.Phil और कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर से M.sc (EM) में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। जहां प्रावीण्य सूची में प्रथम आने के लिए तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा के हाथों गोल्ड मेडल प्राप्त किया। इन्होंने गुरूघासीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर से हिंदी साहित्य में एम.ए किया। इनके अलावा PGDJMC और PGDRD एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स भी किया। डॉ.अनिल शुक्ला ने मीडिया एवं जनसंचार से संबंधित दर्जन भर से अधिक कार्यशाला, सेमीनार, मीडिया संगो​ष्ठी में सहभागिता की। इनके तमाम प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में लेख और शोध पत्र प्रकाशित हैं। डॉ.अनिल शुक्ला को रिपोर्टर, एंकर और कंटेट राइटर के बतौर मीडिया के क्षेत्र में काम करने का 15 वर्ष से अधिक का अनुभव है। इस पर मेल आईडी पर संपर्क करें anilshuklamedia@gmail.com