Chhattisgarh News: फिर खुली कांग्रेस सरकार की दावों की पोल! अपने कार्यकाल में सिर्फ इतने लोगों दिया था 100 दिन का रोजगार, मनरेगा को लेकर सामने आई CAG रिपोर्ट

फिर खुली कांग्रेस सरकार के दावों की पोल! अपने कार्यकाल में सिर्फ इतने लोगों दिया था 100 दिन का रोजगार, Chhattisgarh News: CAG report released on MNREGA

Chhattisgarh News: फिर खुली कांग्रेस सरकार की दावों की पोल! अपने कार्यकाल में सिर्फ इतने लोगों दिया था 100 दिन का रोजगार, मनरेगा को लेकर सामने आई CAG रिपोर्ट

Reported By: Rajesh Raj,
Modified Date: July 21, 2026 / 12:06 am IST
Published Date: July 20, 2026 10:32 pm IST

रायपुरः Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में मनरेगा योजना को लेकर CAG की रिपोर्ट के बाद सियासत तेज हो गई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि साल 2019-20 से 2023-24 के बीच प्रदेश में एक फीसदी से भी कम परिवारों को 100 दिनों का पूरा रोजगार मिल सका। वहीं, काम मांगने वाले कई परिवारों को ना तो रोजगार मिला और ना ही बेरोजगारी भत्ता दिया गया।

दरअसल, छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में भारत के नियंत्रक और महालेखाकार की ओर से मनरेगा योजना के क्रियान्वयन पर एक रिपोर्ट पेश की गई है। ये रिपोर्ट 2019-20 से लेकर 2023-24 के बीच की है.. यानी अंतिम के 4 महीने को छोड़ बाकी पूरा पीरियड कांग्रेस कार्यकाल का है। सीएजी रिपोर्ट के अनुसार, 152 लाख 36 हजार परिवारों ने काम की मांग की, लेकिन 134 लाख 10 हजार परिवारों को ही मिला। 18 लाख 26 हजार परिवारों को सरकार ना तो काम दे पाई और ना ही योजना के अनुसार बेरोजगारी भत्ता दे सकी। 134 लाख 10 हजार जिन परिवारों को काम मिला भी, उनमें से 111 लाख 31 हजार, यानी 83 प्रतिशत परिवार को न्यूनतम 100 दिनों गारंटीड रोजगार नहीं मिल सकी। सिर्फ 1 लाख 23 हजार यानी 0.92 प्रतिशत परिवार को ही 100 दिनों का गारंटीड रोजगार मिल सका। 21 लाख 56 हजार परिवार को 100 दिन से ज्यादा काम दिया गया। जो मनरेगा के कार्यान्वयन में असमानता को बताती है। अब इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार के मंत्री ने कांग्रेस पर हमला बोल दिया है।

Chhattisgarh News: सीएजी रिपोर्ट बताती है कि मनरेगा लागू करने में कई स्तरों पर गड़बड़ी की गई। मनरेगा श्रम बजट तैयार करने से पहले ना तो परिवारों का सर्वेक्षण किया गया और ना ही मनरेगा काम शुरू करने से पहले ग्राम सभा का अनुमोदन लिया गया। राशि उपलब्ध होने के बावजूद समय पर मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ। मनरेगा मजदूरों को पीएफ भी देना था, लेकिन 29 करोड़ 62 लाख की पीएफ राशि का भुगतान नहीं किया गया, जिसके चलते ब्याज और दंड की 84 करोड़ 59 लाख की देनदारी सरकार पर आ गई। 2019-24 के दौरान स्वीकृत कार्यों में से सिर्फ 61 प्रतिशत काम ही समय में पूरा हो सके। योजना के सोशल ऑडिट में भी लापरवाही बरती गई। ना तो पूरे पैसे खर्च किए गए ना ही पूरा सेटअप में भर्ती की गई। अब इतनी नेगेटिव रिपोर्ट को डिफेंड करना कांग्रेस के लिए आसान नहीं, इसलिए कांग्रेस के नेता CAG रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं। मनरेगा योजना को लेकर सामने आई CAG की रिपोर्ट ने रोजगार के आंकड़ों और योजना के संचालन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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