पटना, 17 अक्टूबर (भाषा) बिहार में पिछले पांच वर्षों के दौरान कुल 243 विधायकों में से 17 ने अपने दल बदले, जबकि विधानसभा में 99 विधेयक पेश किए गए और ये सभी पारित हुए।
‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ (एडीआर) और ‘बिहार इलेक्शन वॉच’ द्वारा शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।
वर्ष 2020 से 2025 के दौरान विधानसभा के कुल 15 सत्र हुए, जिनमें 146 बैठकें हुईं।
रिपोर्ट के अनुसार, विधानसभा की वेबसाइट से प्राप्त आंकड़ों पर आधारित अध्ययन में पाया गया कि 243 विधायकों ने कुल 22,505 प्रश्न पूछे, जिनमें ग्रामीण कार्य, शिक्षा, स्वास्थ्य और जल संसाधन से जुड़े विषय सबसे प्रमुख रहे।
सबसे अधिक प्रश्न पूछने वालों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अरुण शंकर प्रसाद (275 प्रश्न), कांग्रेस के मनोज प्रसाद सिंह (231) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के मुकेश कुमार यादव (230) शामिल रहे।
दलवार औसत में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी माकपा (माले) लिबरेशन के विधायकों ने सर्वाधिक सक्रियता दिखाई, जबकि सत्तारूढ़ जनता दल (यूनाइटेड) और भाजपा के विधायकों ने भी प्रश्नों की उल्लेखनीय संख्या दर्ज की।
‘बिहार इलेक्शन वॉच’ के राजीव कुमार ने बताया गया कि ग्रामीण कार्य, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर सबसे अधिक 3,000 से अधिक प्रश्न पूछे गए, जो जनता की प्राथमिकताओं को दर्शाते हैं।
विधानसभा सत्रों के दौरान 2021 से 2025 के बीच पारित प्रमुख विधेयकों में बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक, 2021, बिहार नियंत्रण अपराध विधेयक, 2024, और जननायक कर्पूरी ठाकुर कौशल विश्वविद्यालय विधेयक, 2025 शामिल हैं।
कुमार ने बताया कि विधानसभा की पारदर्शिता में सुधार हुआ है, और सत्रों की नियमितता बनी रही है। उन्होंने कहा कि कई मंत्रियों और वरिष्ठ पदाधिकारियों की उपस्थिति का डेटा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराया गया।
भाषा कैलाश
रवि कांत हक
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