बिहार: अस्पताल में फ्रैक्चर के इलाज के लिए गत्ते का ‘स्प्लिंट’ इस्तेमाल करने के मामले की जांच शुरू
बिहार: अस्पताल में फ्रैक्चर के इलाज के लिए गत्ते का ‘स्प्लिंट’ इस्तेमाल करने के मामले की जांच शुरू
बेगूसराय, सात अगस्त (भाषा) बिहार सरकार ने बेगूसराय जिले में एक सड़क दुर्घटना में घायल हुए एक व्यक्ति को प्राथमिक उपचार मुहैया कराने में अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा दिखाई गयी कथित लापरवाही की जांच शुरू कर दी है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
यह घटना 15 जुलाई की है लेकिन इसका खुलासा सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित एक वीडियो के बाद हुआ।
वीडियो में एक मरीज के टूटे हुए पैर पर गत्ता बांधकर उसे ‘स्प्लिंट’ के रूप में कथित तौर पर इस्तेमाल करते हुए देखा जा सकता है।
अधिकारियों के अनुसार, नवकोठी थाना क्षेत्र के महेशवारा गांव निवासी कृष्ण कुमार 15 जुलाई की रात एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उन्हें इलाज के लिए मंझौल अनुमंडलीय अस्पताल ले जाया गया।
बेगूसराय के सिविल सर्जन अशोक कुमार ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “इसे चिकित्सकीय लापरवाही नहीं कहा जा सकता, क्योंकि यह मरीज की जान बचाने के उद्देश्य से अपनाया गया एक अस्थायी उपाय था। हालांकि, यह प्रक्रिया किन परिस्थितियों में अपनाई गई, इसका पता लगाने के लिए हमने जांच शुरू कर दी है।”
उन्होंने बताया कि मंझौल अनुमंडलीय अस्पताल में मरीज के पैर के जिस भाग में फ्रैक्चर था उसे स्थिर करने के बाद बेहतर इलाज के लिए व्यक्ति को बेगूसराय सदर अस्पताल भेज दिया गया। वहां उसका सफलतापूर्वक उपचार किया गया।
अधिकारी ने बताया कि मरीज के उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी मिलने के काफी समय बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
जिला मजिस्ट्रेट श्रीकांत शास्त्री ने भी मंझौल के अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) को मामले की जांच करने का निर्देश दिया है।
मंझौल अनुमंडलीय अस्पताल के प्रभारी डॉ. अभिनव प्रियदर्शी ने बताया, “किसी हड्डी के टूटने के मामले में सबसे पहली प्राथमिकता घायल अंग को हिलने-डुलने से रोकना होती है। अगर ‘स्प्लिंट’ उपलब्ध नहीं हो, तो प्राथमिक उपचार के तहत गत्ते, लकड़ी या किसी अन्य कठोर सामग्री का अस्थायी ‘स्प्लिंट’ के रूप में इस्तेमाल करना स्वीकार्य चिकित्सकीय पद्धति है।”
डॉ. प्रियदर्शी ने बताया, “इससे मरीज को अस्पताल ले जाते समय टूटी हुई हड्डी के और अधिक खिसकने से रोका जा सकता है तथा उसे अतिरिक्त दर्द से भी राहत मिलती है।”
भाषा जितेंद्र पवनेश
पवनेश

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