Bihar Vidhansabha Session/Image Credit: IBC24.in
पटनाः Samrat Choudhary Kon Hai: सम्राट चौधरी बिहार के नए CM होंगे। उन्हें बीजेपी विधायक दल का नेता चुना गया है। केंद्रीय पर्यवेक्षक बने भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान ने उनके नाम की घोषणा की। कल 15 अप्रैल को लोकभवन में शपथ ग्रहण समारोह होगा। बता दें कि नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने के साथ ही उनका सीएम पद से इस्तीफा देना तय था। नए सीएम पद के लिए सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे चल रहा था। अब आखिरकार वे बिहार के नए सीएम चुन लिए गए हैं।
बिहार की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल सम्राट चौधरी का सियासी सफर विरासत, संघर्ष और बदलाव की कहानी बयां करता है। उन्हें राजनीति अपने पिता शकुनी चौधरी से विरासत में मिली, जो बिहार की सियासत के दिग्गज नेताओं में गिने जाते थे। शकुनी चौधरी कांग्रेस, समता पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल जैसे दलों में सक्रिय रहे और विधायक से लेकर सांसद तक का लंबा सफर तय किया। वे राज्य में ओबीसी राजनीति का मजबूत चेहरा माने जाते थे। सम्राट चौधरी न राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पाठशाला से निकले हैं और न ही बीजेपी से अपनी सियासी पारी की आगाज किया है। इसके बाद भी बीजेपी की मिट्टी में सम्राट इस तरह फले फूले के बिहार के चौधरी बनकर उभरे हैं। राबड़ी देवी की आरजेडी सरकार में सम्राट सबसे युवा मंत्री रहे तो मांझी की सरकार में कैबिनेट मंत्री बने, लेकिन सियासी बुलंदी बीजेपी में मिली। बीजेपी में आए हुए सम्राट चौधरी को सिर्फ 8 साल ही हुए हैं, लेकिन राजनीतिक पिच पर उन्होंने तमाम दिग्गज नेताओं को पीछे छोड़ दिया है।
Samrat Choudhary Kon Hai: सम्राट चौधरी, जिनका मूल नाम राकेश कुमार है, ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1990 के दशक में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) से की। महज 19 वर्ष की उम्र में वे मंत्री बनकर सुर्खियों में आ गए। 1999 में राबड़ी देवी की सरकार में उन्हें सबसे युवा मंत्रियों में शामिल किया गया। हालांकि, उम्र को लेकर उठे विवाद के बाद उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। आरजेडी से अलग होने के बाद सम्राट चौधरी ने जनता दल (यू) का दामन थामा। 2014 में जब नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद छोड़ा और जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया गया, तब मांझी सरकार में सम्राट चौधरी को कैबिनेट मंत्री बनाया गया। हालांकि, बाद में नीतीश कुमार के दोबारा मुख्यमंत्री बनने पर उन्हें कैबिनेट में जगह नहीं मिल सकी, जिससे उनका जेडीयू से मोहभंग हो गया। जेडीयू छोड़ने के बाद सम्राट चौधरी ने 2018 में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का दामन थाम लिया।
बीजेपी में शामिल होने के बाद उनका राजनीतिक कद लगातार बढ़ता गया। 2019 में, जब नित्यानंद राय प्रदेश अध्यक्ष थे, तब सम्राट चौधरी को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया। सम्राट चौधरी बीजेपी में शामिल हुए तो उस वक़्त एनडीए की सरकार में उन्हें पंचायती राज मंत्री भी बनाया गया था। 2020 में बीजेपी से विधान परिषद पहुंचते हैं। अगस्त 2022 में जब नीतीश कुमार ने बीजेपी से नाता तोड़कर आरजेडी के साथ महागठबंधन सरकार बनाई थी, तब सम्राट चौधरी को सियासी पहचान मिली। सम्राट चौधरी विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष बने। साल 2023 में सम्राट चौधरी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बने और इसके बाद नीतीश कुमार दोबारा से एनडीए में वापसी की तो डिप्टी सीएम की कुर्सी सौंप दी गई और अब वे सीएम की कुर्सी तक पहुंच गए हैं।