पटना, 22 जनवरी (भाषा) बिहार को प्रदेश के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में आयोजित राष्ट्रीय समीक्षा बैठक में यह घोषणा की गयी।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी बयान में बताया गया कि राज्य में नवंबर 2023 में मुख्यमंत्री डिजिटल स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत “सभी के लिए बिहार स्वास्थ्य अनुप्रयोग दूरदर्शी योजना (भव्या)” नामक एक स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) की शुरुआत की गई थी।
बयान के मुताबिक, इस दूरगामी परिकल्पना को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के मार्गदर्शन में वर्तमान मुख्य सचिव एवं तत्कालीन स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत द्वारा तैयार किया गया था।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, भव्या प्रणाली को राज्य के सभी 594 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों (जिला अस्पताल से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक) सफलतापूर्वक लागू किया गया है।
विभाग ने बताया कि इस प्रक्रिया में जिला से लेकर प्रखंड स्तर तक निरंतर वास्तविक समय निगरानी सुनिश्चित की गई और इससे सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में एक सुव्यवस्थित व प्रभावी कागज रहित स्वास्थ्य प्रणाली स्थापित हुई।
विभाग ने बयान में बताया कि इन निरंतर प्रयासों का परिणाम है कि बिहार अब देश के सर्वोच्च राज्यों में शामिल है, जहां सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन अनुरूप ‘भव्या’ का सफल कार्यान्वयन सुनिश्चित किया गया है। बयान के अनुसार, इस पहल के तहत ‘स्कैन एंड शेयर’ में अब तक 5.21 करोड़ टोकन सृजित कर बिहार ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
वहीं राज्य में अब तक 6.80 करोड़ आभा पहचान पत्र बनाए जा चुके हैं।
बयान के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड (ईएचआर) तैयार करने के मामले में बिहार ने देश में चौथा स्थान प्राप्त किया है।
इसके अलावा, भव्या परियोजना को नवाचार और प्रभावी कार्यान्वयन के लिए ‘ग्लोबल डिजिटल हेल्थ समिट 2024’ में इनोवेशन अवार्ड से सम्मानित किया गया था।
बयान में बताया गया कि डिजिटल स्वास्थ्य प्रोत्साहन योजना (डीएचआईएस) के तहत 7,835 सरकारी अस्पतालों का पंजीकरण किया गया और 37.60 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि का दावा किया गया, जो देश में सबसे अधिक है।
भाषा कैलाश जितेंद्र
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